असम: चुनाव से पहले कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का इस्तीफ़ा, भाजपा में शामिल हुए

असम कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने उन्हें पार्टी द्वारा अपमानित किए जाने का हवाला देते हुए कांग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया था. बुधवार को नई दिल्ली में असम के सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा के आवास पर भाजपा में शामिल हुए. नगांव से दो बार के सांसद और तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकारों में कई बार मंत्री रह चुके बोरदोलोई असम कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं.

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा (बाएं) और असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया (दाएं), नई दिल्ली में नगांव के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का भारतीय जनता पार्टी में स्वागत कर रहे हैं. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: असम कांग्रेस के लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार शाम इस्तीफा दे दिया. दो दिन पहले उन्होंने पार्टी द्वारा उन्हें अपमानित किए जाने का आरोप लगाया था.

बोरदोलोई बुधवार (18 मार्च) को सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए. बोरदोलोई नई दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के आवास पर एक सादे समारोह में भाजपा में शामिल हुए. इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया, विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा और असम के कई भाजपा सांसद मौजूद थे.

हिंदुस्तुन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा, ‘आज कोई भी स्वाभिमानी व्यक्ति कांग्रेस में नहीं रह सकता, खासकर असम के मामले में. बोरदोलोई कांग्रेस के बहुत वरिष्ठ नेता हैं, जो 1975 में पार्टी में शामिल हुए थे. हम भाजपा में उनका स्वागत करते हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘आगामी विधानसभा चुनाव के लिए हमारी उम्मीदवारों की सूची आज अंतिम रूप दी जाएगी. हम उन्हें किसी सीट से उम्मीदवार बनाने की कोशिश करेंगे और उनकी जीत सुनिश्चित करेंगे.’

बोरदोलोई ने कहा कि कांग्रेस छोड़ने और भाजपा में शामिल होने का फैसला आसान नहीं था और यह बहुत मुश्किल से लिया गया फैसला है.

उन्होंने कहा, ‘मैं 16 साल की उम्र में कांग्रेस में शामिल हुआ था, और इस पार्टी ने मेरे जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा मुझे बहुत कुछ दिया है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मैं पार्टी में खुद को अपमानित, नजरअंदाज और घुटन महसूस कर रहा था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं असम के लोगों के लिए बेहतर काम करने के उद्देश्य से भाजपा में शामिल हुआ हूं. मुझे लगता है कि मैं पार्टी को अपनी सेवाएं दे सकूंगा और असम को देश के सर्वश्रेष्ठ राज्यों में से एक बनाने में योगदान दे पाऊंगा. मैं अपने नए साथियों के साथ मिलकर असम के सभी समुदायों के कल्याण के लिए काम करने को लेकर उत्साहित हूं.’

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के बारे में अपनी शिकायतें उठाने के बाद से बोरदोलोई सोमवार से दिल्ली में थे. असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने मंगलवार रात उनसे मुलाक़ात की थी, जिसके बाद उन्होंने कहा  थाकि वह बोरदोलोई के इस्तीफ़े की ख़बर की ‘निंदा’ करते हैं.

गोगोई ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा था, ‘मीडिया के ज़रिए असम के मुख्यमंत्री बार-बार हमारे वरिष्ठ सांसद प्रद्युत बोरदोलोई की छवि खराब करने की कोशिश करते हैं, उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं. अब, मेरे महासचिव जितेंद्र सिंह और मैंने उनसे मुलाक़ात की और हमने इस बारे में विस्तार से चर्चा की कि हम आने वाले चुनावों के लिए लोगों तक कैसे पहुंचेंगे और जिस नए असम की हम कल्पना कर रहे हैं, उसे कैसे साकार करेंगे.’

बोरदोलोई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को संबोधित पत्र में लिखा था, ‘गहरे दुख के साथ आज मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं.’

इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने मीडिया से बातचीत में संकेत दिया था कि भाजपा उनका ‘स्वागत करने’ के लिए तैयार है.

नगांव से दो बार के सांसद और तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकारों में कई बार मंत्री रह चुके बोरदोलोई असम कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं. वह असम से तीन लोकसभा सांसदों में से एक हैं, अन्य दो असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई और धुबरी के सांसद रकीबुल हुसैन हैं.

उनके बेटे प्रतीक को कांग्रेस ने मरघेरिटा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है.

अखबार के अनुसार, रविवार को उन्होंने असम प्रभारी जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर कहा था कि उन्हें लहरिघाट (जो उनके नगांव संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत एक विधानसभा क्षेत्र है) के उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया के दौरान ‘अपमानित’ किया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि लहरिघाट के मौजूदा कांग्रेस विधायक आसिफ नजर द्वारा उस व्यक्ति को संरक्षण दिया जा रहा है, जिसे उन पर हमले के मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उनकी इस चिंता को गंभीरता से नहीं लिया गया.

अप्रैल 2025 में पंचायत चुनाव के प्रचार के दौरान नगांव जिले के ढिंग में बोरदोलोई और विधायक सिबामोनी बोरा को तब चोटें आई थीं, जब उनकी गाड़ी पर भीड़ ने हमला किया था. पुलिस ने इस मामले में इमदादुल इस्लाम नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था.

सिंह को लिखे पत्र में बोरदोलोई ने आरोप लगाया कि इस्लाम, विधायक नजर का ‘करीबी सहयोगी’ है और जमानत पर रिहा होने पर उसका नायक की तरह स्वागत किया गया. बोरदोलोई ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने गोगोई को इस्लाम की कथित भूमिका के बारे में बताया था, लेकिन इसके बावजूद असम कांग्रेस अध्यक्ष ने जिले में हुए एक कार्यक्रम में आरोपी और नजर दोनों के साथ मंच साझा किया.

बोरदोलोई ने कहा कि उनके सब्र का बांध तब टूट गया, जब 13 मार्च को नई दिल्ली में कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के दौरान, यूपी के सांसद इमरान मसूद- जो असम चुनावों के लिए स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य हैं, ने कथित तौर पर उनकी चिंताओं को ‘झूठा’ बताकर खारिज कर दिया और गोगोई इस पर कथित तौर पर चुप रहे.

उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने उनके ‘आत्मसम्मान’ को ठेस पहुंचाई है. ये घटनाक्रम उस समय सामने आए हैं जब एक महीने पहले असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने भी ‘आत्मसम्मान’ का हवाला देते हुए पार्टी छोड़ दी थी. बोरा इसके बाद भाजपा में शामिल हो गए हैं.