नई दिल्ली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर की एक रेजिडेंट डॉक्टर, जो मूल रूप से नगालैंड की हैं, के साथ परिसर के पास तीन युवकों ने कथित तौर पर नस्लीय दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न की खबर सामने आई है.
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि डॉक्टर की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.
पुलिस के अनुसार, यह घटना रविवार (22 फरवरी) रात करीब 8 बजे की है, जब स्त्री रोग में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही 27 वर्षीय महिला डॉक्टर एक मॉल से अपने कैंपस जा रही थी और तभी तीन मोटरसाइकिल सवार युवकों ने कथित तौर पर उनका पीछा करना शुरू कर दिया.
पुलिस को दी अपनी शिकायत में महिला ने बताया है कि उन युवकों ने कथित तौर पर डेढ़ किलोमीटर तक उनका पीछा किया और पूरे रास्ते उन पर नस्लीय टिप्पणियां की और अपशब्द कहे.
डॉक्टर द्वारा शिकायत में आगे कहा गया है कि जब वह सेना शिविर के पास स्थित संस्थान के गेट नंबर 2 के पास पहुंचीं, तो कथित तौर पर एक व्यक्ति ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, उन्हें गलत तरीके से छुआ और अपने गुप्तांग दिखाए. उन्होंने मदद के लिए गुहार लगाई, जिसके बाद वे लोग वहां से भाग गए.
कैंटोनमेंट सर्कल अधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि डॉक्टर की शिकायत के आधार पर सोमवार (23 फरवरी) को एम्स पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74, 296 ए, 352 और 351 सी के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.
इस मामले को लेकर गोरखपुर के पुलिस अधीक्षक (शहर) अभिनव त्यागी ने कहा, ‘तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. सीसीटीवी फुटेज की मदद से उनकी पहचान सूरज गुप्ता, आदित्य राजपूत और अमित विश्वकर्मा के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 21 से 24 वर्ष के बीच है. मोटरसाइकिल बरामद कर ली गई है.’
गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कौस्तुभ ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों से जुड़ी मोटरसाइकिल की पहचान हो सकी.
एसएसपी ने कहा, ‘आरोपियों को पकड़ने के लिए चार पुलिस टीमें गठित की गई थी.’
इस घटना पर नॉर्थ ईस्ट फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया रेजिडेंट डॉक्टर्स (नाफोर्ड) सहित अन्य चिकित्सा संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. इन संगठनों ने महिला डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है.
नाफोर्ड ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में ने इस घटना को गंभीर नस्लीय उत्पीड़न और यौन हमले का मामला बताया. पोस्ट में कहा गया कि पूर्वोत्तर से होने के कारण डॉक्टर को रूढ़िवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, जिससे उन्हें गहरा सदमा और अपमान महसूस हुआ.
गौरतलब है कि पूर्वोत्तर के छात्रों के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार की घटनाएं देश के अलग-अलग इलाकों से सामने आ रही हैं. हाल ही में दिल्ली में नार्थ ईस्ट की तीन लड़कियों के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार और धमकाने की घटना सामने आई थी.
सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो सामने आने के बाद मेघालय के सीएम ने कहा है कि पूर्वोत्तर के लोगों के ख़िलाफ़ भेदभाव बंद होना चाहिए.
