ओडिशा: नबरंगपुर में प्रार्थना को लेकर ईसाई आदिवासियों पर हमला, चर्च में ताला डाला

ओडिशा के नबरंगपुर ज़िले के कापेना गांव में ईसाई आदिवासियों को भीड़ ने लाउडस्पीकर पर धमकियां देते हुए कहा गया है कि यदि उन्होंने अपनी धार्मिक गतिविधियां जारी रखीं तो चर्च को ध्वस्त कर दिया जाएगा और 30 ईसाई आदिवासी परिवारों को गांव से बाहर कर दिया जाएगा.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

नई दिल्ली: ओडिशा के नबरंगपुर ज़िले के कापेना गांव में ईसाई आदिवासी समुदाय के सदस्यों के साथ कथित तौर पर उत्पीड़न, मारपीट की गई और उन्हें प्रार्थना करने से रोका गया, जब शरारती तत्वों का एक समूह उनके चर्च में घुस आया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोप है कि भीड़ ने लाउडस्पीकर पर धमकियां दीं और कहा कि यदि उन्होंने अपनी धार्मिक गतिविधियां जारी रखीं तो चर्च ध्वस्त कर दी जाएगी और 30 ईसाई आदिवासी परिवारों को गांव से बाहर कर दिया जाएगा.

गौरतलब है कि करीब 250 घरों वाले इस गांव में बहुसंख्यक आदिवासी अब चर्च को स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं और लगभग 30 परिवारों वाले ईसाई समुदाय द्वारा की जा रही प्रार्थनाओं का विरोध कर रहे हैं. गांव के अधिकांश निवासी गोंड, भतरा और सांता समुदायों से हैं और उनकी आजीविका खेती पर निर्भर है. बीते वर्षों में कुछ आदिवासी परिवारों ने ईसाई धर्म अपनाया है.

यह घटना रविवार, 25 जनवरी को हुई. एक स्थानीय निवासी टूना सांता ने अख़बार को बताया, ‘जब श्रद्धालुओं ने पूछा कि वे प्रार्थना क्यों बंद करें, तो आरोपियों ने बाहर से चर्च में ताला लगा दिया और सभी को जबरन बाहर निकाल दिया.’

यूसीए न्यूज़ के मुताबिक, यह भीड़ हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों से जुड़ी थी, जिन्होंने ईसाई आदिवासियों को हिंदू धर्म में वापस लौटने की चेतावनी दी.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगले दिन इसी भीड़ ने समुदाय के दो युवकों – जलधर सांता (17) और मोहन सांता (20) – के साथ मारपीट की. बताया गया है कि इसके बारे में उमरकोट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई. हालांकि, पुलिस ने यह कहकर मामले को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया कि गांव में दो समूहों के बीच पहले से तनाव बना हुआ है और सुरक्षा बल पहले ही तैनात किए जा चुके हैं.

उमरकोट थाने के प्रभारी निरीक्षक (आईआईसी) रामकांत साईं ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ‘हमें अभी तक इस मुद्दे पर कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.’

इस बीच, दोनों पक्षों के सदस्यों को शामिल करते हुए एक शांति समिति का गठन किया गया और नबरंगपुर के उप-जिलाधिकारी प्रकाश कुमार मिश्रा की निगरानी में गांव में बैठक हुई.

नबरंगपुर के कलेक्टर महेश्वर स्वाइन के अनुसार, भीड़ उस मकान पर आपत्ति जता रही थी, जिसे कथित तौर पर ‘अतिक्रमित भूमि’ पर बनाया गया है और जिसका एक हिस्सा प्रार्थना स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.

कलेक्टर ने अख़बार से कहा, ‘शांति समिति के निर्णय के अनुसार, प्रार्थना स्थल को स्थानांतरित करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है और दोनों समूहों से कहा गया है कि वे आपसी सहमति से मुद्दे का समाधान करें और पहले की तरह सौहार्दपूर्ण ढंग से रहें.’

इस बीच, राष्ट्रीय ईसाई मोर्चा (ओडिशा इकाई) के महासचिव पल्लव लीमा ने कहा कि ऐसी घटनाएं जानबूझकर उकसाने वाली हैं और ध्रुवीकरण की सोची-समझी कोशिश हैं. उन्होंने कहा, ‘नबरंगपुर के मामले में आदिवासियों को ही आदिवासियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है.’

यह घटना उस घटना के कुछ हफ्तों बाद सामने आई है, जिसमें ढेंकानाल ज़िले के परजंग गांव में प्रार्थना कराने के आरोप में एक पादरी पर कथित तौर पर हिंदुत्व समर्थक भीड़ ने हमला किया था.

4 जनवरी को पादरी बिपिन नायक एक प्रार्थना सभा करा रहे थे, जब भीड़ ने जबरन सभा रुकवाई, उनके हाथ बांधे, डंडों से पीटा, फिर उन्हें चप्पलों की माला पहनाई गई और जबरन गोबर खिलाया गया. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में 21 जनवरी को नौ लोगों को हिरासत में लिया गया.