नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान सोमवार (28 जुलाई) को पहलगाम हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर लोकसभा में विशेष चर्चा हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनुपस्थित रहे.
मालूम हो कि इस मुद्दे पर विपक्ष लंबे समय से विशेष सत्र बुलाने और प्रधानमंत्री की मौजूदगी में चर्चा कराने की मांग कर रहा था, लेकिन इसके बावजूद ऐसा नहीं हुआ.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहलगाम में हुए 22 अप्रैल के आतंकी हमले का सिर्फ़ एक संक्षिप्त ज़िक्र किया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों का कोई उल्लेख नहीं किया, जिनमें उन्होंने चार दिनों तक चले सैन्य टकराव के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम में मध्यस्थता करने की बात कही थी.
किसी दबाव में ऑपरेशन सिंदूर नहीं रोका गया: राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह ने कहा कि संघर्षविराम का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि भारत अपने ‘घोषित राजनीतिक और सैन्य उद्देश्यों’ को पहले ही हासिल कर चुका था और यह कहना कि ‘किसी दबाव में ऑपरेशन रोक दिया गया, निराधार और पूरी तरह से ग़लत है’.
लोकसभा में रक्षा मंत्री सिंह का भाषण ऑपरेशन सिंदूर और उसकी उपलब्धियों पर केंद्रित रहा, लेकिन उन्होंने इस बात का कोई ज़िक्र नहीं किया कि पहलगाम हमले के पीछे आतंकवादी भारत में कैसे घुसे, उनके खिलाफ जांच की स्थिति क्या है और उन्हें वे कैसे भागने में सफल रहे.
सिंह के लगभग एक घंटे के भाषण में आतंकवादी हमले का सिर्फ़ एक ही ज़िक्र था, जब उन्होंने कहा कि ‘यह अमानवीय और कायराना हमला 22 अप्रैल को हुआ था. इस हमले में 25 निर्दोष भारतीय और एक नेपाली नागरिक मारे गए. इन निर्दोष नागरिकों को उनका धर्म पूछकर मारा गया. यह हमले की अमानवीय और भयावह प्रकृति को दर्शाता है. यह हमला भारत की सहनशीलता की परीक्षा था.’
इसके बाद उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में विस्तार से बताया और केंद्र सरकार द्वारा पहले ही किए गए उन दावों को दोहराया कि सशस्त्र बलों को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी छूट दी गई थी, जिसमें 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में नौ ठिकानों को निशाना बनाया गया था.
हालांकि विपक्ष केंद्र सरकार से ट्रंप के उन दावों की ओर ध्यान आकर्षित करने की मांग कर रहा था, जिसमें अमेरिका द्वारा मध्यस्थता की बात कही जा रही है. इस पर राजनाथ सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति का नाम लिए बिना कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान रोकने का फैसला किसी दबाव में नहीं लिया गया.
उल्लेखनीय है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच दशकों बाद चार दिनों तक सैन्य टकराव चला था, लेकिन सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य ‘युद्ध छेड़ना’ या ‘सीमा पार करना या किसी क्षेत्र पर कब्ज़ा करना’ नहीं था.
सीमा पार करना या किसी क्षेत्र पर कब्ज़ा करना इस ऑपरेशन का उद्देश्य नहीं था: रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री ने लोकसभा में कहा, ‘मैं सदन को यह भी बताना चाहूंगा कि सीमा पार करना या किसी क्षेत्र पर कब्ज़ा करना इस ऑपरेशन का उद्देश्य नहीं था. ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य उन आतंकी नर्सरियों को खत्म करना था जिन्हें पाकिस्तान वर्षों से पाल रहा था. ऑपरेशन सिंदूर उन निर्दोष परिवारों को न्याय दिलाने के लिए शुरू किया गया था, जिन्होंने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हमलों में अपने प्रियजनों को खोया था. हमारी सेना ने केवल उन लोगों को निशाना बनाया जो इन आतंकवादियों का समर्थन करते हुए, भारत पर हमले की लगातार कोशिश कर रहे थे.’
उन्होंने आगे कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर का समग्र राजनीतिक-सैन्य उद्देश्य पाकिस्तान को दंडित करना था, जो आतंकवाद के रूप में छद्म युद्ध छेड़ रहा था. इसी कारण सशस्त्र बलों को अपने लक्ष्य चुनने और कड़ी प्रतिक्रिया देने की पूरी आज़ादी दी गई थी. इस ऑपरेशन का उद्देश्य युद्ध छेड़ना नहीं था, बल्कि बल प्रयोग के ज़रिए विरोधी को झुकने पर मजबूर करना था.’
