नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कर्नाटक में एक दुर्लभ मृदा तत्व (आरईई – rare earth element) ब्लॉक सहित पांच महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी के पांचवें दौर को खराब प्रतिक्रिया मिलने के बाद रद्द कर दिया है.
इन पांच ब्लॉकों में से गुजरात और छत्तीसगढ़ में दो ग्लौकोनाइट खदानों और कर्नाटक में एक निकेल और पीजीई (प्लेटिनम ग्रुप एलिमेंट) ब्लॉक सहित तीन ब्लॉकों के लिए कोई बोली नहीं लगाई गई.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, खान मंत्रालय ने एक नोटिस में कहा कि खराब प्रतिक्रिया के कारण उनकी नीलामी रद्द कर दी गई.
इसके अलावा, महाराष्ट्र में एक टंगस्टन (tungsten) खदान और कर्नाटक में एक आरईई ब्लॉक सहित दो अन्य ब्लॉकों की बिक्री भी न्यूनतम तीन तकनीकी रूप से योग्य बोलीदाताओं की कमी के कारण रद्द कर दी गई.
महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी का पांचवां चरण जनवरी में शुरू किया गया था और नीलामी में रखे गए 15 ब्लॉकों में से 10 की नीलामी हो चुकी है.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, नीलाम किए गए 10 ब्लॉकों में छत्तीसगढ़, कर्नाटक, ओडिशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के ग्रेफाइट, फॉस्फोराइट, फॉस्फेट, आरईई, वैनेडियम और पोटाश तथा हैलाइट जैसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज शामिल हैं.
नीलामी के पांचवें दौर में खनिज ब्लॉक हासिल करने वाली कुछ कंपनियों में कोल इंडिया, ऑयल इंडिया, एनएलसी इंडिया और वेदांता समूह की हिंदुस्तान जिंक शामिल हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक बिक्री के लिए रखे गए 55 ब्लॉकों में से पांच दौर में 34 ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है.
ये नीलामियां भारत को महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों पर आत्मनिर्भर बनाने के केंद्र सरकार के प्रयासों का हिस्सा हैं. तांबा, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और आरईई जैसे महत्वपूर्ण खनिज तेज़ी से विकसित हो रही स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल हैं.
हाल के महीनों में रेयर अर्थ मैग्नेट (दुर्लभ मृदा चुम्बकों) की खरीद के लिए चीन के वाणिज्य मंत्रालय से लाइसेंस का इंतज़ार कर रही कंपनियों की संख्या बढ़ रही है.
4 अप्रैल को चीन ने आदेश जारी कर मध्यम और भारी रेयर अर्थ मैग्नेट का निर्यात करने वाले निर्यातकों को क्रेता से अंतिम उपयोगकर्ता प्रमाणपत्र (end-user certificate) प्राप्त करने के बाद वाणिज्य विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया था.
वित्त वर्ष 2025 में भारत ने लगभग 20 करोड़ डॉलर मूल्य के रेयर अर्थ मैग्नेट का आयात किया. इनमें से अधिकांश आयात ऑटोमोटिव और औद्योगिक एप्लिकेशन में उपयोग किए गए.
इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में मोटर की कीमत 8,000 रुपये से 15,000 रुपये के बीच होती है, जिसमें रेयर अर्थ मैग्नेट की कीमत मोटर की लागत का लगभग 30 प्रतिशत होती है.
