जम्मू के कठुआ में ईसाई धर्म के प्रचारकों पर हमला, आठ पुलिसकर्मी निलंबित

कठुआ ज़िले में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में ईसाई धार्मिक प्रचारकों के एक समूह पर हमला किया गया. इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कथित तौर पर कर्तव्य निर्वहन न करने के आरोप में आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया. मामले में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है.

कठुआ में ईसाई प्रचारकों को ले जा रही एक वैन पर हमला करते कुछ लोग. (फोटो: सोशल मीडिया)

श्रीनगर: कठुआ ज़िले में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में धार्मिक प्रचारकों के एक समूह पर हमला किया गया, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शुक्रवार (24 अक्टूबर) को कथित तौर पर कर्तव्यहीनता के आरोप में आठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया.

यह कार्रवाई तब की गई जब एक सब-इंस्पेक्टर समेत आरोपी अधिकारियों को कठुआ के जुथाना इलाके में एक यात्री मिनी बस पर अज्ञात लोगों के एक समूह को लोहे की छड़ों और डंडों से हमला करते हुए देखा गया, जिनमें से कुछ नकाबपोश थे.

कठुआ पुलिस ने इस घटना के संबंध में शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है और कम से कम एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है.

सोशल मीडिया पर वायरल हुए हमले के वीडियो में कम से कम चार या पांच हमलावर उस बस, जिसमें दस से पंद्रह ईसाई धर्म प्रचारक सवार थे, के आगे के शीशे और साइड-व्यू मिरर को तोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं. कुछ हमलावर वाहन के अंदर यात्रियों से उलझते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि पुलिसकर्मियों का एक समूह हमले को रोकने के लिए ज़्यादा कुछ किए बिना  तमाशा देख रहा है.

वीडियो में केवल एक पुलिसकर्मी बस का दरवाज़ा खोलने वाले एक हमलावर को रोकने की असफल कोशिश करता दिखाई दे रहा है.

इस दौरान वाहन से महिलाओं सहित कई लोगों की दर्दनाक चीखें सुनाई दे रही हैं, जब हमलावर दरवाज़ा खोलने के बाद आगे की सीट पर बैठे एक यात्री पर झपट पड़ता है, उसे घूंसे और लात मारता है, जबकि पीछे से एक अन्य हमलावर ‘अन्य पुरुषों’ को देखने के लिए कहता है.

कठुआ की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मोहिता शर्मा ने कहा कि प्रचारकों के इस समूह को कुछ स्थानीय लोगों ने इलाके में आमंत्रित किया था.

खबरों के अनुसार, वहां यह अफ़वाह फैलने लगी थी कि मिशनरी इलाके के निवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके कारण यह हमला हुआ.

एसएसपी शर्मा ने कहा कि चार-पांच लोग इसमें शामिल थे और उनमें से एक, जिसकी पहचान रवींद्र सिंह ठेला के रूप में हुई है, को गिरफ्तार कर लिया गया है. खबरों के अनुसार, ठेला और उसके अन्य साथियों के खिलाफ जम्मू संभाग में कई केस दर्ज हैं.

एसएसपी ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 126 (2) (गलत तरीके से रोकने की सज़ा), 115 (2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 191 (2) (गैरकानूनी भीड़ द्वारा बल या हिंसा का प्रयोग), 324 (4) (शरारत), 351 (2) (आपराधिक धमकी) और 352 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान करना) तथा शस्त्र अधिनियम की धारा 4 और 25 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

एसएसपी शर्मा ने कहा, ‘अन्य अपराधियों की तलाश जारी है.’

पुलिस ने अभी तक अन्य अपराधियों की पहचान और उनके परिचय पत्र का खुलासा नहीं किया है. द वायर तुरंत इस बात की पुष्टि नहीं कर सका कि हमलावर किसी राजनीतिक दल से जुड़े थे या नहीं.

उल्लेखनीय है कि 2011 की जनगणना के अनुसार, ईसाई जम्मू-कश्मीर की कुल आबादी का मात्र 0.6% हिस्सा हैं और एक छोटा-सा अल्पसंख्यक समुदाय हैं. कुछ रिपोर्ट्स से संकेत मिलता है कि केंद्र शासित प्रदेश में ईसाइयों की आबादी अन्य धर्मों के अनुयायियों की तुलना में काफ़ी बढ़ी है.

पिछले महीने कुछ हिंदू दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने सामाजिक समारोहों के बहाने ईसाई मिशनरियों द्वारा कथित जबरन धर्मांतरण के प्रयासों के ख़िलाफ़ जम्मू के सांबा ज़िले में विरोध प्रदर्शन किया था. कार्यकर्ताओं ने मांग की थी कि प्रशासन ‘जबरन धर्मांतरण’ में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करे.

2018 में जम्मू के पुंछ ज़िले के नौशेरा गांव में ईसाई धर्म अपनाने वाले चार हिंदू परिवारों पर हमला किया गया और उनका सामाजिक बहिष्कार किया गया. अपराधियों ने उनके चर्च में भी आग लगा दी, जिससे सरकार को उनकी सुरक्षा के लिए उनके पैतृक गांव में एक पुलिस चौकी स्थापित करनी पड़ी.

जम्मू-कश्मीर में ईसाई धर्म प्रचारकों द्वारा अन्य धर्मों के लोगों का कथित रूप से जबरन धर्मांतरण कराने का मुद्दा कोई नई बात नहीं है.

2012 में जम्मू-कश्मीर के ग्रैंड मुफ़्ती बशीर-उद-दीन ने एक फ़तवा जारी कर तीन ईसाई पादरियों को क्षेत्र छोड़ने का निर्देश दिया था, जबकि चौथे पादरी, जो एक प्रमुख मिशनरी स्कूल के प्रधानाचार्य थे, को नोटिस जारी किया गया था. ग्रैंड मुफ़्ती ने आरोप लगाया था कि वे ‘घाटी के मुसलमानों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए लुभाने’ के लिए ज़िम्मेदार थे.

2006 में एक इंजीनियर और इस्लाम से ईसाई धर्म अपनाने वाले एक प्रमुख कश्मीरी बशीर अहमद तांत्रे की बारामूला ज़िले में अज्ञात बंदूकधारियों ने हत्या कर दी थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)