हालांकि, इस संघर्ष में भारत द्वारा खोए गए रफाल विमानों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है, सिवाय इसके कि सैन्य नेतृत्व ने कहा कि ‘नुकसान लड़ाई का एक हिस्सा है’.
सिंह ने तर्क दिया कि विपक्ष यह तो पूछ रहा है कि कितने भारतीय विमान नष्ट हुए, लेकिन उन्होंने यह नहीं पूछा कि कितने पाकिस्तानी विमान गिराए गए.
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘मैं विपक्ष से कहना चाहता हूं कि अगर आपको कोई सवाल पूछना ही है, तो यह सवाल पूछिए कि क्या ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा? इसका जवाब है, हां. अगर आपको कोई सवाल पूछना है, तो यह पूछिए कि क्या हमारी बहनों-बेटियों का सिंदूर पोंछने वाले आतंकवादियों से हमारी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में निपटा है, उनके आकाओं का खात्मा किया है? इसका जवाब है, हां. अगर आपको कोई सवाल पूछना है, तो यह पूछिए कि क्या इस ऑपरेशन में हमारे किसी बहादुर सैनिक को कोई नुकसान पहुंचा? जवाब है, नहीं, हमारे किसी भी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा.’
सिंह ने आगे कहा कि ध्यान ‘अपेक्षाकृत छोटे मुद्दों’ पर नहीं होना चाहिए और केवल परिणाम ही मायने रखते हैं.
रक्षा मंत्री के अनुसार, ‘जब लक्ष्य बड़े हों, तो हमारा ध्यान अपेक्षाकृत छोटे मुद्दों पर नहीं जाना चाहिए. क्योंकि लगातार छोटे मुद्दों पर ध्यान देने से देश की सुरक्षा और सैनिकों के सम्मान व मनोबल जैसे बड़े मुद्दों से ध्यान भटक सकता है, जैसा कि विपक्ष के हमारे कुछ साथियों के साथ हो रहा है. किसी भी परीक्षा में परिणाम मायने रखता है. अगर कोई बच्चा परीक्षा में अच्छे अंक लाता है, तो हमारे लिए वे अंक मायने रखते हैं. हमें इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि परीक्षा के दौरान उसकी पेंसिल टूट गई या उसका पेन खो गया. अंततः, परिणाम मायने रखता है, और इसी का परिणाम है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सशस्त्र बलों ने अपने निर्धारित उद्देश्यों को पूरी तरह से हासिल किया.’
विपक्ष ने सुरक्षा में चूक और ट्रंप के दावे पर सरकार को घेरा
रिपोर्ट के मुताबिक आधी रात के बाद तक चली चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार सुरक्षा में चूक और भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित संघर्ष विराम पर सवाल उठाए.
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्रंप का नाम लिए बिना कहा कि शत्रुता ‘किसी दबाव में’ नहीं रुकी, जबकि केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अप्रैल और जून के बीच ट्रंप और मोदी के बीच किसी भी बातचीत से इनकार किया.
उल्लेखनीय है कि संसद में यह खंडन तब हुआ, जब ट्रंप ने उसी दिन स्कॉटलैंड की यात्रा के दौरान फिर से यही दावा दोहराया.
‘हमले के 100 दिन बाद भी पहलगाम के हमलावर पकड़े नहीं गए’
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने विपक्ष की ओर से बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि पहलगाम हमले के 100 दिन बाद भी हमलावर पकड़े नहीं गए हैं और उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इसकी ज़िम्मेदारी लेने की मांग की.
उन्होंने कहा, ‘देश जानना चाहता है कि पहलगाम हमले को 100 दिन हो गए हैं, लेकिन यह सरकार इन पांचों आतंकवादियों को पकड़ नहीं पाई है. उन्हें ज़रूर पनाह दी गई होगी, भागने में मदद की गई होगी, लेकिन 100 दिन बाद भी सरकार के पास कोई जवाब नहीं है. आज आपके पास ड्रोन, पेगासस, सैटेलाइट, सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ हैं और गृह मंत्री ने कुछ दिन पहले ही सुरक्षा का जायज़ा लेने के लिए दौरा किया था, फिर भी आप उन्हें पकड़ नहीं पा रहे हैं.’
