नई दिल्ली: दिल्ली के उत्तम नगर इलाके की जेजे कॉलोनी में होली के दिन (4 मार्च) पानी से भरे एक गुब्बारे को लेकर दो परिवारों के बीच हुए विवाद में 26 वर्षीय युवक तरुण कुमार की मौत की घटना सामने आई है. आरोप उनके पड़ोस में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार पर लगा और इसके बाद से मामले को सांप्रदायिक रंग दिया जाने लगा. घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया. आरोपियों के यहां ‘बुलडोज़र’ कार्रवाई और ‘एनकाउंटर’ की मांग की जाने लगी.
अंततः रविवार (8 मार्च) को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने आरोपी परिवार के घर के कुछ हिस्से को ‘अतिक्रमण’ बताते हुए तोड़ दिया. उधर, आरोपी परिवार का कहना है कि हत्या उन्होंने नहीं की है.

तरुण के पिता मेमराज ने द वायर हिंदी को बताया, ‘यह घटना होली के दिन हुई, जब हमारे परिवार की एक 6-7 साल की एक बच्ची ने अपने घर की बालकनी से पानी भरा गुब्बारा नीचे फेंका, जिसके कुछ छींटे वहां से गुजर रही एक मुस्लिम महिला पर पड़ गए.’
तरुण के पिता मेमराज कहते हैं, ‘वह महिला बहुत गुस्सा हो गई और हल्ला मचाकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया. हमने महिला से माफी मांगी और कहा कि बच्ची से गलती हो गई है, हम उसे डांट देंगे. लेकिन वह महिला शांत नहीं हुई और अपने साथ अपने परिवार के सदस्यों और कई अन्य लोगों को लेकर आई, क़रीब 50-60 लोगों को. उन लोगों ने मेरे परिवार के साथ मारपीट शुरू कर दी. इसके बाद हम लोग घर के अंदर चले गए और अंदर से कुंडी लगा ली.’
मेमराज के अनुसार, उस वक्त उनका बेटा तरुण घर से बाहर गया हुआ था. जब तरुण रात को घर आया, उस वक्त हमलावर वहीं पास में ही बैठे हुए थे. मेमराज ने बताया, ‘जैसे ही तरुण बुलेट से उतरकर अपने घर की ओर बढ़ा, वैसे ही उन लोगों ने लठ्ठों-डंडों और लोहे की पाइप से उस पर वार किया और उसके सिर पर मारा.’
मेमराज कहते हैं कि जैसे ही उन्हें इसकी जानकारी मिली, वे लोग घायल तरुण के पास पहुंचे और उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन वह उठ नहीं सका. इसके बाद तरुण को अस्पताल ले जाया गया, जहां अगले दिन (5 मार्च को) उसकी मौत हो गई.

तरुण और आरोपी परिवार के पड़ोस में रहने वाले कई लोगों ने द वायर हिंदी को बताया कि दोनों परिवारों के बीच आपसी रंजिश थी, वे पहले भी कई मौकों पर एक दूसरे से लड़ चुके थे. हालांकि, मेमराज इन दावों से इनकार करते हैं.
वह कहते हैं, ‘हमारी पहले कभी भी लड़ाई नहीं हुई थी, पता नहीं उन्होंने क्या सोच रखा था मेरे बच्चे के बारे में.’ मेमराज चाहते हैं कि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले ताकि उनके बेटे के साथ इंसाफ़ हो.
मृतक तरुण द्वारका स्थित एक संस्थान में डिज़ाइनर का कोर्स कर रहे थे. मेमराज कहते हैं, ‘तरुण कहता था कि पापा मैं साल भर में पैसे कमाने लगूंगा, फिर आपका सहारा बनूंगा.’

