नई दिल्ली: प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी ने हाल ही में भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हो रहे हमलों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में बढ़ते हिंदू राष्ट्रवाद को लेकर चिंता जताई है.
ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में रुश्दी ने कहा कि वह मुसलमानों की छवि को लेकर और भारत के लेखकों, पत्रकारों और शिक्षाविदों पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंतित हैं.
रुश्दी ने इंटरव्यू में कहा, ‘मैं इसे लेकर बहुत चिंतित हूं. भारत में मेरे बहुत से दोस्त हैं. हर कोई पत्रकारों, लेखकों, बुद्धिजीवियों, प्रोफेसरों आदि की स्वतंत्रता पर हो रहे हमलों से बेहद चिंतित है.’
Novelist Salman Rushdie is “very worried” about growing Hindu nationalism and restrictions on free expression in Modi’s India
Speaking to Mishal Husain, he says he first saw the warning signs decades ago
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— Bloomberg (@business) December 7, 2025
उन्होंने कहा कि देश की पहचान को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश होती दिख रही है:
ऐसा लगता है कि देश के इतिहास को दोबारा लिखने की इच्छा है, मूल रूप से यह कहने के लिए कि हिंदू अच्छे हैं और मुसलमान बुरे. वीएस नायपॉल ने इसे कभी ‘घायल सभ्यता’ कहा था, यह विचार कि भारत एक हिंदू सभ्यता है जिसे मुसलमानों के आने से चोट पहुंची. इस सोच को बहुत ज़्यादा बढ़ावा मिल रहा है.
दशकों पहले दिए गए अपने चेतावनी भरे बयानों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगर आप एक लेखक हैं, अगर आप ध्यान देते हैं, तो कभी-कभी आपको आने वाली चीजें पहले ही दिख जाती हैं, और मुझे लगता है कि मैं वही कर रहा था, मैं ध्यान दे रहा था.’
रुश्दी के इस बयान का संदर्भ यह है कि उन्होंने कई दशक पहले ही भारत में बढ़ती कट्टरता, नफरत और स्वतंत्रताओं पर बढ़ रहे हमलों को भांप लिया था.
2022 में रुशदी पर हुआ था हमला
1988 में द सैटेनिक वर्सेज़ के प्रकाशित होने के बाद से रुश्दी ईरान द्वारा जारी फतवे की छाया में जी रहे हैं. अगस्त 2022 में यह खतरा दोबारा हिंसक रूप में सामने आया, जब उन्हें पश्चिमी न्यूयॉर्क में एक व्याख्यान देने से ठीक पहले हमला कर घायल कर दिया गया. हमले से उबरने के बाद लेखक की एक आंख की रोशनी चली गई और वह अपने एक हाथ से अब कोई काम नहीं कर पाते हैं.
हमलावर, 27 वर्षीय हादी मतार, बाद में हत्या के प्रयास और हमले का दोषी पाया गया और उसे 25 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई.
भारत और द सैटेनिक वर्सेज़
उल्लेखनीय है कि भारत ने अक्टूबर 1988 में रुश्दी के उपन्यास द सैटेनिक वर्सेज़ के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था. यह आदेश राजीव गांधी सरकार के दौरान वित्त मंत्रालय द्वारा जारी कस्टम नोटिस के तहत लागू किया गया था. सरकार ने इसके लिए यह तर्क दिया था कि मुस्लिम समुदाय, जो इस किताब को धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध मानते थे, इसकी कड़ी प्रतिक्रिया दे सकते हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 नवंबर 2024 को 37 साल पुराने इस आयात प्रतिबंध को प्रभावी रूप से हटा दिया.
रुश्दी का जन्म 1947 में मुंबई में हुआ. उन्होंने इंग्लैंड के बोर्डिंग स्कूल के बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी. साहित्य में योगदान के लिए उन्हें 2007 में ‘नाइट’ की उपाधि दी गई.
