नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़रायल के ईरान पर हमलों से भड़का संघर्ष और तेज़ होता जा रहा है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका में ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को निर्धारित चार से पांच सप्ताह की समयसीमा से भी ‘काफी अधिक समय तक’ जारी रखने की क्षमता है.
अल ज़जीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को ह्वाइट हाउस से बोलते हुए ट्रंप ने इज़रायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरने के अपने प्रशासन के फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका के लिए ‘गंभीर खतरा’ है. साथ ही उन्होंने फिर दावा किया कि पिछले वर्ष जून में अमेरिका द्वारा किए गए हमलों से ‘ईरान के परमाणु कार्यक्रम का पूर्ण विनाश‘ हो गया था.
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम तेजी और नाटकीय ढंग से बढ़ रहा है’ और इससे ‘अमेरिका तथा विदेशों में तैनात हमारी सेनाओं के लिए स्पष्ट और बड़ा खतरा’ पैदा हो रहा है.
उन्होंने कहा, ‘उस शासन के पास पहले से ही ऐसी मिसाइलें थीं जो यूरोप और हमारे स्थानीय व विदेशी ठिकानों तक पहुंच सकती थीं, और जल्द ही उनके पास ऐसी मिसाइलें होतीं जो हमारे खूबसूरत अमेरिका तक पहुंच सकती थीं.’ यह दावा उनके प्रशासन द्वारा बार-बार किया गया है, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इसके समर्थन में कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है.
ट्रंप के ये बयान महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि वे इस दावे से कुछ हटते दिखे कि ईरान वर्तमान में एक खतरा था. इसके बजाय उन्होंने ईरानी सरकार को संभावित रूप से दीर्घकालिक खतरा बताया.
ट्रंप ने कहा, ‘तेजी से बढ़ते इस मिसाइल कार्यक्रम का उद्देश्य उनके परमाणु हथियार विकास को ढाल प्रदान करना था और किसी के लिए भी उन्हें – जो हमारे द्वारा अत्यंत प्रतिबंधित हैं – बनाने से रोकना बेहद कठिन बनाना था.’
उन्होंने कहा, ‘लंबी दूरी की मिसाइलों और परमाणु हथियारों से लैस ईरानी शासन न केवल मध्य पूर्व, बल्कि अमेरिकी जनता के लिए भी बहुत बड़ा खतरा होगा.’
उन्होंने जोड़ा, ‘हमारा देश स्वयं खतरे में होता – और लगभग हो ही चुका था.’
अमेरिकी घरेलू कानून और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी विदेशी देश पर हमला केवल तत्काल खतरे की स्थिति में किया जा सकता है. अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध की घोषणा का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, जबकि राष्ट्रपति आसन्न खतरे की स्थिति में एकतरफा कार्रवाई कर सकते हैं.
अमेरिका और इज़रायल द्वारा हमले शुरू करने के बाद ट्रंप दो वीडियो संदेश जारी कर चुके हैं. सोमवार को जारी एक रिकॉर्डेड संदेश में उन्होंने कहा कि ईरान ने ‘सभ्यता के खिलाफ युद्ध’ छेड़ा था.
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगे और अमेरिकी सैनिकों की मौत हो सकती है. पेंटागन ने रविवार को मध्य पूर्व में मारे गए तीन अमेरिकी सैनिकों की पुष्टि की थी.
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या के बाद से अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हमले जारी रखे हैं. तेहरान और उसके सहयोगियों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़रायल के खिलाफ पलटवार किया है और पड़ोसी खाड़ी देशों के कुछ ठिकानों को निशाना बनाया है. बताया जा रहा है कि केवल ईरान में ही 555 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
अल ज़जीरा के अनुसार, अब तक लेबनान में 13, इज़रायल में 10, संयुक्त अरब अमीरात में तीन और इराक में दो लोगों की मौत की सूचना है. वहीं ओमान, बहरीन और कुवैत ने ईरानी जवाबी कार्रवाई के बीच एक-एक मौत की सूचना दी है.
इस संघर्ष के भारतीयों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं.
