नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने 11 दस्तावेजों की मांग की है, लेकिन इनमें से कम से कम पांच दस्तावेजों में आवेदनकर्ता का जन्म स्थान या जन्मतिथि नहीं दी गई है — जबकि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए ये दोनों जानकारियां अनिवार्य मानी जाती हैं.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इन 11 दस्तावेजों में से अनुसूचित जाति/जनजाति प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाणपत्र और निवास प्रमाणपत्र में आवेदनकर्ता की जन्मतिथि या जन्म स्थान नहीं होता. इन प्रमाणपत्रों में सिर्फ धारक का नाम, निवास स्थान, माता-पिता का नाम और समुदाय का नाम होता है — जन्म स्थान और तिथि का कोई उल्लेख नहीं होता. जबकि यह जानकारी आवेदन पत्र में भरनी होती है.
इसके अलावा, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) और फैमिली रजिस्टर भी स्वीकार्य दस्तावेजों में शामिल हैं लेकिन ये दोनों बिहार में अस्तित्व में ही नहीं हैं.
एक बूथ लेवल अधिकारी ने अखबार को बताया, ‘भरे गए फॉर्मों में सिर्फ 10% के साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न थे और ये सभी स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र थे. जिनके पास इन 11 दस्तावेजों में से कोई नहीं था, उन्होंने डोमिसाइल (निवास) सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर दिया है और उम्मीद है कि 10-12 दिन में मिल जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि डोमिसाइल सर्टिफिकेट पाने के लिए उन्होंने आधार कार्ड की कॉपी दी थी.’
उन्होंने आगे बताया कि बीते एक सप्ताह में उन्होंने 500 फॉर्म बांटे, जिनमें से 185 फॉर्म भरकर लौटाए गए.
स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न की घोषणा के बाद से डोमिसाइल सर्टिफिकेट, जिसे राजस्व अधिकारी या तहसीलदार द्वारा जारी किया जाता है, बिहार में बेहद मांग में है. स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न प्रक्रिया के तहत आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र या पैन कार्ड को स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची में शामिल नहीं किया गया है.
हैरानी की बात यह है कि जिन दस्तावेजों को इस बार शामिल नहीं किया गया है, लोग आमतौर पर उन्हीं का उपयोग करके स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न में मांगे गए 11 दस्तावेजों को बनवाते हैं.
कांग्रेस नेता ब्रजेश मुनन ने द हिंदू को बताया, ‘जिन दस्तावेजों की मांग की गई है, उनमें से कुछ में ही जन्मतिथि का जिक्र होता है. आमतौर पर आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में दिया जाता है, लेकिन इस बार चुनाव आयोग उसे स्वीकार नहीं कर रहा है.’
चुनाव आयोग ने किया ‘फैक्ट चेक’, राजद सांसद ने पलटवार किया
मंगलवार (8 जुलाई) को चुनाव आयोग ने अपने एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट कर राजद नेता तेजस्वी यादव के बयान को ‘भ्रामक’ बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग को स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न प्रक्रिया को लेकर खुद ही समझ नहीं है.
7 जुलाई को तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा था,
आज पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में हमने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में चुनाव आयोग पूर्णत: कन्फ़्यूज़्ड है. चुनाव आयोग एक दिन में तीन अलग अलग दिशानिर्देश जारी कर रहा है. बिहार के लाखों मतदाताओं के अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी विज्ञापनों और फेसबुक पोस्ट में पाए गए गंभीर विरोधाभासों पर हम अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते है.
इसके जवाब में निर्वाचन आयोग ने यादव के बयान को ‘गलत जानकारी’ बताया और फैक्ट चेक जारी किया.
See details in image below 👇
Stay Tuned, Stay Informed.
Link to #SIR order dated 24th Junehttps://t.co/Lh6Zuue1U9 https://t.co/OaZzzahb4b pic.twitter.com/IOlSvT9uaO
— Election Commission of India (@ECISVEEP) July 8, 2025
इसके बाद, राजद सांसद मनोज कुमार झा ने आयोग के पोस्ट पर सवाल उठाए हैं.
Dear @eciveep
आखिर किसके इशारे या किसके इरादे पर आपके ऑफिसियल ट्विटर हैंडल से इस तरह के पोस्ट हो रहे हैं ? नेता प्रतिपक्ष और महागठबंधन दल के शीर्ष नेताओं द्वारा इंगित किसी सवाल का जवाब है क्या भाई? तो बता दीजिये ना..
जन सैलाब जब सड़कों पर उतरेगा तो कोई शहं-“शाह” आपको इस कलुषित… https://t.co/tHRatL81VO— Manoj Kumar Jha (@manojkjhadu) July 8, 2025
उन्होंने लिखा, ‘प्रिय चुनाव आयोग, आखिर किसके इशारे या किसके इरादे पर आपके आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस तरह के पोस्ट हो रहे है? नेता प्रतिपक्ष और महागठबंधन दल के शीर्ष नेताओं द्वारा इंगित किसी सवाल का जवाब है क्या भाई? तो बता दीजिये ना.. जन सैलाब जब सड़कों पर उतरेगा तो कोई शहं-‘शाह’ आपको इस कलुषित कारनामे से बचा नहीं पायेगा.’
