नई दिल्ली: यूपी के मुजफ्फरनगर में बुढ़ाना के एक डिग्री कॉलेज छात्र ने शनिवार (8 नवंबर) सुबह एक कक्षा के अंदर खुद को आग लगा ली और गंभीर रूप से घायल हो गए.
बीए द्वितीय वर्ष के छात्र का आरोप है कि कॉलेज के प्रिंसिपल ने फीस न चुकाने को लेकर उन्हें लगातार परेशान किया. उन्होंने एक नोट में कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया गया क्योंकि 1,700 रुपये का भुगतान करने के बाद भी 7,000 रुपये बकाया थे.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित 20 वर्षीय छात्र पास के एक गांव का रहने वाला है, जिसने डीएवी पीजी डिग्री कॉलेज परिसर में यह आत्मघाती कदम उठाया और 70% से ज़्यादा जलने की हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उन्हें पहले एक स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, फिर मेरठ रेफर कर दिया गया और बाद में चोटों की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली के एक अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया.
अखबार के अनुसार, कथित तौर पर उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद उन्होंने शनिवार दोपहर यह कदम उठाया. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में उन्हें आग की लपटों में घिरा हुआ दिखाया गया है.
छात्र ने प्रिंसिपल पर शारीरिक उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान का आरोप लगाया
छात्र कई दिनों से तानों और गालियों का शिकार हो रहा था. खुद को आग लगाने से पहले उन्होंने दो दिन पहले एक वीडियो बयान और एक हस्तलिखित नोट जारी किया था, जिसमें उन्होंने प्रिंसिपल प्रदीप कुमार पर ‘शारीरिक उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान’ का आरोप लगाया था.
उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन ने सज़ा के तौर पर उसका परीक्षा फॉर्म स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रिंसिपल ने ‘सबके सामने’ उनका अपमान किया और कहा कि ‘यह कॉलेज कोई धर्मशाला नहीं है.’ प्रिंसिपल पर गाली-गलौज, उनके बाल खींचने और पिटाई करने का भी आरोप है.
उन्होंने एक वीडियो में कथित तौर पर कहा, ‘प्रिंसिपल प्रदीप कुमार ने मुझे अपने कार्यालय में बुलाया और मुझसे 5,000 रुपये फीस जमा करने को कहा. मैंने उनसे कहा कि मैंने परीक्षा फीस ऑनलाइन जमा कर दिया है और जैसे ही मेरे पिता को मिल से गन्ने का भुगतान मिलेगा, मैं ट्यूशन फीस जमा कर दूंगा. उन्होंने मुझे गालियां दीं, मेरे बाल पकड़े और मुझ पर हमला किया. वह मुझे कॉलेज के गेट तक ले गए और फिर से मेरे साथ मारपीट की.’
छात्र ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन ने कथित तौर पर पुलिस को बुलाया और तीन पुलिसकर्मियों ने भी उन्हें ‘गाली-गलौज की और धक्का देकर’ परिसर से बाहर निकाल दिया.
उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने पहले भी उन गरीब और असहाय छात्रों के लिए आवाज़ उठाई थी जो समय पर अपनी फीस नहीं भर पा रहे थे. मुझे इसकी सज़ा मिली. कॉलेज (प्रबंधन) ने पुलिस बुला ली. मुझे उनके सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन पुलिसकर्मियों – धर्मवीर (सिंह), नंद किशोर और विनीत (कुमार) ने मेरा अपमान किया और मुझे धमकाया.’
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर वह आत्महत्या करते हैं, तो इसकी ज़िम्मेदारी प्रिंसिपल और तीन पुलिसकर्मियों की होगी.
इस घटना के बाद छात्रों और स्थानीय लोगों ने कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
प्रिंसिपल के खिलाफ केस
छात्र की बहन की शिकायत के आधार पर बुढ़ाना पुलिस ने डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल के खिलाफ बीएनएस की धारा 352 (हमला) और 351(3) (गंभीर नुकसान पहुंचाने की धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है.
शनिवार देर शाम ज़िला मजिस्ट्रेट उमेश मिश्रा और ज़िला पुलिस प्रमुख, एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने कॉलेज का दौरा किया और गहन जांच के आदेश दिए.
मुज़फ़्फ़रनगर के एसपी संजय कुमार ने बताया कि छात्र द्वारा नामजद तीन पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, तीनों पुलिसकर्मियों पर अभी तक मामला दर्ज नहीं किया गया है.
प्रिंसिपल कुमार ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उन्होंने छात्र को केवल उनकी बकाया फीस के बारे में याद दिलाया था.
