ओडिशा: बॉक्साइट खनन पर तनाव के बीच रायगढ़ में आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं के प्रवेश पर रोक

बॉक्साइट खनन के ख़िलाफ़ बढ़ते विरोध के बीच ओडिशा के रायगढ़ ज़िला प्रशासन ने मेधा पाटकर और छह अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के सिजिमाली पहाड़ी क्षेत्र की पांच पंचायतों में शुक्रवार शाम से सोमवार तक प्रवेश पर रोक लगा दी है. प्रशासन ने सामाजिक संगठनों पर खनन कार्यों के ख़िलाफ़ आदिवासी समुदायों को कथित रूप से भड़काने का आरोप लगाया है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: द वायर)

नई दिल्ली: बॉक्साइट खनन के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच रायगढ़ जिला प्रशासन ने प्रमुख आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता मेधा पाटकर और छह अन्य लोगों के सिजिमाली पहाड़ी क्षेत्र की पांच पंचायतों में शुक्रवार शाम से सोमवार (11 अगस्त) तक प्रवेश पर रोक लगा दी है.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रतिबंधित क्षेत्रों में सुंगर, अदाजोर, तालाझिरी, सिंदूर घाटी और काशीपुर ग्राम पंचायतें शामिल हैं.

8 अगस्त को जारी एक आदेश में, जिला कलेक्टर आशुतोष कुलकर्णी ने कहा कि शनिवार (9 अगस्त) को विश्व आदिवासी दिवस से पहले कार्यकर्ताओं की उपस्थिति क्षेत्र में शांति के लिए खतरा पैदा कर सकती है. पाटकर के साथ, नरेंद्र मोहंती, लिंगराज आज़ाद, राजा रंजन, शरणया कुमारी, राज किशोर सुनामी और 2017 गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार विजेता प्रफुल्ल सामंतारा के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है.

प्रशासन ने मां माटी माली सुरक्षा मंच और नियमगिरि सुरक्षा समिति जैसे संगठनों पर खनन कार्यों के खिलाफ आदिवासी समुदायों को कथित रूप से भड़काने का आरोप लगाया है.

आदेश में आदिवासी खनन विरोधी कार्यकर्ता नारंगीदेई माझी की हालिया गिरफ्तारी का भी ज़िक्र है, जिनके बारे में दावा किया गया है कि उनका आपराधिक इतिहास है. नारंगीदेई ने जुलाई में भुवनेश्वर का दौरा किया था और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें रायगढ़ और कालाहांडी में प्रदर्शनकारी आदिवासियों पर कथित पुलिसिया ज्यादतियों का ज़िक्र था.

इसमें कहा गया है कि यह आदेश रायगढ़ के उप-कलेक्टर को सागाबारी और सुंगेर के स्थानीय लोगों से प्राप्त दो आवेदनों के बाद दिया गया है, जिनमें पिछले 10 दिनों में कुछ लोगों के आंदोलन और लामबंदी के बारे में बताया गया है, जिसमें खुफिया सूचनाओं के अलावा आदिवासियों को सिजीमाली में खनन परियोजना का विरोध करने या सामाजिक बहिष्कार का सामना करने की धमकी दी गई है.

आदेशों में कहा गया है, ‘कार्यकर्ताओं को आमंत्रित करने वाले संगठनों ने न तो ज़िला प्रशासन को सूचित किया है और न ही वक्ताओं की सूची सौंपी है. हालांकि ज़िला प्रशासन ने पाटकर सहित कुछ लोगों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फ़ोन कॉल का जवाब नहीं दिया, जबकि कुछ ने कहा कि वे आ सकते हैं.’

यह कहते हुए कि पूरे सिजिमाली क्षेत्र में ‘वामपंथी उग्रवाद का खतरा’ है, रायगडा कलेक्टर आशुतोष कुलकर्णी ने एसपी से शांति भंग होने से रोकने के लिए आवश्यक निवारक और बलपूर्वक कार्रवाई करने को कहा.

अधिकारियों को डर है कि अगर खनन विरोधी नेताओं को अंदर जाने दिया गया तो इलाके में लामबंदी बढ़ सकती है. इससे पहले मेधा पाटकर को 5 जून को रायगढ़ के अंदरूनी इलाकों में जाने से रोक दिया गया था और भुवनेश्वर जाने से पहले उन्हें ब्रह्मपुर ले जाया गया था.

ज्ञात हो कि ओडिशा के रायगढ़ा जिले की सिजिमाली पहाड़ियों में वेदांता को बॉक्साइट खदानें और रायगड़ा और कालाहांडी जिलों में फैली कुटरुमाली पहाड़ियों में और कोरापुट में बल्लाडा बॉक्साइट खदानें अडानी समूह को दी गई है. इन खदानों का यहां के आदिवासी लंबे समय से विरोध कर रहे हैं.