संभल की जामा मस्जिद किसी पूर्व संरचना को ध्वस्त कर बनी, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं: एएसआई

संभल के एक वकील द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने बताया कि उसके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि संभल की जामा मस्जिद किसी पूर्व संरचना को तोड़कर या ख़ाली जमीन पर बनाई गई थी. एएसआई ने यह भी कहा कि उसके पास मस्जिद निर्माण के समय ज़मीन के मालिक या मालिकाना हक़ से जुड़े दस्तावेज़ भी उपलब्ध नहीं हैं.

जामा मस्जिद, संभल (फोटो: श्रुति शर्मा/द वायर हिंदी)

नई दिल्ली: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को बताया कि उसके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह पता चल सके कि संभल में जामा मस्जिद का निर्माण किसी पूर्व संरचना को ध्वस्त करके किया गया था या किसी खाली जमीन पर इसे बनाया गया था.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, एएसआई ने यह भी कहा कि उसके पास संभल जामा मस्जिद के निर्माण के समय (जो कि 1526 में हुआ माना जाता है) ज़मीन के मालिक की पहचान वाले दस्तावेज भी नहीं हैं.

उल्लेखनीय है कि यह जानकारी संभल के वकील सत्य प्रकाश यादव द्वारा दायर सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जवाब में सामने आई है. उन्होंने मुगल काल की इस मस्जिद के निर्माण संबंधी जानकारी मांगी थी, जिसमें यह भी पूछा गया था कि क्या इस मस्जिद को किसी पूर्व खंडहर की जगह बनाया गया था. इसके अलावा सत्य प्रकाश यादव ने ज़मीन के मालिक का नाम और मालिकाना हक़ देने वाले दस्तावेज संबंधी जानकारी भी मांगी थी.

इन सवालों पर एएसआई ने अपने लिखित जवाब में कहा है कि इस कार्यालय में ‘ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.’

इस संबंध में आवेदक द्वारा यह भी पूछा गया था कि जब इस स्थल को सरकारी संरक्षण में लिया गया था, तब वहां किस प्रकार की संरचनाएं मौजूद थीं, बाद में क्या निर्माण हुए और मस्जिद से जुड़े पिछले विवादों का क्या रिकॉर्ड है.

एएसआई ने इस पर जवाब दिया कि उसके पास ऐसी कोई जानकारी दर्ज नहीं है.

हालांकि, पहली अपील की कार्यवाही के दौरान एएसआई ने 2018 की एक घटना की ओर इशारा करते हुए कहा कि केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारक के संरक्षित क्षेत्र में किसी नए निर्माण करने की इजाजत नहीं है. साथ ही बताया कि उस साल जामा मस्जिद साइट पर एक गैर-कानूनी स्टील रेलिंग लगाई जा रही थी और विभाग ने इस काम को रोकने के आदेश जारी किए थे.

मस्जिद का निर्माण 1526 में हुआ था: एएसआई

मस्जिद के निर्माण के समय ​​के सवाल पर एएसआई ने कहा कि उसके अभिलेखों से पता चलता है कि इसका निर्माण 1526 में हुआ था. एएसआई ने सहायक सामग्री का भी उल्लेख किया.

एएसआई के अनुसार, 1920 में राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से इसे एएसआई के संरक्षण में लिए जाने के बाद से इसे इसी नाम से संरक्षित किया गया है.

एक अन्य प्रश्न के जवाब में एएसआई ने कहा कि यह संरचना ‘वर्तमान में… एक मस्जिद के रूप में मौजूद है.’ सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि अनुपलब्धता के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी देने से गलत तरीके से इनकार किया गया था.

इस पर एएसआई की ओर से दलील दी गई कि उसने रिकॉर्ड में उपलब्ध सभी जानकारी प्रदान कर दी है और उसे ऐसी जानकारी जुटाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जो उसके पास मौजूद ही नहीं है.

इस बात का समर्थन करते हुए आयोग ने कहा कि आरटीआई कानून सार्वजनिक प्राधिकरणों को केवल मौजूदा रिकॉर्ड प्रकट करने के लिए बाध्य करता है और उन्हें नई जानकारी जुटाने के लिए बाध्य नहीं करता है.

आयोग ने न्यायिक मिसालों का हवाला देते हुए कहा कि एएसआई के पास अनुपलब्ध जानकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश नहीं दिया जा सकता है.

संभल जामा मस्जिद विवाद

गौरतलब है कि बीते कुछ समय से संभल की जामा मस्जिद अपने इतिहास को लेकर कानूनी विवाद के केंद्र में है, क्योंकि एक याचिका में दावा किया गया है कि इसका निर्माण एक प्राचीन हिंदू मंदिर के ऊपर किया गया था.

मालूम हो कि 24 नवंबर, 2024 को संभल में हुई हिंसा के बाद यह मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था. ये हिंसा तब हुई थी, जब अदालत द्वारा आदेशित एएसआई सर्वेक्षण का विरोध किया जा रहा था. इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई और कुछ पुलिसकर्मियों सहित कई अन्य लोग घायल हो गए थे.

आगे हस्तक्षेप करने का कोई आधार न पाते हुए आयोग ने अपील खारिज कर दी और कहा कि एएसआई के जवाब – जिसमें यह बयान भी शामिल है कि मस्जिद पूर्व संरचना को ध्वस्त करके बनी या खाली जमीन पर, इस बारे में उसके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है – कानून के अनुरूप थे.

इस मामले पर अपीलकर्ता यादव ने बताया कि उन्होंने 2021 में एएसआई से जामा मस्जिद के बारे में जानकारी मांगने के लिए आरटीआई आवेदन दायर किया था. सीआईसी द्वारा अंतिम सुनवाई 23 फरवरी, 2026 को की गई थी. और अब वे एएसआई से आवश्यकतानुसार सभी उपलब्ध जानकारी उपलब्ध कराने की प्रतीक्षा कर रहे हैं.