उत्तराखंड: चारधाम हाईवे परियोजनाओं के विरोध में मुरली मनोहर जोशी, करण सिंह समेत कई लोग

वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी, कांग्रेस नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सदर-ए-रियासत करण सिंह, पूर्व सांसद रेवती रमन सिंह और संघ परिवार के विचारक केएन गोविंदाचार्य सहित अन्य लोगों ने एक पत्र के माध्यम से केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि चारधाम राजमार्ग के अंतर्गत उत्तरकाशी में दो परियोजनाओं को दी गई वन मंज़ूरी रद्द की जाए और धराली में आई बाढ़ जैसी आपदाओं के मद्देनज़र ऐसे सभी कार्यों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए.

चार धाम राजमार्ग के निर्माण हेतु पर्वतों को विस्फोट करके समतल किया जा रहा है. (फोटो: पीटीआई/फाइल)

नई दिल्ली: पूर्व मंत्रियों मुरली मनोहर जोशी और करण सिंह समेत कई लोगों ने सरकार से आग्रह किया है कि चारधाम राजमार्ग के अंतर्गत उत्तरकाशी में दो परियोजनाओं के लिए दी गई वन मंजूरी रद्द की जाए और धराली में आई बाढ़ जैसी आपदाओं के मद्देनजर यहां के सभी कार्यों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए.

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी उत्तराखंड के भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (बीईएसजेड) में ‘अपरिवर्तनीय पारिस्थितिक क्षति’ की चेतावनी देते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी, कांग्रेस नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सदर-ए-रियासत सिंह, पूर्व सांसद रेवती रमन सिंह और संघ परिवार के विचारक केएन गोविंदाचार्य सहित अन्य लोगों ने मांग की है कि नेतला बाईपास को दी गई मंजूरी और झाला गांव के पास पेड़ों की कटाई को रद्द किया जाए.

इसके अलावा उन्होंने बीईएसजेड में चल रहे और प्रस्तावित सभी कार्यों के लिए आपदा के बाद की वास्तविकताओं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए एक नए, व्यापक पर्यावरणीय और आपदा-जोखिम मूल्यांकन की मांग की है.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तराखंड वन विभाग के सचिव और सीमा सड़क संगठन के निदेशक को लिखे उनके पत्र का हवाला देते हुए यह जानकारी साझा की है.

उनका यह पत्र पर्यावरणविदों और कार्यकर्ताओं द्वारा चारधाम परियोजना के कार्यान्वयन की बार-बार आलोचना करने और इसे स्थानीय पर्यावरण और लोगों के लिए खतरनाक बताने के साथ-साथ अगस्त 2025 में बीईएसजेड के भीतर आई घातक धराली बाढ़ की पृष्ठभूमि में आया है. इस आपदा में मलबा पहाड़ी नाले से बहकर भागीरथी नदी में जा गिरा था, जिससे धराली गांव का एक हिस्सा नष्ट हो गया था.

चारधाम परियोजना के एक हिस्से में बीईएसजेड (चारधाम संरक्षित क्षेत्र) में हिना और टेकला गांवों के बीच प्रस्तावित सड़क शामिल है, जो नेतला ढलान को बाईपास करेगी.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त एक उच्चस्तरीय समिति ने 2020 में इस खंड के निर्माण को न करने की सलाह दी थी, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने पिछले साल ही धारली त्रासदी से कुछ सप्ताह पहले इसे सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी थी.

एक अन्य घटक, जिस पर पूर्व मंत्रियों और अन्य लोगों ने आपत्ति जताई है, वह बीईएसजेड में झाला और भैरोंघाटी गांवों के बीच लगभग 42 हेक्टेयर वन क्षेत्र की प्रस्तावित कटाई है, जो सड़क चौड़ीकरण परियोजना का हिस्सा है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड सरकार ने दिसंबर में इस परियोजना को मंजूरी दे दी थी, जिससे स्थानीय विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे.

पत्र में इन मंजूरियों को ‘अवैध, अनुचित और बाध्यकारी संवैधानिक, वैधानिक और न्यायिक आदेशों का उल्लंघन’ बताते हुए यह भी कहा गया है कि ये ‘एहतियाती सिद्धांत’ का उल्लंघन करती हैं, जिसके अनुसार ‘जहां गंभीर या अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय क्षति की उचित संभावना हो, वहां पूर्ण वैज्ञानिक निश्चितता का अभाव विनाशकारी गतिविधियों को जारी रखने का आधार नहीं हो सकता.’

अखबार ने पत्र के हवाले से कहा, ‘धराली के बाद के संदर्भ में भागीरथी घाटी में सड़क चौड़ीकरण, पहाड़ी कटाई और वनों की कटाई का जारी रहना सीधे तौर पर इस सिद्धांत का उल्लंघन है. नेतला और झाला-जंगला दोनों की मंजूरियां आपदा के खतरे के अपरिवर्तित रहने के बावजूद जारी हैं, जो पूरी तरह गलत है.’

यह पहली बार नहीं है जब जोशी और सिंह ने चारधाम परियोजना से संबंधित विकास कार्यों का विरोध किया है.