मेघालय: भाजपा नेता सुनील देवधर ने ईसाइयों का मज़ाक उड़ाया, विरोध के बाद माफ़ी मांगी

भाजपा ने सुनील देवधर ने 16 फरवरी को एक कार्यक्रम में कहा था कि कुछ चर्च अपने स्कूल में छात्रों के प्रवेश के लिए शर्तें लगाई हैं - जिसमें चर्च में अनिवार्य रूप से आना, ईसाई धर्म अपनाना और बाइबिल का परीक्षा पास करना शामिल है. साथ ही यह भी आरोप लगाया कि सरकार चर्च का साथ देती है और स्वदेशी धर्म (नियाम तिनराई) को मानने वालों को तब तक अस्पताल, सड़क, स्कूल और बिजली नहीं देती जब तक वे धर्म नहीं बदल लेते.

भाजपा नेता सुनील देवधर. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य सुनील देवधर ने मेघालय में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर ईसाइयों और यीशु मसीह का मज़ाक उड़ाकर विवाद खड़ा कर दिया. विभिन्न संगठनों और यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के भीतर से विरोध होने के बाद उन्होंने माफी मांगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने देवधर की कथित ‘विभाजनकारी बयानबाज़ी’ की निंदा की, जबकि राज्य एनसीपी की युवा इकाई ने उन पर ईसाई समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

यह विवाद पिछले सप्ताह एक इंडिजिनस फोरम मीटिंग में देवधर द्वारा दिए गए भाषण के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शुरू हुआ. ईसाई बहुल राज्य में इस पर राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं.

महाराष्ट्र से आने वाले देवधर ने स्थानीय खासी भाषा में भाषण दिया था, जिसमें कथित तौर पर चर्चों और यीशु मसीह को निशाना बनाने वाली टिप्पणियां शामिल थीं.

राज्य भाजपा के महासचिव डब्ल्यू पोहशना ने कहा कि ये टिप्पणियां ‘ईसाइयों के प्रति गंभीर पूर्वाग्रह’ दर्शाती हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि देवधर ने मसीह का मज़ाक उड़ाया और यीशु को बाहरी व्यक्ति या ‘डखार’ कहा.

एक बयान में एनपीपी ने पूर्वी खासी हिल्स जिले के पिन्टर गांव में आयोजित कार्यक्रम में देवधर द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणियों पर गहरी चिंता जताई. पार्टी ने कहा कि ये बयान ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ हैं और समाज में नफरत तथा विभाजन फैलाने के उद्देश्य से दिए गए प्रतीत होते हैं.

सामाजिक संगठन हाइनीवट्रेप यूथ काउंसिल (एचवाईसी) ने शिलांग के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया और देवधर का पुतला जलाकर जवाबदेही की मांग की. संगठन ने सार्वजनिक हस्तियों को चेतावनी दी कि वे ऐसे बयान न दें जो सांप्रदायिक भावनाओं को भड़का सकते हैं.

बढ़ती आलोचना के बीच भाजपा के राज्य नेतृत्व ने देवधर की टिप्पणियों से दूरी बना ली और उनसे सार्वजनिक माफी जारी करने को कहा. पार्टी ने जोर देकर कहा कि वह सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करती है.

इसके बाद देवधर ने माफी मांगते हुए कहा कि वे मसीह का बहुत सम्मान है और यदि उनकी टिप्पणियों से किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हों तो उन्हें खेद है.

पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह माफीनामा भाजपा की राज्य इकाई को भेजा गया, जिसने इसे मीडिया के साथ साझा किया.

इससे पहले एनपीपी के प्रवक्ता एचएम शांगप्लियांग ने कहा, ‘ऐसे आरोप निराधार हैं और समुदाय में नफरत व विभाजन पैदा करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं. हम सभी से अपील करते हैं कि ऐसी विभाजनकारी बयानबाज़ी को खारिज करें और एकता व सद्भाव को बढ़ावा दें.’

उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे शांति, सहिष्णुता, आपसी समझ और एकता को मजबूत करें.

शांगप्लियांग ने कहा कि राज्य की शांति और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने वाली ऐसी टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आपत्तिजनक तथा निराधार भाषण के लिए माफी और जवाबदेही की मांग की.

शिकायत दर्ज

राज्य एनसीपी की युवा इकाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि देवधर ने 16 फरवरी को एक सार्वजनिक संबोधन के दौरान मानहानिकारक बयान दिए और जानबूझकर ईसाई समुदाय को निशाना बनाया.

शिकायत के अनुसार देवधर ने कथित तौर पर दावा किया था कि कुछ चर्च स्कूलों में प्रवेश के लिए धर्मांतरण और अनिवार्य बाइबिल अध्ययन जैसी शर्तें लागू करते हैं, जिसे पार्टी ने अस्पष्ट और निराधार बताया.

शिकायत में भाजपा नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा गया कि उनके बयान सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकते हैं और धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकते हैं.

पीटीआई के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हो गई है और इसकी जांच की जा रही है.

पुलिस के अनुसार स्थिति फिलहाल शांतिपूर्ण है, जबकि प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और ऑनलाइन भड़काऊ सामग्री साझा न करने की अपील की है.

स्थानीय खबरों के अनुसार, मेघालय में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने एफआईआर दर्ज कराई है. वहीं, हिनीवट्रेप इंटीग्रेटेड टेरिटोरियल ऑर्गनाइजेशन ने भी शिकायत दर्ज कराई है.

सरदार पुलिस थाने में दर्ज शिकायत में एनसीपी युवा अध्यक्ष डापकुपर नोंगरूम ने कहा कि देवधर ने 16 फरवरी को पिन्टर गांव में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि कुछ चर्च अपने स्कूल में छात्रों के प्रवेश के लिए शर्तें लगाई हैं – जिसमें चर्च में अनिवार्य रूप से आना, ईसाई धर्म अपनाना और बाइबिल का परीक्षा पास करना शामिल है.

शिकायत के अनुसार देवधर ने यह भी कहा कि यदि छात्र बाइबिल विषय में फेल हो जाते हैं तो गणित और विज्ञान में पास होने के बावजूद उन्हें फेल घोषित कर दिया जाता है.

शिकायत में कहा गया है कि देवधर ने यह दावा किया कि सरकार चर्च का पक्ष लेती है और पारंपरिक स्वदेशी आस्था (नियाम तिनराई) के अनुयायियों को धर्म परिवर्तन किए बिना अस्पताल, सड़क, स्कूल और बिजली जैसी सुविधाओं से वंचित किया जाता है.

नोंगरूम ने इन बयानों को अस्पष्ट और जानबूझकर विवाद पैदा करने वाला बताते हुए कहा कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और मेघालय में लंबे समय से कायम अंतर-धार्मिक सौहार्द को खतरा पैदा हुआ है.