नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आखिरकार शनिवार (13 सितंबर) को हिंसा प्रभावित मणिपुर का दौरा किया. मई 2023 में राज्य में जातीय संघर्ष भड़कने के दो साल से भी ज़्यादा समय बाद उन्होंने राज्य का दौरा किया.
उनके कार्यक्रम में चुराचांदपुर और इंफाल दोनों शामिल थे, जहां उन्होंने कुकी-ज़ो और मेईतेई समुदायों से ‘हिंसा समाप्त’ करने और ‘विकास’ की ओर ध्यान देने की अपील की.
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने कुकी-ज़ो बहुल चुराचांदपुर में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी और दावा किया कि ये योजनाएं ‘मणिपुर और पहाड़ों में रहने वाले लोगों के जीवन को बेहतर बनाएंगी.’
मोदी ने जिरीबाम-इंफाल रेलवे लाइन में 22,000 करोड़ रुपये के निवेश पर भी ज़ोर दिया और कहा कि 2014 के बाद से -जब से वे प्रधानमंत्री बने हैं – उनका ध्यान मणिपुर की कनेक्टिविटी पर काम करने पर रहा है.
हालांकि, द वायर को पता चला है कि मणिपुर का एकमात्र रेलवे स्टेशन खोंगसांग, संघर्ष शुरू होने के बाद से यात्रियों के लिए बंद पड़ा है. दो साल से ज़्यादा समय से कोई भी नागरिक वहां ट्रेन में न तो चढ़ पाया है और न ही उतर पाया है.
इसी तरह पीएम मोदी ने इंफाल से आने-जाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं की बात की. गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पहली बार घोषित इस सेवा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कुकी-ज़ो समुदाय राज्य की राजधानी में स्थित राज्य के एकमात्र चालू हवाई अड्डे तक पहुंच सके.
हालांकि, इसके बाद भी कुकी-ज़ो लोगों ने नागालैंड के दीमापुर या मिज़ोरम के आइज़ोल के हवाई अड्डों का उपयोग जारी रखा, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वे इंफाल में प्रवेश करेंगे तो उन पर हमला हो सकता है.
ज्ञात हो कि हिंसा शुरू होने के बाद से मुख्यतः मेइतेई इंफाल घाटी और आसपास की पहाड़ियां, जहां कुकी-ज़ो लोग बहुसंख्यक हैं, दोनों समुदायों के बीच जातीय हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा गश्त किए जाने वाले ‘बफर ज़ोन’ द्वारा भौतिक रूप से अलग कर दिए गए हैं.
पक्के मकान बनाने की योजनाओं का भी ज़िक्र
प्रधानमंत्री ने पक्के मकान बनाने की योजनाओं का भी ज़िक्र किया और दावा किया कि मणिपुर में लगभग 60,000 परिवारों को इसका लाभ मिला है. लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही कहानी बयां करती है.
मणिपुर के जातीय संघर्ष के कारण विस्थापित हुए लोगों की संख्या 60,000 से भी ज़्यादा है, जिनके घर तबाह हो गए और पूरे के पूरे गांव जला दिए गए.
पीएम मोदी ने यह भी तर्क दिया कि 2014 से पहले मणिपुर में ‘गांवों में जाना मुश्किल’ था, लेकिन उनके नेतृत्व में सड़कें राज्य के दूर-दराज़ के इलाकों को भी जोड़ चुकी हैं. हालांकि, जातीय संघर्ष के पीड़ित अपने गांव लौटने से हिचकिचाते हैं क्योंकि हिंसा आज भी जारी है.
लोगों की मांगें अनसुनी
पिछले ढाई सालों से राहत शिविरों में रह रहे लोग बार-बार मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री सीधे उनसे मिलें. कई लोगों को उम्मीद थी कि इस तरह के दौरे से उन्हें उनका दर्द सीधे महसूस करने और उनके पुनर्वास में तेज़ी लाने का मौका मिलेगा.
हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने राहत शिविरों का दौरा करने के बजाय वहां रह रहे लोगों को मिलने के लिए बुलाया, जिससे कई लोग निराश हुए.
मालूम हो कि हिंसा भड़कने के बाद से ही लोगों की व्यापक मांगें बिना बदलाव की जस की तस बनी हुई हैं. कुकी-ज़ो लोग मणिपुर से पूरी तरह अलग होने और एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि मेईतेई समुदाय राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर लागू करने पर अड़ा हुआ है ताकि सरकार वहां रह रहे बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों की पहचान कर सके.
कुकी-ज़ो विधायकों द्वारा प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान उन्हें सौंपे गए एक संयुक्त ज्ञापन में अलगाव की इस मांग को दोहराया गया. आदिवासी समुदाय के ग्यारह विधायकों ने शीघ्र राजनीतिक समाधान का आग्रह किया.
विधायकों ने कहा कि उनके लोगों को ‘मणिपुर के घाटी क्षेत्रों से पूरी तरह से अलग कर दिया गया है, उन्हें शर्मिंदा किया गया है, उन पर हमला और महिलाओं से बलात्कार किया गया है, उन्हें तबाह कर दिया गया है.
विधायकों ने राज्य पर ‘अभूतपूर्व जातीय उत्पीड़न’ में मिलीभगत का आरोप लगाया.
यह घोषणा करते हुए कि दोनों समुदाय ‘केवल अच्छे पड़ोसियों के रूप में शांति से रह सकते हैं, लेकिन एक ही छत के नीचे नहीं’, ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले विधायकों ने प्रधानमंत्री से बातचीत में तेज़ी लाने और विधानसभा के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश देने की अपील की.
ज्ञापन में निष्कर्ष निकाला गया, ‘हमारा मानना है कि इससे ही स्थायी शांति आएगी और हमारे लोगों में सुरक्षा, न्याय और अपनेपन की भावना आएगी.’
गौरतलब है कि इस ज्ञापन पर हस्ताक्षरकर्ताओं में थनलॉन के भाजपा विधायक वुंगजागिन वाल्टे, तिपाईमुख के भाजपा विधायक नगुरसंगलुर सनाटे, कुकी पीपुल्स अलायंस (केपीए) के सिंगनगाट विधायक चिनलुनथांग मनलुन, हेंगलेप के भाजपा विधायक लेटजमांग हाओकिप, सैकोट के भाजपा विधायक पाओलीनलाल हाओकिप, चुराचांदपुर के भाजपा विधायक लल्लियानमांग खौटे, तेंगनौपाल के भाजपा विधायक लेटपाओ हाओकिप, सैकुल केपीए विधायक किमनेओ हैंगशिंग, सैतू के निर्दलीय विधायक हाओखोलेट किपगेन और कांगपोकपी से भाजपा विधायक नेमचा किपगेन शामिल हैं.
(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
