नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार (1 फरवरी) को घोषणा की है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्य में सरकारी अस्पतालों में गर्भ संस्कार कक्ष स्थापित किए जाएंगे और सभी विश्वविद्यालयों में भी इस विषय को पढ़ाया जाएगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, गर्भ संस्कार’ का मतलब गर्भ में ही शिशु को संस्कारित करना है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उससे संबद्ध संगठनों का अक्सर दावा रहा है कि गर्भ संस्कार यह सुनिश्चित करता है कि बच्चा गर्भ में ही संस्कृति और मूल्यों को सीख सके और यह प्रक्रिया दो वर्ष की आयु तक जारी रहे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस संबंध में मुख्यमंत्री यादव ने गर्भ संस्कार को भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाने का साधन बताया और कहा कि राज्य सरकार इस प्रथा को संस्थागत रूप देने जा रही है.
मुख्यमंत्री यादव इंदौर में ‘गर्भ संस्कार’ को बढ़ावा देने वाली पहल ‘दिव्य संतान प्रकल्प’ के कार्यक्रम में शामिल हुए. उन्होंने ‘गर्भ संस्कार’ पर केंद्रित एक पुस्तक का विमोचन भी किया.
मुख्यमंत्री ने अभिमन्यु और अष्टावक्र की पौराणिक कथाओं का हवाला देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में ‘गर्भ संस्कार’ का हमेशा से विशेष महत्व रहा है और इस प्रक्रिया से भावी पीढ़ियों को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है.
यादव ने कहा,’खासकर एलोपैथी के विशेषज्ञ भी अब गर्भ संस्कार का महत्व स्वीकार कर रहे हैं. मेरी बेटी खुद स्त्री रोग विशेषज्ञ है और वह भी अपने अस्पताल में गर्भ संस्कार कराती है.’
राजपत्र अधिसूचना जल्द ही सरकार जारी करेगी: सीएम
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ‘गर्भ संस्कार’ को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
उन्होंने आगे कहा कि राज्य के सभी मेडिकल विश्वविद्यालयों में गर्भ संस्कार को अनिवार्य बनाने के लिए जल्द ही एक राजपत्र अधिसूचना जारी की जाएगी.
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में आयुष और एलोपैथी चिकित्सा पद्धतियों का पालन करने वाले सरकारी अस्पतालों में गर्भ संस्कार कक्ष स्थापित किए जाएंगे.
आरएसएस के वरिष्ठ नेता सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी, जो इस कार्यक्रम में उपस्थित थे, ने कहा कि विशेष रूप से युवा दंपतियों को इस विषय का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि गर्भ संस्कार को लेकर व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए ताकि लोग इसे आचरण के स्तर पर अपना सकें.