इस मामले में अब तक 3 महिलाओं समेत कुल 14 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि 2 नाबालिगों को हिरासत में लिया गया है.
आरोपी के परिवार का दावा: ‘हत्या मेरे परिवार वालों ने नहीं की’
द वायर हिंदी से बातचीत में आरोपी परिवार की सदस्य बीस वर्षीय शाहीन ने दावा किया कि हत्या अनजाने में तरुण के परिवार ने ही की है.
जिन महिला पर गुब्बारे और पानी पड़ने का आरोप है वह शाहीन की बुआ हैं. शाहीन बताती हैं, ‘मेरी बुआ सेहरी का सामान लेने गई थीं, उस दौरान भी उन पर पानी डाला गया था, लेकिन तब उन्होंने कुछ भी नहीं कहा. लेकिन जब बुआ सामान ले के वापस आ रहीं थीं, इस दौरान दुबारा उनके ऊपर पानी डाला गया, गुब्बारे में गंदा पानी भर के उनके ऊपर डाला गया. और पानी डालने वाला 20 साल का एक लड़का था. यह झूठ कहा जा रहा है कि पानी डालने वाली को 5-6 या 11 साल की बच्ची थी.’
‘रही बात होली के रंगों की तो हमे उससे कोई दिक्कत नहीं है… हमारा तो काम ही रंगों का है. मेरे पापा, मेरे भाई सभी होली खेलते हैं.’
शाहीन कहती हैं, ‘जब मेरी बुआ ने गंदा पानी डालने का विरोध किया तब उस घर से 4 लोग बाहर आए, उन सभी ने शराब पी रखी थी, और वे मेरी बुआ के साथ बदतमीज़ी करने लगे. उन्होंने मेरी बुआ को गलत तरह से छुआ और उनको गंदे-गंदे शब्द कहे.’
उन्होंने बताया कि उनका भाई जब ये शोर-शराबा सुनकर बाहर निकला तब तरुण के परिवार वालों ने उसके साथ हाथापाई शुरू कर दी.
शाहीन बताती हैं, ‘इसके बाद दोनों घरों के बड़े इकट्ठा हुए और समझौते की बात करने लगे. इसी बीच तरुण 25-30 लड़कों को अपने साथ लेकर आया, जिन्होंने शराब पी हुई थी और जिनके हाथों में लोहे की रॉड, हॉकी स्टिक और बैट था. उन लोगों ने हथियारों से मेरे घर वालों के सिरों पर वार किया.’
पुलिस के अनुसार, मारपीट में कुल आठ लोग घायल हुए थे, एक पक्ष से तीन और दूसरे पक्ष से पांच.
वह आरोप लगातीं हैं, ‘हत्या मेरे परिवार वालों ने नहीं की. तरुण के भाई अरुण ने उसे मेरे परिवार का सदस्य समझकर नशे की हालत में पीछे से उसके सिर पर वार किया, जिससे वह वहीं गिर गया.’
शाहीन का यह भी कहना है कि उनके परिवार ने ही कॉल कर पुलिस को बुलाया था. वह कहती हैं, ‘हमने 7-8 बार कॉल किया तब पुलिस आई. और हमारे ही घर वालों को उठाकर ले गई. उनमें से (तरुण का परिवार) किसी को कुछ नहीं बोला.’
शाहीन ने बताया कि अब उनके घर में सिर्फ़ औरतें बची हैं. ‘घर के सभी मर्दों को पुलिस ने जेल में बंद कर दिया है. जो लोग मौके पर मौजूद नहीं थे उन्हें भी बिना किसी कसूर के जेल में डाल दिया.’
‘मेरे पापा, मेरे चाचा, मेरे भाई, मेरे 80 साल के दादा जो दवाइयों पर हैं… उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया.’
‘दोनों परिवारों के बीच पहले भी झगड़े होते रहे हैं’
इस बीच द्वारका के डीसीपी कुशल पाल सिंह ने बताया कि पुलिस को रात करीब 11 बजे घटना की सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची. वहां पहुंचने पर पता चला कि दो समुदायों के लोगों के बीच झगड़ा हुआ था.
डीसीपी ने बताया कि दोनों गुटों के कुछ लोगों को चोटें आई थीं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमले में शामिल लोगों की पहचान और पुष्टि कर रही है.
कुशल पाल सिंह के अनुसार, दोनों परिवार मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं और एक-दूसरे को करीब 50 सालों से जानते हैं. डीसीपी ने बताया कि वर्ष 2004 से दोनों परिवार इस जगह पर रह रहा है, इससे पहले वे एक झुग्गी में रहते थे और वहां भी पड़ोसी ही थे.
उन्होंने बताया कि ‘जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि पड़ोसियों के बीच पार्किंग और अन्य मुद्दों को लेकर ग़ैर-सांप्रदायिक झगड़े होते हैं, वैसे विवाद इन दोनों परिवारों के बीच पहले भी होते रहे हैं.’
डीसीपी ने बताया कि मामले की जांच जारी है.
इस मामले में शुरुआत में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 110 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया था. तरुण की मौत के बाद एफआईआर में हत्या से संबंधित धारा 103(1) भी जोड़ दी गई. इसके अलावा, परिवार की मांग के बाद अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी धाराएं लगाई गईं.
घटना ने लिया सांप्रदायिक रंग
जेजे कॉलोनी की अधिकांश गलियां भगवा झंडों से पटी हुई हैं. कई जगहों पर पोस्टर भी लगे हैं, जिसमें हस्तसाल कॉलोनी में 18 जनवरी को सकल हिंदू समाज द्वारा आयोजित एक हिंदू सम्मेलन का जिक्र है.
कॉलोनी में हिंदू-मुस्लिम की मिश्रित आबादी रहती है. आसपास के कुछ लोग 4 मार्च को हुई घटना को सांप्रदायिक हिंसा नहीं मान रहे हैं. हालांकि, इसके बाद का घटनाक्रम सांप्रदायिक मोड़ लेता नजर आ रहा है, जहां कुछ दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोग इस पूरे मामले के आधार पर सांप्रदायिक तनाव की नींव रखते नज़र आ रहे हैं.

