नई दिल्ली: देश में साल 2019 से 2023 के बीच सड़क हादसों में हुई करीब आठ लाख नागरिकों ने जान गंवा दी, जिनमें से 1.5 लाख यानी 20% मौतें पैदल चलने वालों की थीं. यह जानकारी ताजा आंकड़ों में सामने आई है.
आईआईटी दिल्ली के ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन सेंटर द्वारा जारी ‘इंडिया स्टेटस रिपोर्ट ऑन रोड सेफ्टी’ में बताया गया है कि भले ही पैदल चलने वालों को फुटपाथ का इस्तेमाल करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त है, लेकिन राज्यों में इसका पालन न के बराबर होता है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की एक समिति के निर्देश पर 24 राज्यों में कराए गए ऑडिट में पाया गया है कि अधिकतर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में केवल 19% से 73% सड़कों पर ही फुटपाथ मौजूद हैं. महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा सड़कों पर फुटपाथ पाए गए.
प्रत्येक राज्य के चार शहरों में यह ऑडिट किया गया, जिसमें फुटपाथ की उपलब्धता, चौड़ाई और ऊंचाई को भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) के मानकों के अनुरूप जांचा गया.
केंद्र शासित प्रदेशों जैसे जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में केवल 3% और 5% सड़कों पर ही फुटपाथ मौजूद पाए गए. वहीं, बिहार और हरियाणा में यह आंकड़ा 19%-20% के आसपास रहा. अधिकतर मामलों में फुटपाथ आईआरसी मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए.
सुप्रीम कोर्ट ने इस सप्ताह दिए गए अपने आदेश में कहा, ‘नागरिकों के लिए उपयुक्त फुटपाथ होना जरूरी है. ये ऐसे होने चाहिए कि शारीरिक अक्षमता से प्रभावित लोग भी इनका इस्तेमाल कर सकें और इन पर से अतिक्रमण हटाना अनिवार्य है. यह अदालत पहले ही यह मान चुकी है कि पैदल यात्रियों को फुटपाथ पर चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त है.’
इंडिया रोड सेफ्टी कैंपेन के प्रमुख अमर श्रीवास्तव ने अख़बार से कहा कि ठीक तरह से बनाए गए और अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ सड़क हादसों को रोकने का सबसे सस्ता उपाय है. उन्होंने कहा, ‘यह हर शहर प्रशासन और स्थानीय सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए.’
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सड़क हादसों में मरने वालों में 21% पैदल यात्री होते हैं और भारत में साल 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों में लगभग पांचवां हिस्सा पैदल चलने वालों का था.
