नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश पुलिस ने बीते शनिवार (28 फरवरी) को मथुरा और वृंदावन शहरों में होली के दौरान उमड़ी भीड़ और अव्यवस्था को दर्शाने वाला वीडियो साझा करने के आरोप में एक पत्रकार और आठ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
पुलिस का दावा है कि यह वीडियो पुराना है, लेकिन उसे हाल का बताकर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे ‘डर का माहौल’ बना है.
इस संबंध में गौरव तोमर की शिकायत के आधार पर 28 फरवरी को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के बरसाना पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है. द वायर ने एफआईआर की एक प्रति देखी है.
उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी को शाम 6:22 बजे, पत्रकार पीयूष राय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा था, ‘मुझे भीड़-भाड़ वाली जगहें पसंद नहीं हैं और मैं दूसरों को भी वहां जाने से मना करता हूं. यही मेरा जान बचाने का तरीका है.’
I am not a fan of crowded places and I try to scare the shit out of other too. That’s my idea of saving lives. pic.twitter.com/ue8cP0jqqA
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) February 27, 2026
इस वीडियो में मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध ब्रज मंदिरों में होली के दौरान कथित तौर पर भारी भीड़ दिखाई दे रही है, जहां लोग बड़ी मुश्किल से इधर-उधर, जैसे-तैसे एक-दूसरे के सहारे इस पार से उस पार निकलते नज़र आ रहे हैं.
हालांकि, पीयूष राय ने एक्स पर पोस्ट की गई इस वीडियो में कहीं भी यह दावा नहीं किया कि यह वर्तमान में चल रहे होली उत्सव का है.
इस संबंध में द वायर से बात करते हुए पीयूष राय ने कहा, ‘वीडियो में भगदड़ जैसी स्थिति दिखाई दे रही थी और मुझे पता है कि यह पुराना वीडियो है क्योंकि मैंने इसे पहले भी साझा किया था. मेरा मकसद सिर्फ लोगों को यह बताना था कि वहां बहुत भीड़ होती है.’
राय ने यह भी बताया कि जांच अधिकारी ने अभी तक उनसे संपर्क नहीं किया है और उन्हें मथुरा के एक स्थानीय पत्रकार से एफआईआर की एक प्रति मिली है.
द वायर ने मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार से भी संपर्क किया है. जवाब मिलते ही इस खबर को अपडेट किया जाएगा.
बता दें कि मथुरा पुलिस ने इस वीडियो के पोस्ट किए जाने के एक घंटे के भीतर ही पीयूष के पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा कि वीडियो पुराना है और इस साल अब तक ऐसी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है.
पुलिस ने यह भी कहा कि अगर ऐसी कोई घटना सामने आती है तो उसकी जांच की जाएगी.
पुलिस ने आगे कहा, ‘मथुरा पुलिस जनता से आग्रह करती है कि वे पिछले साल के वीडियो या तस्वीरों को फैलाकर डर का माहौल न बनाएं.’
पुलिस ने अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.
वहीं, गौरव तोमर ने 28 फरवरी को रात 8:47 बजे शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी यूजर्स ने 26 और 27 फरवरी को वाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर यह वीडियो साझा किया था.
उन्होंने दावा किया कि वीडियो न केवल पुराना है, बल्कि मथुरा का नहीं, बल्कि किसी अन्य स्थान का है.
उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो के प्रसार से अफवाहें फैली हैं, सामाजिक असामंजस्य पैदा हुआ है और महिलाओं में भय का माहौल बना है.
इस मामले को लेकर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 196(2) (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) और 353(2) (झूठी सूचना का प्रसार) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 और 67ए के तहत एफआईआर दर्ज की है.
एफआईआर में पीयूष के अलावा नामजद अन्य लोगों में कुछ सोशल मीडिया यूजर्स और कुछ इंस्टाग्राम पेज भी शामिल हैं.
इस संबंध में आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
हालांकि, एफआईआर पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी है. स्वतंत्र पत्रकार सचिन गुप्ता ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि वीडियो भले ही पुराना हो, लेकिन ‘हर साल हालात वही रहते हैं’.
मथुरा पुलिस ने इस ट्वीट के लिए पत्रकार पीयूष राय (@Benarasiyaa) पर FIR दर्ज की है !!
ये अधिकारी खुद के परिवारों के लिए ग्रीन कॉरिडोर बना देते हैं, लेकिन आमजन से पूछिए कि बरसाना/वृंदावन में भीड़ के वाकई क्या हालात होते हैं? हो सकता है कि Video पुरानी हो, पर साल–दर–साल हालात ऐसे… https://t.co/hrJqAt7AyY
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) March 2, 2026
वहीं, न्यूज़24 के शाहनवाज़ ने पीयूष राय का बचाव करते हुए कहा कि वे एक ‘जिम्मेदार पत्रकार’ हैं और उनकी सभी खबरें और ट्वीट सच हैं. उन्होंने आगे कहा कि एफआईआर बेहद खेदजनक है.
पीयूष राय जी एक जिम्मेदार पत्रकार हैं, इनकी सारी खबरें और ट्वीट सच्चे होते हैं। एफआईआर बेहद अफसोसजनक है,
— Shahnawaz (News 24) (@Shahnawazreport) March 2, 2026
इस मामले पर पत्रकार रोहिणी सिंह ने भी पीयूष राय के साथ एकजुटता दिखाते हुए मथुरा पुलिस से पूछा, ‘क्या उत्तर प्रदेश में सारे अपराध खत्म हो गए हैं कि आपको ये सब करना पड़ रहा है. पत्रकारों को डराना-धमकाना बंद करें और इसके बजाय यह सुनिश्चित करें कि भीड़ के कारण कोई अप्रिय घटना न हो.’
Has all crime ceased in UP that you are resorting to all this @mathurapolice? Stop intimidating journalists and instead ensure no untoward incidents happen as a result of crowds. In solidarity with @Benarasiyaa https://t.co/EpNp93m6Kl
— Rohini Singh (@rohini_sgh) March 2, 2026
उधर, मथुरा पुलिस ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि वीडियो के विश्लेषण से पता चला है कि साझा किए गए वीडियो पुराने हैं. भ्रम फैलाने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के प्रयास किए गए हैं. इस संबंध में ब्रज के स्थानीय निवासियों ने भी स्थिति स्पष्ट की है और आपत्ति जताई है, और इसका संज्ञान लेते हुए, संबंधित धाराओं के तहत ऐसे सभी हैंडलों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं.
सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ वीडियो संज्ञान में आये हैं जिनमें कुछ पुराने वीडियोज को दिखाते हुए बृज की पावन होली को बदनाम करने का प्रयास किया गया है । वीडियोज के विश्लेषण से यह स्पस्ट है कि वीडियो पुराने हैं परन्तु भ्रम फैलाने तथा सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए कुंचित प्रयास किया… pic.twitter.com/x2dbrdBRGF
— MATHURA POLICE (@mathurapolice) February 28, 2026
गौरतलब है कि 2025 में भारत विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में 180 देशों में से 151वें स्थान पर था. नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले 11 वर्षों में पत्रकारों के खिलाफ पुलिस मामलों और गिरफ्तारियों की बढ़ती संख्या के साथ प्रेस की स्वतंत्रता में काफी गिरावट आई है.
इसके अलावा सरकार ने विभिन्न यूट्यूब समाचार चैनलों और सोशल मीडिया पेजों तक पहुंच को अवरुद्ध करने के लिए अपने कानूनों का भी दुरुपयोग किया है.
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