बताया गया है कि घटना के अगले दिन जय श्री राम के नारे लगाती एक उग्र भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में आरोपी के घर में घुसकर तोड़फोड़ की थी और घर के सामान को सड़क पर फेंक दिया. भीड़ ने उनके घर के सामने खड़े वाहन को आग के हवाले कर दिया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि वह भीड़ किसी हिंदुत्व संगठन के लोगों की थी और वे दूसरे इलाके से आए थे.

आरोपी परिवार की सदस्य शाहीन ने भी आरोप लगाया है कि ‘दो पड़ोसियों की लड़ाई को बजरंग दल वालों ने धर्म की लड़ाई बना दिया है.’
आरोपियों के यहां तोड़फोड़ की घटना के सवाल पर मृतक के चाचा ने द वायर हिंदी से कहा, ‘हम घटना के बाद बहुत आहत थे, हम इस हालत में नहीं थे कि ये सब कर सके. हमें नहीं पता उनके घर में तोड़फोड़ किसने की.’
तरुण की हत्या की वजह सांप्रदायिक होने के सवाल पर मेमराज ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. वह कहते हैं, ‘लोग तो यही कह रहे हैं.’
उन्होंने आगे कहा कि उनके अनुसार यह जाति आधारित हिंसा है. वह कहते हैं, ‘खटिक लोगों (अनुसूचित जाति) को वे यहां नहीं रहने देना चाहते.’

इस बीच, एक दक्षिणपंथी संगठन हिंदू रक्षा दल के सदस्य ललित शर्मा ने उत्तम नगर में आयोजित एक सभा में कहा कि इस बार वे मुसलमानों को ईद नहीं मनाने देंगे, चाहे इसके लिए ख़ून की होली क्यों ना खेलनी पड़े. शर्मा ने कहा, ‘न इस बार ईद मनेगी, न नमाज़ पढ़ने देंगे. चाहे ख़ून की होली क्यों न खेलनी पड़े, इस बार ईद पर होली जरूर खेलेंगे.
उन्होंने कहा, ‘हिंदू रक्षा दल मैदान में आ गया है, इस बार इनका (मुसलमानों) दिमाग ठीक कर देंगे.’
Location: Uttam Nagar, Delhi
“This Eid, we will play Holi of blood.”
An open call to massacre Muslims in Uttam Nagar on Eid.
Lalit Sharma, a member of the Hindu Raksha Dal, said that neither Eid nor namaz would be celebrated this year and talked about playing Holi with blood. pic.twitter.com/XqM70PZCwH
— The Muslim (@TheMuslim786) March 9, 2026
इससे पहले दक्षिणपंथी समर्थकों की एक भीड़ द्वारा रविवार को उत्तम नगर मेट्रो स्टेशन के समीप तरुण के लिए न्याय की मांग करते हुए एक विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमे ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो #लों ‘को जैसे नारे लग रहे थे.
4 मार्च को हुई इस घटना के बाद इलाका पुलिस छावनी में तब्दील है. कॉलोनी में आने-जाने और अंदर के अधिकांश रास्तों को पुलिस बैरिकेडिंग से बंद कर दिया गया है. क्षेत्र की लगभग सभी दुकानें बंद हैं.

