कुकी-ज़ो विद्रोही समूहों ने पीआईबी पर समझौते की जानकारी तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाया

मणिपुर सरकार और गृह मंत्रालय के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स (एसओओ) समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले कुकी-ज़ो विद्रोही समूहों ने कहा है कि सरकार की आधिकारिक सूचना शाखा, पीआईबी ने उनके द्वारा हस्ताक्षरित आधिकारिक समझौते की जानकारी को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है. इससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: एक्स/@manipur_police)

नई दिल्ली: मणिपुर सरकार और गृह मंत्रालय (एमएचए) के साथ 2 सितंबर को सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स (एसओओ) समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले कुकी-ज़ो विद्रोही समूहों ने कहा है कि सरकार की आधिकारिक सूचना शाखा, प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने उनके द्वारा हस्ताक्षरित आधिकारिक समझौते की जानकारी को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है.

द हिंदू के अनुसार, समूहों ने कहा है कि इससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है. कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) ने रविवार (7 सितंबर) को एक बयान जारी कर कहा कि पीआईबी की गलत व्याख्या ने कुकी ज़ो की भावनाओं को गंभीर रूप से आहत किया है.

अखबार के अनुसार, उन्होंने कहा कि इस तोड़-मरोड़ से 13 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित चुड़ाचांदपुर यात्रा को लेकर माहौल पर नकारात्मक असर पड़ा है.

बयान में कहा, ‘हाल ही में संपन्न गृह मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच एक वर्ष के लिए विस्तार समझौता, जो 4 सितंबर, 2025 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित तिथि से प्रभावी हुआ है, में स्पष्ट रूप से कहा गया है, ‘राज्य सरकार के बीच समझौते के बाद केएनओ और यूपीएफ के साथ त्रिपक्षीय वार्ता होगी ताकि समयबद्ध तरीके से भारत के संविधान के तहत बातचीत के जरिए राजनीतिक समाधान का मार्ग प्रशस्त हो सके.’ पीआईबी ने हस्ताक्षरित आधिकारिक समझौते को इस प्रकार पेश किया है: ‘अन्य प्रावधानों के अलावा संशोधित आधारभूत नियमों में दोहराया गया है: मणिपुर राज्य में शांति और स्थिरता लाने के लिए बातचीत के जरिए समाधान की आवश्यकता.’

समूहों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पीआईबी द्वारा किया गया यह तोड़-मरोड़ गृह मंत्रालय और एसओओ समूह के बीच हुए एसओओ समझौते में कहीं भी नहीं है.

बयान में यह भी कहा गया है कि 3 मई, 2023 से पहले, जब राज्य में हिंसा नहीं भड़की थी और ज़मीनी स्तर पर उसका प्रभाव बन रही थी, तब एसओओ समूह की मांग केवल मणिपुर राज्य के भीतर प्रादेशिक परिषद के माध्यम से स्थानीय स्वायत्तता की थी. लेकिन हिंसा के बाद उन्होंने कहा है कि उनकी मांग बदलकर विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेश की हो गई है.

उन्होंने कहा कि नए एसओओ समझौते के बाद एसओओ समूह और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच भविष्य की बातचीत मणिपुर के कुकी-ज़ो क्षेत्रों के लिए विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) की मांग पर केंद्रित होगी.

वहीं, मेईतेई संगठनों ने मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान कुकी-ज़ो समूहों पर संघर्ष विराम के बुनियादी नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए ऑपरेशन निलंबन समझौते को समाप्त करने की मांग की थी.

लंबे समय से रही है अलग प्रशासन की मांग

कुकी-ज़ो विद्रोही समूहों के अलावा मणिपुर में हिंसा के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित कुकी विधायकों और आदिवासी संगठन अलग प्रशासन की मांग कर रहे हैं.

मणिपुर के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के 9 फरवरी को इस्तीफा देने के बाद भाजपा विधायक पाओलीनलाल हाओकिप ने द वायर से बातचीत में संदेह व्यक्त करते हुए कहा था कि सार्थक परिवर्तन तभी होगा जब केंद्र सरकार पहाड़ी क्षेत्रों में कुकी समुदाय के लिए एक अलग प्रशासन बनाएगी.

मालूम हो कि अलग प्रशासन की यह मांग 10 दिसंबर, 2024 को स्पष्ट रूप से सामने आई थी, जब मणिपुर के कुकी-जो समुदाय के सात विधायकों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्र सरकार के खिलाफ जान-माल की हानि को रोकने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाने के लिए मौन विरोध किया था और अपने समुदाय के लिए एक अलग प्रशासन की मांग दोहराई थी. विधायकों ने इस दौरान अपने मुंह पर काले मास्क पहने थे और मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया था.

केंद्र टालती रही है

उल्लेखनीय है कि इस साल जनवरी में गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने दिल्ली में कुकी प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की थी, जिसमें कुकी- जो काउंसिल, जो विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों वाला एक नया निकाय था, को साफ संदेश दिया था कि किसी भी राजनीतिक बातचीत और समाधान की शुरुआत से पहले राज्य में हिंसा का पूरी तरह से अंत होना ज़रूरी है. इसके बाद ही अलग प्रशासन की मांग पर विचार किया जाएगा.

इस बार भी केंद्र सरकार ने अब तक कुकी-ज़ो बहुल ज़िलों के अलग प्रशासन सहित राजनीतिक मांगों पर कोई ठोस प्रतिबद्धता जताने से परहेज किया है और बातचीत को संघर्ष विराम के तकनीकी विस्तार तक ही सीमित रखा है.