नई दिल्ली: मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने का हवाला देते हुए मुंबई के प्रतिष्ठित काला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल के आयोजकों ने एक पुस्तक चर्चा कार्यक्रम रद्द कर दिया है, जिसमें नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और शिक्षाविद् आनंद तेलतुम्बड़े को वक्ता के रूप में शामिल होना था.
‘इन्कार्सेरेटेड: टेल्स फ्रॉम बिहाइंड बार्स’ शीर्षक से प्रस्तावित यह कार्यक्रम गुरुवार शाम आयोजित होना था, लेकिन 3 फरवरी की देर रात आयोजकों ने ईमेल के ज़रिए इसके रद्द होने की सूचना दी.
इस चर्चा में आनंद तेलतुम्बड़े की जेल-स्मृतियों पर आधारित किताब ‘द सेल एंड द सोल: ए प्रिज़न मेमॉयर’ पर बातचीत होनी थी. कार्यक्रम में द फ़ीयर्ड: कॉनवर्सेशन्स विद इलेवन पॉलिटिकल प्रिज़नर्स की लेखिका नीता कोल्हटकर और समाचार वेबसाइट स्क्रॉल.इन के संपादक नरेश फ़र्नांडिस भी वक्ता के रूप में शामिल होने वाले थे.
एल्गार परिषद मामले में नामज़द और गिरफ्तार किए गए 16 लोगों में शामिल आनंद तेलतुम्बड़े ने मुंबई की तलोजा सेंट्रल जेल में 31 महीने बिताए हैं. ज़मानत पर रिहा होने के बाद उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें उनकी जेल डायरी भी शामिल है, जिसे ब्लूम्सबरी ने प्रकाशित किया है.
द वायर से बातचीत में तेलतुम्बड़े ने बताया कि उन्हें और अन्य वक्ताओं को भेजे गए ईमेल में कहा गया कि सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के प्रचार के लिए जारी किए गए एक क्रिएटिव को मुंबई पुलिस द्वारा देखे जाने के बाद आयोजन रद्द करने का फैसला लिया गया.
पुलिस के इस हस्तक्षेप को ‘बेतुका’ बताते हुए तेलतुम्बड़े ने कहा कि यह घटनाक्रम हैरान करने वाला है, क्योंकि उनकी किताब लंबे समय से सार्वजनिक डोमेन में है और बीते कई महीनों में उनकी पुस्तकों पर अनेक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं.
उन्होंने कहा, ‘यह पहली बार है जब इस तरह की आपत्ति सामने आई है. पुलिस आपत्ति जता सकती थी, लेकिन कार्यक्रम का बचाव करना आयोजकों की जिम्मेदारी थी. उन्होंने बिना विरोध किए पीछे हटना चुना.’
कार्यक्रम रद्द होने की सूचना पाने वाली नीता कोल्हटकर ने द वायर से कहा, ‘ईमेल पढ़कर मुझे बेहद गुस्सा आया.’ उन्होंने बताया कि तेलतुम्बड़े उनकी किताब में शामिल 11 राजनीतिक बंदियों में से एक हैं और यह चर्चा दोनों पुस्तकों को केंद्र में रखकर आयोजित की जा रही थी, जिसका संचालन नरेश फ़र्नांडिस को करना था.
आयोजकों ने वक्ताओं से यह भी अनुरोध किया कि वे रद्द किए गए कार्यक्रम से संबंधित अपने सोशल मीडिया पोस्ट भी हटा लें.
गौरतलब है कि मुंबई पुलिस कला घोड़ा आर्ट्स फेस्टिवल के आधिकारिक ‘समर्थकों’ में शामिल है. यह महोत्सव 31 जनवरी से 8 फरवरी तक आयोजित हो रहा है. इसके अन्य सहयोगियों में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी), महाराष्ट्र पर्यटन विभाग और मुंबई ट्रैफिक पुलिस शामिल हैं. पिछले 25 वर्षों से आयोजित हो रहा यह फेस्टिवल शहर के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में से एक है, जिसमें साहित्यिक चर्चाओं समेत विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं.
एक सक्रिय लेखक और स्तंभकार के रूप में आनंद तेलतुम्बड़े अख़बारों और डिजिटल मंचों पर नियमित रूप से लिखते रहे हैं. द वायर में उनका कॉलम द अनक्वायट रिपब्लिक प्रकाशित होता रहा है और वे अक्सर विभिन्न मीडिया मंचों पर साक्षात्कारों में भी दिखाई देते हैं. उनका लेखन प्रायः सरकार की नीतियों और फैसलों की आलोचनात्मक समीक्षा करता है.
करीब ढाई साल तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 नवंबर, 2022 को उन्हें ज़मानत दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा. इसके बाद 26 नवंबर 2022 को उनकी रिहाई हुई.
हालांकि, ज़मानत की शर्तों के तहत उन्हें किसी भी अकादमिक या सार्वजनिक गतिविधि में शामिल होने के लिए विशेष एनआईए अदालत से अनुमति लेनी होती है.
ट्रायल कोर्ट ने उन्हें चेन्नई में आयोजित एक साहित्यिक चर्चा में शामिल होने की अनुमति दी थी, लेकिन हाल ही में कोच्चि लिटरेचर फेस्टिवल में भाग लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा था कि महाराष्ट्र से बाहर किसी अकादमिक कार्यक्रम में शामिल होना ‘एकेडमिक लक्ज़री’ के दायरे में आता है.
दिलचस्प बात यह है कि इसी अदालत ने 4 फरवरी को तेलतुम्बड़े को भोपाल में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने की अनुमति दे दी.
