नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार (3 मार्च) को ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा कि भारत को ‘नैतिक रूप से स्पष्ट’ होना चाहिए.
गांधी ने कहा कि मोदी को इस पर ‘खुलकर बोलना चाहिए’ कि क्या वे ‘विश्व व्यवस्था को परिभाषित करने के तरीके के रूप में किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या का समर्थन करते हैं,’ और उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चुप्पी ‘दुनिया में भारत की साख को कम करती है.’
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में गांधी ने कहा, ‘भारत को नैतिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए. हमें अंतरराष्ट्रीय कानून और मानव जीवन की रक्षा में स्पष्ट रूप से बोलने का साहस होना चाहिए. हमारी विदेश नीति संप्रभुता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है – और यह हमेशा एक जैसा रहना चाहिए.’
Escalating hostilities between the United States, Israel and Iran are pushing a fragile region toward wider conflict. Crores of people, including nearly a crore Indians, face uncertainty.
While security concerns are real, attacks that violate sovereignty will only worsen the…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 3, 2026
उन्होंने आगे कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी को बोलना चाहिए. क्या वे विश्व व्यवस्था को परिभाषित करने के तरीके के रूप में किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या का समर्थन करते हैं? इस समय की चुप्पी दुनिया में भारत की साख को कम करती है.’
गांधी का यह बयान उस समय आया जब कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक लेख में खामेनेई की हत्या पर भारत की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं.
पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद बढ़ती शत्रुता के बीच मोदी ने अब तक खामेनेई की हत्या पर कोई बयान जारी नहीं किया है.
प्रधानमंत्री ने 2 मार्च को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफोन पर बातचीत कर सऊदी क्षेत्र पर हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा की थी. इससे पहले उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात और इज़राइल के नेताओं से भी बातचीत की थी, जिसमें उन्होंने अमीराती क्षेत्र पर हमलों की निंदा की और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत में दुश्मनी जल्द समाप्त करने का आग्रह किया था.
इन बयानों की तरह ही भारत की सार्वजनिक टिप्पणियों में संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है, साथ ही संवाद और तनाव कम करने की अपील की गई है.
गांधी ने अपने बयान में कहा कि क्षेत्र में बढ़ता तनाव ‘एक नाजुक क्षेत्र को व्यापक संघर्ष की ओर धकेल रहा है’, जिससे वहां रहने वाले बड़ी संख्या में भारतीयों के सामने अनिश्चितता पैदा हो गई है.
उन्होंने कहा, ‘अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ती शत्रुता एक नाजुक क्षेत्र को व्यापक संघर्ष की ओर धकेल रही है. करोड़ों लोग, जिनमें लगभग एक करोड़ भारतीय शामिल हैं, अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं.’
उन्होंने कहा, ‘हालांकि सुरक्षा चिंताएं वास्तविक हैं, लेकिन संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले हमले संकट को और गहरा करेंगे. ईरान पर एकतरफा हमलों के साथ-साथ ईरान द्वारा अन्य मध्य-पूर्वी देशों पर किए गए हमलों की भी निंदा होनी चाहिए. हिंसा से हिंसा जन्म लेती है – संवाद और संयम ही शांति का एकमात्र मार्ग हैं.’
इससे पहले सोमवार को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा था कि भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के समाधान का समर्थन करता है और पश्चिम एशिया में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के साथ काम करता रहेगा.