कॉलोनी की हिंदू आबादी आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलाने की मांग कर रही थी. वहीं, उनमें से कुछ लोग इलाके से पूरी मुस्लिम आबादी को हटाने की मांग भी कर रहे हैं.
मुख्य आरोपी के घर पर बुलडोजर की कार्रवाई
तरुण कुमार की हत्या के चार दिन बाद रविवार (8 मार्च) को एमसीडी अधिकारियों ने मुख्य आरोपी के घर के कुछ हिस्सों को ढहा दिया गया.
VIDEO | Delhi: MCD demolishes the house of the main accused in the Uttam Nagar holi clash that claimed the life of 26 year old Tarun Kumar.
(Full video available on https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/3PcJRrnbBp
— Press Trust of India (@PTI_News) March 8, 2026
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस सूत्रों ने बताया कि तीन मंजिला मकान के ‘अतिक्रमित’ हिस्से और आसपास की कुछ अन्य कथित अवैध संरचनाओं को भी ध्वस्त किया गया है.
एमसीडी के एक अधिकारी ने कहा, ‘ध्वस्तीकरण की कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि यह ढांचा नाले पर अतिक्रमण था. मानसून से पहले नाले की सफाई के लिए इसे हटाना जरूरी था.’
जब यह पूछा गया कि क्या ऐसी कार्रवाई से पहले निवासियों को नोटिस देना जरूरी होता है, तब अधिकारी ने कहा, ‘अगर निर्माण अनधिकृत है तब तोड़फोड़ से पहले नोटिस दिया जाता है, लेकिन अगर मामला अतिक्रमण का हो तब इसकी आवश्यकता नहीं होती.’
यह कार्रवाई दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के उस बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस मामले में सख़्त और उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी अमानवीय घटना करने का दुस्साहस न कर सके.
ज्ञात हो कि नवंबर 2024 में बुलडोजर कि कार्रवाइयों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कथित ‘बुलडोजर जस्टिस’ के ख़िलाफ़ सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि ‘किसी भी सभ्य न्याय व्यवस्था में बुलडोज़र के जरिये न्याय नहीं किया जाता है. क़ानून के शासन के तहत यह पूरी तरह अस्वीकार्य है.’
कोर्ट ने निर्देश दिया था कि किसी घर या इमारत को गिराने से पहले छह प्रक्रियाओं को पूरा करना है, जिसमें सही से सर्वेक्षण करना, लिखित नोटिस देना और आपत्तियों पर विचार किया जाना आदि शामिल है.
उत्तम नगर में हुई इस ‘बुलडोजर कार्रवाई’ पर वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने द वायर से कहा, ‘बुलडोज़र की यह कार्रवाई पूरी तरह अवैध है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशानिर्देश मौजूद हैं, लेकिन उनका पालन नहीं किया जा रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अब तक उसके उल्लंघन के लिए किसी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई नहीं की है.’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की नेता बृंदा करात साल 2022 में दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में सांप्रदायिक तनाव की एक घटना के बाद हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं. उत्तम नगर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर आरोपियों के घर में हुई तोड़फोड़ को लेकर वे कहती हैं, ‘आप अतिक्रमण के नाम पर बिना किसी नोटिस के सजा देना चाह रहे हैं. आप पुलिस हैं, जज हैं और सजा देने वाली एजेंसी भी बन गए हैं! आप पूरी तरह भाजपा के एजेंडा को आगे लेकर जा रहे हैं न कि इस देश के कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को.’
वहीं दूसरी ओर, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) इंद्रप्रस्थ प्रांत ने दिल्ली सरकार द्वारा इस मामले में शुरू की गई कार्यवाही का स्वागत किया है.
विहिप ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, ‘आरोपियों के अवैध निर्माणों पर पीडब्ल्यूडी एवं एमसीडी द्वारा बुलडोजर कार्यवाही प्रारंभ किया जाना यह स्पष्ट संदेश देता है कि दिल्ली में अपराध और हिंसा को किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जाएगा. इस प्रकार की निर्णायक कार्यवाही से भविष्य में अपराधियों और असामाजिक तत्वों के मन में कानून का भय स्थापित होगा.’
विहिप ने यह भी मांग की है कि इस जघन्य अपराध में शामिल आरोपियों को मिलने वाले सभी प्रकार के सरकारी अनुदान और सुविधाओं को तत्काल समाप्त करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जानी चाहिए, ताकि अपराधियों को किसी भी प्रकार का संरक्षण न मिले.
