नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार (26 मई) को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पॉक्सो केस रद्द करने की रिपोर्ट स्वीकार कर ली.
इस बीच, सिंह पर अभी भी पांच महिला पहलवानों द्वारा दायर यौन उत्पीड़न मामले में आरोप लगे हैं.
दिल्ली की पटियाला कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गोमती मनोचा के समक्ष मामले की सुनवाई हुई. इस मामले के बंद होने से आंशिक रूप से उस मामले का अंत हो गया है, जिसने देश में बड़े पैमाने पर विवाद, विरोध और जनाक्रोश देखा था.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की स्थिति अब ‘रद्द’ है.
कोर्ट के फैसले के बाद बृजभूषण के छोटे बेटे करण भूषण सिंह ने एक्स पर लिखा, ‘यह न्याय और सत्य की निर्णायक जीत है! सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं. न्यायपालिका अमर रहे, नेताजी अमर रहे!’
इस बीच, उनके बड़े बेटे प्रतीक भूषण सिंह ने एक्स पर लिखा, ‘हमें एक झूठे और मनगढ़ंत मामले में न्यायिक जीत हासिल हुई है. हर बेबुनियाद आरोप अब न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा रहा है. यह सत्य की जीत है – और यह जीत जारी रहेगी.’
ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से छह बार के भाजपा सांसद सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर 15 जून 2023 को कनॉट प्लेस थाने में दो एफआईआर दर्ज की थीं. एक एफआईआर भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत विभिन्न अपराधों के तहत दर्ज की गई थी, जबकि एक नाबालिग पहलवान द्वारा दर्ज की गई दूसरी एफआईआर पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी.
नाबालिग ने बाद में सिंह के खिलाफ अपने आरोप वापस ले लिए थे.
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल एक इन-चैम्बर कार्यवाही के दौरान नाबालिग शिकायतकर्ता ने पिछले न्यायाधीश को यह भी बताया कि वह दिल्ली पुलिस की जांच से संतुष्ट है और मामले को बंद करने का विरोध नहीं करती है.
इस बीच, यौन उत्पीड़न मामले में पांच महिला पहलवानों की शिकायतों के संबंध में सिंह के खिलाफ आरोप तय किए गए, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे घटनाएं 2016 और 2019 के बीच डब्ल्यूएफआई कार्यालय, सिंह के आवास और अन्य स्थानों पर हुई थीं.
गौरतलब है कि 21 अप्रैल 2023 को 7 महिला पहलवानों ने दिल्ली पुलिस में बृजभूषण के खिलाफ शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस द्वारा मामला दर्ज न किए जाने पर पहलवान जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए थे और अपनी एफआईआर दर्ज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
शीर्ष अदालत ने भी आरोपों को गंभीर मानते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था. जिसके बाद पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की थीं, जिनमें एक नाबालिग पहलवान की शिकायत पर पॉक्सो के तहत दर्ज किया गया मामला भी है.
हालांकि, नाबालिग और उसके पिता, जो शिकायतकर्ता थे, ने बाद में मजिस्ट्रेट के सामने एक ताजा बयान में सिंह के खिलाफ अपने आरोप वापस ले लिए थे. आरोप है कि ऐसा उन्होंने लगातार मिल रहीं धमकियों के चलते किया.
