रिहायशी इलाके में पुलिस कैंप, छीनी जाती ज़मीन: ‘नए भारत’ में आदिवासी अस्तित्व पर गहराता संकट

एक ओर मोदी सरकार आदिवासियों के विकास का ढिंढोरा पीटती है, वहीं निजी कंपनियों के लिए उनके जल, जंगल, ज़मीन के दोहन का रास्ता खोल रही है. पेसा व वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को निष्क्रिय करते हुए जल, जंगल, ज़मीन और खनन से संबंधित कानूनों में संशोधन किया जा रहा है. यह साफ़ है कि ‘नए भारत’ में आदिवासियों का अस्तित्व ख़तरे में है.