पश्चिम एशिया संघर्ष: गैस संकट पर सरकार बोली- पर्याप्त एलपीजी भंडार, संसद में विपक्ष का प्रदर्शन

देश में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच गुरुवार को संसद में जारी बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान ज़ोरदार हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर इस मुद्दे पर ग़लत जानकारी देने का आरोप लगाया और इस पर संसद के भीतर विस्तृत चर्चा की मांग की. हालांकि, सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त भंडार हैं.

संसद में प्रदर्शन की तस्वीर. (फोटो साभार: सोशल मीडिया/ इंस्टाग्राम/Rahul Gandhi)

नई दिल्ली: पश्चिम एशियाई में जारी संघर्ष के बीच दुनियाभर में गैस और तेल आपूर्ति का संकट देखने को मिल रहा है. भारत में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता का दौर जारी है, जिसका सबसे बड़ा कारण देश में एलपीजी की सालाना खपत के एक बड़े हिस्से के लिए मध्यपूर्व के देशों पर निर्भरता है, जो परोक्ष रूप से इज़रायल-अमेरिका और ईरान की जंग में शामिल हैं.

इसके अलावा होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने के चलते भी यह संकट और गंभीर हो गया है.

देश में गैस आपूर्ति के संकट को लेकर गुरुवार (12 मार्च) को संसद में जारी बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान ज़ोरदार हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर इस मुद्दे पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और इस पर संसद के भीतर विस्तृत चर्चा की मांग की.

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बोल रहे हैं कि घबराने की जरूरत नहीं लेकिन वह खुद अलग-अलग वजहों से घबराए हुए हैं. इसलिए वह सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए सदन नहीं आ रहे हैं.

वहीं, संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने गैस सिलेंडर की समस्या को लेकर धरना प्रदर्शन भी किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए.

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने बुधवार (11 मार्च) को यह जानकारी दी कि भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच रुकावटों के प्रभाव को कम करने के लिए कच्चे तेल की वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित की है और घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाया है. सरकार ने उपभोक्ताओं से घरेलू गैस सिलेंडरों की बुकिंग में हड़बड़ी न करने का आग्रह भी किया.

भारत की ऊर्जा सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है: सरकार

पहली बार आधिकारिक तौर पर दी गई ब्रीफिंग में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों से उपजे संकट के बावजूद भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित बनी हुई है.

उन्होंने आगे बताया कि भारत की ऊर्जा सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है. विविध खरीद के माध्यम से सरकार ने जितनी मात्रा सुरक्षित की है, वह इस अवधि के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सामान्य रूप से आने वाली मात्रा से अधिक है.

मंत्रालय के अनुसार, भारत ने ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए अपने स्रोतों में बड़ा बदलाव किया है. इस समय भारत करीब 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है. पहले जहां भारत का 55% कच्चा तेल होर्मुज़ जलडमरूमध्य के अलावा अन्य रास्तों से आता था, अब यह बढ़कर करीब 75% हो गया है. इससे सप्लाई में बाधा आने का खतरा कम हुआ है.

मंत्रालय ने बताया कि देश की रिफाइनरियां इस समय पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, और कुछ रिफाइनरियां 100% से भी ज्यादा क्षमता पर उत्पादन कर रही हैं.

उल्लेखनीय है कि भारत अपनी एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60% आयात करता है, और इस आयात का लगभग 90% हिस्सा आमतौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. अमेरिका-इज़रायल के संयुक्त हमलों के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बंद किया हुआ है.

मंत्रालय का कहना है कि सरकार ने इस कमी को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल उत्पादन कम कर घरेलू गैस उत्पादन को अधिकतम करने के लिए कहा है. औद्योगिक और वाणिज्यिक खपत में कटौती की गई है ताकि 33 करोड़ से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके, जो कुल एलपीजी मांग का लगभग 86% हिस्सा हैं.

सुजाता शर्मा ने कहा कि इन समायोजनों के कारण 8 मार्च से घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25% की वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि घरेलू एलपीजी उत्पादन में होने वाली सारी अतिरिक्त वृद्धि घरेलू उपभोक्ताओं की ओर निर्देशित की जा रही है.

घरेलू उपयोग से इतर एलपीजी के लिए अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी. रेस्तरां, होटल और अन्य व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए आवंटन की समीक्षा के लिए इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है.

इस बीच अधिकारियों ने कुछ क्षेत्रों में एलपीजी डीलरों पर अफरा-तफरी में बुकिंग और लंबी कतारों की खबरों को स्वीकार किया, लेकिन स्थिति का मुख्य कारण सिलेंडर की कमी के बारे में गलत जानकारी को बताया.

सुजाता शर्मा ने कहा, ‘फीडबैक से पता चलता है कि कुछ लोगों ने गलत जानकारी के कारण सिलेंडर बुक करने और जमाखोरी की है. हमारे पास पर्याप्त स्टॉक है. ग्राहकों को सिलेंडर बुक करने के लिए जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है.’

उन्होंने आगे कहा कि लगभग ढाई दिन के पूर्व-निर्धारित डिलीवरी चक्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

‘गैस कंपनियां वैकल्पिक मार्गों और आपूर्तिकर्ताओं से आपूर्ति प्राप्त कर रही हैं’

मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की प्राकृतिक गैस आपूर्ति भी प्रभावित हुई है. देश की कुल खपत लगभग 189 मिलियन मानक घन मीटर प्रतिदिन (एमएससीएमडी) है, जिसमें से लगभग 97.5 एमएससीएमडी का उत्पादन घरेलू स्तर पर होता है, जबकि शेष आयात किया जाता है. होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजरानी संबंधी बाधाओं के कारण लगभग 47.4 मिमीएससीएमडी आयात बाधित हुआ है.

