साहित्य अकादमी 2025: हिंदी में ममता कालिया, अंग्रेज़ी में नवतेज सरना समेत 24 लेखक पुरस्कृत

साहित्य अकादमी ने हिंदी में ममता कालिया, अंग्रेज़ी में नवतेज सरना, उर्दू में प्रितपाल सिंह बेताब, और पंजाबी में जिंदर समेत कुल 24 भारतीय भाषाओं के लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार देने का ऐलान किया है. इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए इस बार आठ कविता-संग्रहों, चार उपन्यासों, दो कहानी संग्रहों, एक साहित्यिक आलोचना, एक आत्मकथा और दो संस्मरण पुस्तकों का चयन के लिए किया गया है.

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ममता कालिया और नवतेज सरना. (फोटो साभार: सोशल मीडिया/ एक्स)

नई दिल्ली: साहित्य अकादमी ने साल 2025 के लिए सोमवार (16 मार्च) को अपने प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा की. अकादमी ने हिंदी में ममता कालिया, अंग्रेजी में भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त राजनयिक नवतेज सरना, उर्दू में प्रितपाल सिंह बेताब, संस्कृत में महामहोपाध्याय भद्रेशदास और पंजाबी में जिंदर समेत कुल 24 भारतीय भाषाओं के लेखकों को साहित्य अकादमी पुरस्कार देने का ऐलान किया है.

साहित्य अकादमी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि इस बार आठ कविता-संग्रहों, चार उपन्यासों, दो कहानी संग्रहों, एक साहित्यिक आलोचना, एक आत्मकथा और दो संस्मरण पुस्तकों का चयन प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए किया गया है.

विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की प्रक्रिया जनवरी 2025 में शुरू हुई थी और आगामी 31 मार्च को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित होने वाले विशेष समारोह में विजेताओं को पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपये की राशि, एक उत्कीर्ण ताम्रफलक और शॉल प्रदान की जाएगी.

हिंदी की वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया को साल 2025 का साहित्य अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा हुई है. ममता कालिया को यह पुरस्कार उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए दिया गया है.

साहित्य अकादमी पुरस्कार की घोषणा के बाद लेखिका ममता कालिया ने अपने फेसबुक पर एक पोस्ट कर सभी को धन्यवाद कहा है.

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है, ‘दोस्तों धन्यवाद, शुक्रिया. ऐसा बहुत कम होता है कि हमारे फोन पर ट्रैफिक जाम हो. माफी. आपका प्यार अब प्यार देने से ही पूर्ण होगा.’

ममता कालिया ने आगे लिखा है कि आप सब की दुआएं मुझे अगली किताब लिखने के लिए उकसाती हैं.

उल्लेखनीय है कि ‘जीते जी इलाहाबाद’ किताब ममता कालिया का संस्मरण है. इसमें लेखिका ने उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में बिताए गए अपने शुरुआती दिनों को याद किया है. इस किताब में उन्होंने अपने रानीमंडी के मकान, लोकनाथ के स्वाद और चौक समेत पुराने शहर के बारे में अलग-अलग अंदाज में लिखा है. इसके अलावा ममता कालिया ने उस दौर के लेखकों और उनके तौर-तरीकों को भी अपनी किताब में विस्तार दिया है.

अंग्रेजी में नवतेज सरना को उनके उपन्यास ‘क्रिमसन स्प्रिंग ’ के लिए पुरस्कृत किया जाएगा. ये किताब 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड पर आधारित है. यह पुस्तक अमृतसर में हुए नरसंहार की भयावहता, उसके कारणों और आम लोगों पर पड़े उसके गहरे प्रभाव को जीवंत तरीके से दर्शाती है, जिसमें उधम सिंह और गदर आंदोलन जैसे प्रसंग शामिल हैं.

उर्दू में कविता संग्रह ‘सफर जारी है’ के लेखक प्रितपाल सिंह बेताब को, जबकि संस्कृत में कविता संग्रह ‘प्रस्थानचतुष्टये ब्रह्मघोष’ के लिए महामहोपाध्याय भद्रेशदास को साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है.

