नई दिल्ली: सीपीआई (माओवादी) के वरिष्ठ नेता और उनके पोलित ब्यूरो और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने मंगलवार (14 अक्टूबर) को महाराष्ट्र के गड़चिरोली ज़िले में 60 अन्य माओवादी साथियों सहित आत्मसमर्पण कर दिया है. सशस्त्र माओवादी संगठन के लिए इसे एक बड़ा झटका माना जा रहा है.
70 वर्षीय वेणुगोपाल के आत्मसमर्पण के साथ पार्टी की वैचारिक ताकत और संचार तंत्र को गहरा नुकसान हुआ है. वे छत्तीसगढ़ के जंगलों में सक्रिय माओवादियों और बाहरी दुनिया के बीच की कड़ी थे.
2010 में पार्टी के प्रवक्ता चेरकूरी राजकुमार (आज़ाद) के मारे जाने के बाद से वेणुगोपाल पार्टी प्रवक्ता बने और तब से वे ‘अभय’ के नाम से प्रेस बयान जारी करते आ रहे हैं.
इंडियन एक्सप्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से लिखा है, ‘सोनू का संपर्क बाहरी दुनिया से था. वे माओवादी समर्थक संगठनों से संवाद बनाए रखते थे. उनके आत्मसमर्पण से स्पष्ट है कि माओवादी संगठन को गहरा नुकसान पहुंचा है.’
किशनजी के भाई, तेलंगाना से ताल्लुक
तेलंगाना के पेद्दापल्ली ज़िले के रहने वाले वेणुगोपाल ने बी.कॉम की पढ़ाई की थी. वे साल 2011 में मारे गए माओवादी नेता मल्लोजुला कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी के छोटे भाई हैं. उनके पिता और दादा स्वतंत्रता सेनानी थे.
जानकारी के अनुसार, वेणुगोपाल और उनके साथी रैडिकल स्टूडेंट्स यूनियन और पीपुल्स वॉर ग्रुप से प्रभावित थे. पेद्दापल्ली के सरकारी डिग्री कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद 1980 के दशक में सोनू पीपुल्स वॉर ग्रुप में शामिल हो गए थे.
वेणुगोपाल वर्ष 2010 में सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता नियुक्त हुए थे. वे अभय, भूपति, विवेक और राजन जैसे कई अन्य नामों से जाने जाते हैं.
उनके भाई किशनजी की साल 2011 में पश्चिम बंगाल के लालगढ़ में मुठभेड़ के दौरान मौत के बाद वेणुगोपाल को वहां का नेतृत्व संभालने की ज़िम्मेदारी दी गई थी.
उल्लेखनीय है कि उनकी पत्नी विमला सिदाम उर्फ तारा ने पिछले साल के दिसंबर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने आत्मसमर्पण किया था. तारा भी लगभग 30 वर्षों तक पार्टी में सक्रिय रहीं और दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति की सदस्य भी बनीं.
पार्टी के भीतर ‘वैचारिक मतभेद’
वेणुगोपाल का आत्मसमर्पण उस समय हुआ है जब पार्टी के भीतर सशस्त्र संघर्ष जारी रखने को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए थे. उन्होंने हाल ही में पत्र लिखकर कहा था कि ‘पार्टी को बचाने के लिए अब सशस्त्र संघर्ष समाप्त करने का समय आ गया है.’
15 अगस्त को जारी बयान में वेणुगोपाल ने साफ तौर पर लिखा था कि ‘हम (माओवादी) हथियार छोड़ने का निर्णय लिए हैं.’
यह देश में चल रहे 60 बरस के नक्सल अभियान का पहला ऐसा पत्र था जिसमें माओवादियों द्वारा हथियार छोड़ने की बात कही गई थी.
हालांकि पार्टी की तेलंगाना राज्य कमेटी ने 19 सितंबर को बयान जारी कर वेणुगोपाल के बयान का खंडन करते हुए माओवादियों द्वारा हथियार छोड़ने के कयासों पर पूर्ण विराम लगा दिया था.
तेलंगाना राज्य कमेटी के प्रवक्ता जगन के नाम से जारी बयान में कहा गया था कि यह उनकी (वेणुगोपाल) निजी राय है और पार्टी का निर्णय नहीं है.
लगातार बढ़ता आत्मसमर्पण
इस वर्ष 5 अप्रैल को 86 माओवादी कार्यकर्ताओं (जिनमें 20 महिलाएं और कई एरिया कमेटी सदस्य शामिल थे) ने भद्राद्री-कोठागुडेम पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था.
वहीं पिछले हफ्ते, तीन वरिष्ठ माओवादी नेताओं ने तेलंगाना के नए पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी के सामने हथियार डाल दिए.