हालांकि मंत्रालय का कहना है कि गैस कंपनियां वैकल्पिक मार्गों और आपूर्तिकर्ताओं से आपूर्ति प्राप्त कर रही हैं. व्यवधान की भरपाई के लिए नए आपूर्तिकर्ताओं से प्राप्त एलएनजी के दो कार्गो वर्तमान में भारत की ओर आ रहे हैं.

मांग को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने नियामक उपाय भी अपनाए हैं. खाना पकाने की गैस की कीमतों में 11 महीनों में पहली बार वृद्धि की गई है और सब्सिडी वाली एलपीजी रिफिल के बीच का न्यूनतम अंतराल 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है.

अधिकारियों का दावा है कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मूल्य वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा वहन किया है. दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़कर 913 रुपये हो गई है, जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 513 रुपये का भुगतान करना पड़ता है.

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भारत में तेल और गैस सप्लाई की कमी को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस सप्लाई की ‘कोई किल्लत नहीं’ है और ‘घबराने की ज़रूरत नहीं’ है.

हालांकि, देशभर में एलपीजी की कीमतों और उपलब्धता पर दबाव बढ़ता दिख रहा है और देश के अलग-अलग हिस्सों से इस संकट के गहराने की तस्वीरें सामने आ रही हैं.

रेस्तरां उद्योग संघों ने सरकार से गुहार लगाई

इस बीच, पांच लाख से अधिक रेस्तरां का प्रतिनिधित्व करने वाले नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सोमवार को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखकर कहा, ‘रेस्तरां उद्योग अपने संचालन के लिए मुख्य रूप से कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर है. अगर इसमें किसी तरह की बाधा आती है तो बड़े पैमाने पर रेस्तरां के बंद होने की स्थिति पैदा हो सकती है.’

वहीं, फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशंस ऑफ इंडिया ने भी सरकार से मदद मांगी है. उधर भारतीय कंपनियों ने लगभग एक साल बाद पहली बार एलपीजी की क़ीमतों में बीते शनिवार को बढ़ोतरी की है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पुणे नगर निगम ने एलपीजी के घटकों जैसे प्रोपेन और ब्यूटेन के इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध के कारण शहर के गैस शवदाह गृहों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) ने मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को आपूर्ति में कमी की सूचना दी है. एनआरएआई ने रेस्टोरेंट के लिए निश्चित कोटा की मांग की है.

इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (एएचएआर) के अध्यक्ष विजय के शेट्टी ने एएनआई से कहा, ‘बीते दो दिनों से संकट बढ़ा है. 20% रेस्टोरेंट पहले ही बंद हो चुके हैं. मुझे पूरे मुंबई से संदेश आ रहे हैं कि एलपीजी की ब्लैकमार्केटिंग हो रही है. कंज्यूमर प्रोटेक्शन मिनिस्टर छगन भुजबल ने हमें आश्वासन दिया है कि वो इस बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करेंगे और समस्या का हल ढूंढेंगे.’

बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुब्रमण्यम होल्ला ने एएनआई से कहा, ‘अभी तक कुछ भी बंद नहीं हुआ है क्योंकि हमने स्टॉक कर लिया था. लेकिन अगले तीन-चार दिनों में हमें नहीं पता कि क्या होने वाला है. अगर सप्लाई बंद होती है तो बिजली से चलने वाले उपकरणों का सहारा लेना पड़ेगा.’

फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया की तरह ही ओडिशा, चेन्नई, दिल्ली और गुरुग्राम के होटल एसोसिएशनों ने सरकार से एलपीजी आपूर्ति के लिए उपाय किए जाने की मांग की है.

गौरतलब है कि इस बीच देश के कई राज्यों और शहरों से घरेलू गैस की समस्याओंं की ख़बरें सामने आ रही हैं.

पंजाब विधानसभा में निंदा प्रस्ताव

इस बीच पंजाब विधानसभा में ईरान-अमेरिका और इज़रायल युद्ध को लेकर पेट्रोल-डीजल व एलपीजी गैस की कमी को लेकर खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटरूचक्क केंद्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि मोदी सरकार की गलत विदेश नीति के कारण यह यह स्थिति उत्पन्न हुई है.

उन्होंने कहा कि पंजाब में गेहूं की खरीद का सीजन शुरू होने वाला है. पेट्रोल डीजल की कमी का असर उस पर भी पड़ सकता है. पंजाब के गोदाम भरे हुए है. ढुलाई नहीं हो पा रही है. नई फसल रखने में दिक्कत आएगी.

वहीं, कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि गैस की कमी के कारण नंगल और बठिंडा में सीएफएल के प्लांट बंद हो गए, जिससे यूरिया की कमी हो जाएगी. मंत्री ने केंद्र सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि पानीपत यूनिट को पूरी गैस सप्लाई दी जा रही है लेकिन पंजाब के यूनिट को नहीं.

पश्चिम बंगाल से भी एलपीजी की कमी की खबरें सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आपातकालीन बैठक बुलाई. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगी.

उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि आपूर्ति श्रृंखला को बंद न किया जाए. ममता ने यह भी अपील की कि इस मुद्दे पर केंद्र के साथ हुई चर्चा में बुकिंग अंतराल को 25 दिन तय नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि गुरुवार को राज्य के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी.

राजधानी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश और तमाम राज्यों से रसोई गैस को लेकर लोगों की दिक्कतें सामने आ रही हैं. कई जगह गैस एजेंसी के बाग लोगों की लंबी कतार नज़र आ रही है, तो कहीं कई दिनों की बुकिंग के बाद भी लोगों तक रसोई गैस पहुंच नहीं सका है. ऐसे में आम लोग सबसे ज्यादा इस संघर्ष की चपेट में नज़र आ रहे हैं.