प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ साहित्य सृजन में सक्रिय जयपुर के जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को वर्ष 2025 का राजस्थानी भाषा का साहित्य अकादेमी पुरस्कार उनके चर्चित कहानी संग्रह ‘भरखमा’ के लिए दिया जाएगा.

डोगरी भाषा में खजूर सिंह ठाकुर द्वारा लिखित ठाकुर सतसई को 2025 के साहित्य सम्मान के लिए चुना गया है. मैथली के लिए महेंद्र की लिखी पुस्तक ‘धात्री पात सन गाम’ को पुस्कृत किया जाएगा.

संथाली भाषा में सुमित्रा सोरेन को उनके कहानी संग्रह ‘मिड बिर्ना चेनने साओन इनाग सागई’, असमिया भाषा के उपन्यास ‘कड़ि खेलर साधु’ के लिए देवब्रत दास, बांग्ला में ‘श्रेष्ठ कबिता’ (कविता) के लिए प्रसून बंद्योपाध्याय, ‘दोंनै लामाः मोनसे गाथोन’ (बोडो भाषा में उपन्यास) के लिए सहायसुलि ब्रह्म को यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा.

विज्ञप्ति के अनुसार, गुजराती ‘भट्टखडकी’ (कविता) के लिए योगेश वैद्य को, कन्नड में दडा सेरिसु तंदे (कहानी) के लिए अमरेश नुगडोणी, कश्मीरी में ‘नजदावनेकी पॉट अलाव’ (कविता) के लिए अली शैदा, कोंकणी में ‘कोंकणी काव्यें: रुपां आनी रूपकां (आलोचनात्मक निबंध) के लिए हेनरी मेंडोनका (एच्चेम पेरनाळ) को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा जाएगा.

मलयालम में मायामानुष्यर (उपन्यास) के लिए एन. प्रभाकरन को,मणिपुरी में ‘कंगलमद्रीब इफुत’ (कहानी) के लिए हाओबम नलिनि, मराठी में ‘कालयानियया रेषा’ (आत्मकथा) के लिए राजू बाविस्कर, नेपाली में ‘नेपाली पारम्परिक संस्कृति र सभ्यताको ढुकुटी’ (निबंध) के लिए प्रकाश भट्टराई, ओड़िआ के लिए ‘पदपुराण’ (कविता)के लिए गिरिजाकुमार बलियार सिंह को के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया जाएगा.

इसके अलावा पंजाबी – ‘सेफ्टी किट’ (कहानी) के लिए जिंदर, सिंधी – ‘वाघू’ (कहानी)के लिए भगवान अटलानी, तमिल – ‘तमिळ सिरुकथैयिन थडंगल’ (साहित्यिक आलोचना) के लिए सा. तमिलसेलवन और तेलुगु में ‘अनिमेष’ (कविता) के लिए नंदिनी सिद्धरेड्डी को पुरस्कृत किया जाएगा.

गौरतलब है कि साहित्य अकादमी पुरस्कार 1954 से हर वर्ष भारतीय भाषाओं की श्रेष्ठ कृतियों को दिया जाता है. संस्कृति मंत्रालय के तत्वाधान में दिए जाने वाले ये पुस्कार उस समय सबसे अधिक सुर्खियों में रहे थे, जब 2015 के दौरान कुल 39 लेखकों ने कर्नाटक के प्रख्यात लेखक एमएम कलबुर्गी की हत्या के विरोध में साहित्य अकादमी को अपने पुरस्कार लौटा दिए थे.

इसके बाद 2023 में संसद की एक स्थायी समिति ने सुझाव दिया था कि विभिन्न साहित्यिक और संस्कृति निकायों द्वारा पुरस्कारों के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों से पहले ही यह शपथ पत्र लिया जाए कि उन्हें दिए जा रहे सम्मान को ‘राजनीतिक कारणों’ से वापस नहीं किया जाएगा.