नई दिल्ली: भुवनेश्वर में कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) यूनिवर्सिटी के प्रथम वर्ष का एक छात्र रविवार (30 नवंबर) रात अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया. इस साल यह ऐसी तीसरी घटना है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि छात्र की पहचान छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के रहने वाले राहुल यादव (18) के तौर पर हुई है, जो कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग का छात्र था.
पुलिस ने कहा कि उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, डिजिटल कम्युनिकेशन और हॉस्टल में रहने वालों, मां और मृतक के रिश्तेदारों से मिली जानकारी से पता चलता है कि वह अपने राज्य की लड़की के साथ रिलेशनशिप में था.
छात्र की मां ने भी लड़की के परिवार पर उत्पीड़न का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘लड़की का पिता मुझे और मेरे बेटे को फोन करके धमकाता था. मेरा बेटा मानसिक तनाव में था. मैंने हॉस्टल प्रबंधन को उस पर नज़र रखने के लिए बार-बार फोन किया था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया.’
पुलिस ने कहा कि लड़की के पिता की शिकायत के आधार पर उसके पिता, मां और भाई के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.
भुवनेश्वर में कमिश्नरेट पुलिस ने कहा, ‘हॉस्टल का कमरा, जो अंदर से बंद था, पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में खोला गया. शव को केआईएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां मौजूद डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया.’
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, केआईआईटी यूनिवर्सिटी ने एक बयान में गहरी चिंता जताई और पुष्टि किया कि राहुल की मौत के पीछे रिश्तों का झगड़ा मुख्य वजह लग रहा है. बयान में कहा गया, ‘लड़के के माता-पिता ने भी कहा है कि जिस लड़की के साथ वह प्रेम संबंध में था, उसके परिवार वाले उसे धमका रहे थे. इसी वजह से उसने आत्महत्या कर ली. उसके माता-पिता ने लड़की के परिवार वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है.’
यूनिवर्सिटी ने कहा है कि वह पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेगी और छात्र से कहा कि जब भी जरूरत हो, वे काउंसलिंग के लिए संपर्क करें.
जुलाई में यूजीसी ने यूनिवर्सिटी से पूछा था कि 16 फरवरी और 1 मई को नेपाल के दो छात्रों की मौत के बाद उसके खिलाफ ‘अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई’ क्यों न लिया जाए. फैक्ट-फाइंडिंग पैनल ने कहा था कि केआईआईटी प्रशासन की कार्रवाई ‘आपराधिक दायित्व के बराबर है.’
मालूम हो कि 16 फरवरी को एक 20 वर्षीय नेपाली छात्रा विश्वविद्यालय के छात्रावास में मृत पाई गई थीं. इसके बाद गुस्साए छात्रों ने परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, उनके लिए न्याय की मांग की और आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने उत्पीड़न की शिकायतों को नजरअंदाज किया है.
जब तनाव बढ़ गया तो विश्वविद्यालय ने 500 से अधिक नेपाली छात्रों को जबरन विश्वविद्यालय से निकाल दिया था. बाद में काठमांडू के हस्तक्षेप के बाद उन्हें वापस बुला लिया था.
(अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं– दोस्त या परिजन– जो मानसिक रूप से परेशान हैं और आत्महत्या का जोखिम है, तो कृपया उनसे संपर्क करें. सुसाइड प्रिवेंशन इंडिया फाउंडेशन के पास उन फोन नंबरों की एक सूची है जिन पर कॉल करके वे गोपनीयता से बात कर सकते हैं. टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा संचालित परामर्श सेवा, आईकॉल ने देश भर के चिकित्सकों/थेरेपिस्ट की एक क्राउडसोर्स्ड सूची तैयार की है. आप उन्हें नज़दीकी अस्पताल भी ले जा सकते हैं.)
