मणिपुर: कर्फ्यू के बीच उखरुल में दो और घर जलाए गए, गोलीबारी; भीड़ ने थाने पर धावा बोला

मणिपुर के उखरुल ज़िले में हिंसा की शुरुआत 7 फरवरी को तब हुई, जब कथित तौर पर एक तंगखुल नगा व्यक्ति के साथ कुकी-जो समुदाय के कुछ लोगों ने मारपीट की. उसके बाद आगजनी और गोलीबारी घटनाएं हो रही हैं. गुरुवार को लितान सारेखोंग गांव में और दो घरों में आग लगा दी गई. वहीं, तंगखुल नगा महिलाओं के एक समूह ने लितान पुलिस थाने पर धावा बोलने की कोशिश की.

9 फरवरी 2026 को उखरुल ज़िले में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा कथित तौर पर कई घरों में आग लगाने के बाद तैनात किए सुरक्षाकर्मी. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: हिंसाग्रस्त मणिपुर के उखरुल ज़िले के लितान सारेखोंग गांव में गुरुवार (12 फरवरी) को तनाव और बढ़ गया, जब अनिश्चितकालीन कर्फ्यू के बावजूद दो और घरों में आग लगा दी गई. इसके बाद इलाके में गोलीबारी भी हुई.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में तंगखुल नगा महिलाओं के एक समूह ने, यह आरोप लगाते हुए कि सुरक्षा बल हालात पर काबू नहीं पा सके हैं, लितान पुलिस थाने पर धावा बोलने की कोशिश की. पुलिस ने आंसू गैस के कई गोले दागकर भीड़ को तितर-बितर किया.

ज्ञात हो कि हिंसा की शुरुआत शनिवार (7 फरवरी) को तब हुई, जब कथित तौर पर एक तंगखुल नगा व्यक्ति के साथ कुकी-जो समुदाय के कुछ लोगों ने मारपीट की. रविवार शाम पत्थरबाज़ी हुई, जिसमें एक पुलिसकर्मी सहित कई लोग घायल हो गए. इसके बाद रात में आगजनी की घटनाएं हुईं. हिंसा के दौरान कथित तौर पर गोलियां चलाई गईं. घटना के बाद डीएम आशीष दास ने 8 फरवरी शाम 7 बजे से इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी थी.

लेकिन कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए अज्ञात संदिग्धों ने मंगलवार को लितान गांव में 50 घरों में आग लगा दी, जिससे दोनों समुदायों के बीच हिंसा और भड़क गई. इसके बाद प्रशासन ने ज़िले में पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं.

पुलिस के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 7 बजे अज्ञात लोगों ने लितान सारेखोंग गांव में दो घरों को आग के हवाले कर दिया. मणिपुर फायर सर्विस ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग की तीव्रता के कारण दोनों घर जलकर राख हो गए.

अधिकारियों ने बताया कि सुबह करीब 8.50 बजे सशस्त्र बदमाशों और पुलिस के बीच करीब 30 मिनट तक भारी गोलीबारी हुई.

इस बीच, तंगखुल नगा महिलाओं ने लितान पुलिस थाने पर धावा बोलने की कोशिश की और कानून-व्यवस्था संभालने में सुरक्षा बलों की विफलता का आरोप लगाया. पुलिस ने आंसू गैस के कई गोले दागकर भीड़ को तितर-बितर किया.

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और इलाके में स्थिति नियंत्रण में है.

इस बीच, मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को 57 माउंटेन डिवीजन (रेड शील्ड डिवीजन) के मेजर जनरल सुभंकर बसु से मुलाकात कर राज्य में शांति बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की.

गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री सचिवालय में हुई इस चर्चा का केंद्र समन्वित प्रयासों के जरिए स्थिरता, जन-सुरक्षा और कानून के राज को सुनिश्चित करना रहा –  जो प्रधानमंत्री के शांति और विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है.

सरकार में भागीदारी को लेकर विधायक के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन जारी

इधर, गुरुवार को वैफेई जनजाति की महिलाओं ने एक विरोध रैली निकाली और कुकी-जो विधायक एलएम खाउते के प्रति नाराज़गी जताई, जो मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए इंफाल गए थे.

एलएम खाउते वैफेई समुदाय से हैं, जो मणिपुर के कुकी-जो जनजातियों में से एक है.

बता दें कि हाल ही में पिछले तीन साल से जातीय हिंसाग्रस्त मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के एक साल बाद राज्य में नई सरकार बनी है. भाजपा नेता युमनाम खेमचंद नए मुख्यमंत्री बने. नई सरकार में तीन कुकी-ज़ो विधायकों के भागीदारी को लेकर भी नागरिक समाज संगठनों में नाराजगी है.

यह प्रदर्शन एक नागरिक संगठन वैफेई वीमेन एसोसिएशन (वीडब्ल्यूए) के आह्वान पर हुआ. प्रदर्शनकारी सुबह डोरकास वेंग, चूड़ाचांदपुर स्थित वैफेई पीपल्स काउंसिल हॉल में जुटे और विधायक के आवास की ओर मार्च किया.

ज़ोमी मदर्स एसोसिएशन (जेडएमए) – जो कुकी और ज़ोमी समुदायों की उप-जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है – के सदस्यों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की. हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने जेडएमए सदस्यों से कहा कि यह वैफेई समुदाय का आंतरिक मामला है.

विधायक के घर के प्रवेश द्वार के पास रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए कुछ राउंड फायर किए. दोपहर करीब 12.45 बजे प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया गया.