गोगोई ने कहा कि शाह दावा करते हैं कि आतंकवाद की रीढ़ टूट गई है, फिर भी उरी (2016), पुलवामा (2019) और पहलगाम (2025) जैसे हमले होते रहते हैं.
उन्होंने कहा, ‘आखिरकार, ज़िम्मेदारी कौन लेगा? जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल. नहीं, गृह मंत्री को ज़िम्मेदारी लेनी होगी. आप उपराज्यपाल के पीछे नहीं छिप सकते.’
गोगोई ने यह भी कहा कि जब हमला हुआ, तब मोदी सऊदी अरब में थे. हमले के बाद जब वे लौटे, तो पहलगाम जाने के बजाय चुनावी राज्य बिहार चले गए.
राजनाथ सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान के सिंगापुर में दिए बयान का हवाला दिया.
गोगोई ने कहा, ‘ये जरूरी नहीं की जेट गिरे. पर क्यों गिरे? क्या गलतियां हुईं? वो महत्वपूर्ण है. संख्या महत्वपूर्ण नहीं. 35 ही रफाल हैं देश में. अगर उनमें से कुछ गिरे, तो मुझे तो लगता है कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ है.’
मिलिट्री टारगेट पर आक्रमण की पाबंदी क्यों लगाई गई: गौरव गोगोई
गोगोई ने पाकिस्तान को चीन से मिल रही सैन्य और कूटनीतिक मदद पर चिंता जताते हुए कहा, ‘पाकिस्तान को चीन का कितना समर्थन मिल रहा है? आज हम आदरणीय राजनाथ सिंह जी से और प्रधानमंत्री मोदी जी से जानना चाहते हैं. डिफेंस अताशे ने ताज्जुब की बात कह दी. भारत के डिफेंस अताशे ग्रुप कैप्टन शिव कुमार ने बताया कि भारत ने लड़ाकू जहाज इसलिए खोए क्योंकि कुछ मिलिट्री टारगेट पर आक्रमण करने पर पाबंदी थी.’
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार से सवाल किया कि ये पाबंदी क्यों लगाई गई. उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में पहले 21 टारगेट तय किए गए थे, फिर इन्हें घटाकर 9 टारगेट क्यों किया गया?
गोगोई ने कहा, ‘आपने कहा कि 9 टारगेट पर हमने आक्रमण किया, लेकिन हमें यह भी सूत्रों से जानकारी और मीडिया में आया है और लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने खुद कहा कि पहले 21 टारगेट चुने गए थे. 21 से फिर 9 क्यों हुए?.. पिछले बीस वर्ष में सबसे घातक आक्रमण हमारी महिलाओं पर हुआ, हमारे बच्चों पर हुआ, भारत की आत्मा पर हुआ.’
पीएम मोदी ने किसके सामने सरेंडर किया?
गोगोई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ऐसा माहौल बन चुका था कि देश कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार था. उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष पीएम नरेंद्र मोदी के साथ था, लेकिन 10 मई को सीजफायर का एलान कर दिया गया. उन्होंने सवाल किया कि ऐसी क्या मजबूरी थी, पीएम मोदी ने किसके सामने सरेंडर किया?
गोगोई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को लेकर सवाल किए और जोर देकर कहा कि हम सरकार के दुश्मन नहीं, हम अपने देश के पक्ष में बोल रहे हैं, जवानों के पक्ष में बोल रहे हैं. सरकार जितनी बार आप झूठ और भ्रम फैलाएगी, हम उतनी बार आपसे पूछते जाएंगे कि आपने क्या किया?
उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति 26 बार आज कह चुके हैं कि व्यापार को लेकर उन्होंने भारत और पाकिस्तान को सतर्क किया. दोनों को मजबूर किया कि वे इस जंग को छोड़ें. 26 बार राष्ट्रपति ट्रंप खुद कहते हैं कि 5-6 जेट गिरे. एक जेट करोड़ों-अरब रुपये का है. इसलिए हम जानना चाहते हैं, आज हमें स्पष्ट रूप से आदरणीय राजनाथ सिंह जी बताएं. देश पर विश्वास करें, देश में वो साहस है सच्चाई सुनने की, आज आप बताएं कितने लड़ाकू जहाज गिरे? क्योंकि यह सूचना, यह सच्चाई सिर्फ देश के नागरिकों के लिए नहीं, यह सूचना, यह सच्चाई हमें देश के जवानों को भी देनी है.’
