नई दिल्ली: एक संसदीय समिति ने मंगलवार (2 दिसंबर) को संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में सरकार से फेक न्यूज़ प्रकाशित या प्रसारित करने के लिए सज़ा के नियमों में संशोधन की संभावना तलाशने को कहा है, जिसमें ऐसा करने के दोषी पाए जाने वाले पत्रकार या कंटेंट क्रिएटर की मान्यता रद्द करना शामिल हो.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा सासंद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय समिति ने सरकार से फेक न्यूज शब्द को परिभाषित करने और गलत सूचनाओं से निपटने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के उद्देश्य से मीडिया के लिए मौजूदा नियामक ढांचे में उपयुक्त प्रावधान शामिल करने को कहा है.
‘फेक न्यूज़ पर रोक लगाने की व्यवस्था की समीक्षा’ संबंधी रिपोर्ट में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से यह भी आग्रह किया कि फेक न्यूज़ की परिभाषा तय करते समय सभी हितधारकों से परामर्श किया जाए.
समिति ने कहा, ‘हर प्रकार के मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल) के लिए संबंधित अधिनियमों/नियमों/दिशानिर्देशों में फेक न्यूज़ प्रकाशित/प्रसारित करने के दंडात्मक प्रावधानों में संशोधन की भी आवश्यकता है.’
इसमें कहा गया कि यदि किसी पत्रकार/क्रिएटर को फेक न्यूज़ बनाने या फैलाने का दोषी पाया जाता है, तो मंत्रालय उसके मान्यता-पत्र (accreditation) को रद्द करने की संभावना/व्यवहार्यता पर विचार कर सकता है. समिति ने कहा, ‘यह कहने की आवश्यकता नहीं कि इन सभी उपायों को मीडिया संगठनों और संबंधित हितधारकों के बीच सहमति बनाने की प्रक्रिया से गुजरकर ही लागू किया जाना चाहिए.’
रिपोर्ट में कहा गया कि ‘गलत सूचना’ और ‘फेक न्यूज़’ जैसे शब्दों से जुड़ी अस्पष्टता को ध्यान में रखते हुए समिति का मानना है कि ‘फेक न्यूज़’ शब्द की एक सूक्ष्म और स्पष्ट परिभाषा निर्धारित करने की आवश्यकता है.
रिपोर्ट ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि गलत सूचनाओं से निपटने और संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा—इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के मौजूदा विनियामक ढांचे में उपयुक्त प्रावधान सम्मिलित किए जाएं.
समिति ने यह भी कहा कि मीडिया संगठनों में फैक्ट-चेकिंग प्रणाली और आंतरिक लोकपाल (ombudsman) की व्यवस्था होना आत्म-नियमन तंत्र को मजबूत करने और गलत सूचना/फेक न्यूज़ की समस्या पर प्रभावी रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
उसने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से आग्रह किया कि देश के सभी प्रिंट, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संगठनों में फैक्ट-चेकिंग प्रणाली और आंतरिक लोकपाल को अनिवार्य बनाया जाए.