गौरव गोगोई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार कह रही है, हमारा मकसद युद्ध का नहीं था. हम पूछ रहे हैं- क्यों नहीं था? मकसद युद्ध होना चाहिए था. सरकार कह रही है- हमारा मकसद पीओके लेना नहीं था. हम पूछ रहे हैं- क्यों नहीं था? होना चाहिए था. पीओके अगर आज नहीं लेंगे, तो कब लेंगे?
ऑपरेशन सिंदूर तब तक पूरा नहीं होगा, जब तक सभी आतंकवादी पकड़े नहीं जाते: सुप्रिया सुले
इस चर्चा में भाग लेते हुए एनसीपी (श. पा) सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि जब तक पहलगाम के हमलावर पकड़े नहीं जाते, तब तक कोई जश्न नहीं मनाया जा सकता.
उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर तब तक पूरा नहीं होगा जब तक आप उन आतंकवादियों को नहीं पकड़ लेते. हम एक-दूसरे की पीठ थपथपा सकते हैं कि सब कुछ ठीक चल रहा है. लेकिन सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. जब तक वे आतंकवादी पकड़े नहीं जाते, हम जश्न नहीं मना सकते.’
वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने भी सरकार पर भारत की सीमाओं की सुरक्षा न करने का आरोप लगाया और संघर्षविराम के ज़रिए संघर्ष रोकने के फैसले पर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा, ‘देश 17 दिन बाद ऑपरेशन सिंदूर नहीं, बल्कि ऑपरेशन तंदूर चाहता था.’
ट्रंप के मध्यस्थता के दावों का ज़िक्र करते हुए राजभर ने कहा, ‘हमें गर्व था कि हमारे प्रधानमंत्री विश्वगुरु हैं. लेकिन हमें पता चला कि विश्वगुरु तो अमेरिका में बैठे हैं.’
ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा क्यों की?
सिर्फ़ राजभर ही नहीं, विपक्षी सदस्यों ने भी इस चर्चा में सरकार और मोदी पर ट्रंप का नाम न लेने का आरोप लगाया, जो लगातार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम में मध्यस्थता की थी.
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, प्रधानमंत्री जी आपने एक बार भी अपने ‘एक्स’ हैंडल पर क्यों नहीं लिखा कि ‘नहीं, आप (ट्रंप) गलत हैं. राष्ट्रपति (अमेरिकी) महोदय आपने जो कहा है, वो ग़लत है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘आप ऐसा करने की हिम्मत नहीं दिखा पाए. जैसे ही आप अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने खड़े होते हैं, आपकी ऊंचाई 5 फ़ीट और सीना 56 इंच से 36 इंच का हो जाता है. आप अमेरिकी राष्ट्रपति से इतना घबराते क्यों हैं? इतिहास आपको कभी माफ़ नहीं करेगा.’
‘आप अमेरिकी राष्ट्रपति से इतना डरते क्यों हैं?’
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की विदेश नीति की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया और ह्वाइट हाउस में ट्रंप द्वारा पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर की मेज़बानी का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, ‘क्या आपकी विदेश नीति सफल रही है? वे संविधान में धर्मनिरपेक्षता के विरोधी हैं, लेकिन हमारी प्रस्तावना में ‘संप्रभु’ शब्द का उल्लेख है, जिसका अर्थ है कि हम अपनी कार्रवाई खुद तय करेंगे. क्या ह्वाइट हाउस में बैठा कोई श्वेत व्यक्ति भारत की ओर से युद्धविराम की घोषणा करेगा? क्या यही आपका राष्ट्रवाद है? अगर अंकल सैम यह घोषणा करते हैं, तो इससे हमारी सेना के मनोबल पर क्या असर पड़ेगा, जो सोचेंगे कि मेरे प्रधानमंत्री ने नहीं, बल्कि एक श्वेत व्यक्ति ने युद्धविराम की घोषणा की है.’
आगामी एशिया कप में पाकिस्तान के साथ भारतीय क्रिकेट टीम के मैच की ओर इशारा करते हुए ओवैसी ने कहा कि भारत सरकार ने व्यापार बंद करने और सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया है, फिर भी क्रिकेट मैच खेला जाएगा.
खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते, फिर क्रिकेट मैच कैसे?:असदुद्दीन ओवैसी
उन्होंने कहा, ‘आपने कहा है कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते, बातचीत और आतंक साथ-साथ नहीं चल सकते. बसैरन में जिन लोगों की जान गई, क्या आपकी अंतरात्मा आपको इजाज़त देगी कि आपने व्यापार बंद कर दिया है, अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है, उनके जहाज़ रोक दिए हैं, तो आप पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच कैसे खेलेंगे? क्या आप उन 25 परिवारों को बुलाकर कह पाएंगे कि हमने ऑपरेशन सिंदूर का बदला ले लिया है और अब आप क्रिकेट मैच देखें.’
इस मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि भाजपा नेता लगातार कह रहे हैं कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस लाया जाएगा, लेकिन इस संघर्ष में वह ऐसा करने में विफल रहे.
उन्होंने कहा, ‘यही समय था. आप इसे वापस क्यों नहीं लाए?’
सरकार के इस रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए कि पाकिस्तानी डीजीएमओ ने ही अपने भारतीय समकक्ष से फोन पर बातचीत करके युद्धविराम की मांग की थी, और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपने शुरुआती बयान में यही बात कही थी, सावंत ने पूछा कि बिना शर्त युद्धविराम क्यों स्वीकार किया गया.
उन्होंने कहा, ‘अगर पाकिस्तान हमसे युद्धविराम की भीख मांग रहा था, तो इसे बिना शर्त क्यों स्वीकार किया गया? अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार यही कहते रहते हैं कि उन्होंने संघर्ष रोक दिया है. आपने बिना शर्त युद्धविराम क्यों स्वीकार किया?’
सावंत ने यह भी कहा कि ‘एक भी देश’ भारत के साथ खड़ा नहीं हुआ, जबकि मोदी सरकार ने ईरान के खिलाफ, जो भारत को तेल आपूर्ति करता है, खुलेआम इज़रायल का साथ दिया.
कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे ने रोम के कोलोसियम का ज़िक्र करते हुए कहा कि जिस तरह इसे जनता को खेल और मनोरंजन में व्यस्त रखने और उनका ध्यान भटकाने के लिए बनाया गया था, उसी तरह सरकार भी ऐसा ही करती दिख रही है.
उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर मीडिया में सरकार का एक ‘तमाशा’ था. कोई भी हमें यह नहीं बता रहा कि इस ऑपरेशन में क्या हासिल हुआ. कितने आतंकवादी पकड़े गए? हमने कितने लड़ाकू विमान खो दिए? कौन ज़िम्मेदार है और किसकी गलती है? इसका जवाब देना सरकार की ज़िम्मेदारी है. लेकिन यह सरकार किसी भी सवाल का जवाब देने से भागती है.’
मंत्रियों ने ट्रंप के मध्यस्थता के दावे का खंडन किया, पहलगाम जांच पर चुप्पी साधे रखी
रक्षा मंत्री सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर दोनों ने सोमवार को संसद में अपनी पहली टिप्पणी की, लेकिन ट्रंप के मध्यस्थता के दावों को स्वीकार नहीं किया.
इस मामले पर विदेश मंत्री जयशंकर ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि 22 अप्रैल से 17 जून के बीच मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी.
जयशंकर ने यह भी कहा कि ऑपरेशन के दौरान भारत को कई देशों से फ़ोन आए, जिनमें यह स्पष्ट कर दिया गया था कि ‘कोई मध्यस्थता नहीं होगी’.
मालूम हो कि ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने दोनों देशों को परमाणु युद्ध के कगार से बचाने के लिए व्यापार रोकने की धमकी दी थी. लेकिन जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत में किसी भी बिंदु पर ‘व्यापार से कोई संबंध’ नहीं था.
विदेश मंत्री के बयान का केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समर्थन किया और विपक्ष पर विदेश मंत्री की बजाय एक विदेशी देश के नेता पर विश्वास करने का आरोप लगाया.
गौरतलब है कि जयशंकर ने संसद में इस दावे का खंडन ऐसे समय पर किया, जब ट्रंप ने स्कॉटलैंड के टर्नबेरी में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ खड़े होकर भारत-पाकिस्तान के बीच अपने मध्यस्थता का दावा फिर दोहराया.
ट्रंप ने कहा कि अगर वह नहीं होते, तो ‘भारत पाकिस्तान से लड़ रहा होता.’
