नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनाव से कुछ सप्ताह पहले एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम में भाजपा नेता और राज्य की खेल और युवा कल्याण मंत्री नंदिता गारलोसा ने रविवार को पार्टी से टिकट न मिलने के बाद कांग्रेस का दामन थाम लिया. अब वह दीमा हसाओ जिले के हाफलोंग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगी.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने बताया कि उसने पहले इस सीट से अपने राज्य इकाई के महासचिव निर्मल लांगथासा को उम्मीदवार बनाया था. हालांकि, उन्होंने ‘जनहित में’ अपना टिकट गारलोसा को देने पर सहमति जताई.
पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘हमें यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि श्रीमती नंदिता गारलोसा कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गई हैं. पिछले पांच वर्षों से वह दीमा हसाओ की आवाज रही हैं और हमेशा अपने सिद्धांतों व विचारों पर कायम रही हैं.’
भाजपा पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य की खेल और युवा कल्याण मंत्री को अपने रुख की ‘कीमत चुकानी पड़ी.’ कांग्रेस ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की दिलचस्पी सिर्फ़ आदिवासियों की ज़मीन बड़े कॉर्पोरेशनों को बेचने में है.
गारलोसा निवर्तमान विधानसभा में हाफलोंग सीट का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. आगामी चुनाव में भाजपा ने इस सीट से नई उम्मीदवार रुपाली लांगथासा को मैदान में उतारा है.
असम कांग्रेस मीडिया टीम द्वारा साझा की गई एक तस्वीर में गारलोसा को हाफलोंग में निर्मल लांगथासा और अन्य नेताओं की मौजूदगी में औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होते हुए दिखाया गया.
ख़बरों के मुताबिक, 19 मार्च को भाजपा द्वारा उम्मीदवारों की लिस्ट जारी किए जाने के तुरंत बाद उन्होंने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनसे संपर्क किया था.
इस बीच, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने रविवार को हाफलोंग में गारलोसा के आवास पर गए और उनसे मुलाकत की.
रविवार देर रात गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शर्मा ने शुरुआत में कहा था कि पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं की संख्या बहुत कम है और गारलोसा भाजपा नहीं छोड़ रही हैं. हालांकि, बाद में जब उन्हें गारलोसा के इस कदम के बारे में पता चला तो उन्होंने अपने बयान में बदलाव कर दिया.
उन्होंने कहा, ‘मैंने उनसे बात की थी और वह संतुष्ट लग रही थीं. कांग्रेस पहले ही हाफलोंग से अपने उम्मीदवार की घोषणा कर चुकी थी. मुझे समझ नहीं आ रहा कि वह उस पार्टी में क्यों शामिल हो रही हैं.’
गारलोसा 2021 में चुनी गईं और उन्हें राज्य कैबिनेट में शामिल किया गया. उन्होंने खान, खनिज और जनजातीय आस्था से जुड़े विभाग संभाले.
इससे पहले भाजपा के एक और पूर्व विधायक अमर चंद जैन भी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और उन्हें कटिगोराह से पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है. कटिगोराह में भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ को मैदान में उतारा है.
मुख्यमंत्री ने कहा है कि उन्हें जीत का पूरा भरोसा है.
उधर, हाल के हफ्तों में कांग्रेस को भी कई नेताओं के भाजपा में जाने का सामना करना पड़ा है. ताजा मामले में लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई, जो पांच दशकों से अधिक समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और विधानसभा चुनाव के लिए घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष थे, पिछले सप्ताह भाजपा में शामिल हो गए.
कुछ दिन पहले ही भूपेन कुमार बोरा, जो दो बार विधायक रह चुके हैं और असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए. उन्हें लखीमपुर जिले के बिहपुरिया सीट से उम्मीदवार बनाया गया है, जिसका वे एक दशक तक प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए चुनाव 9 अप्रैल को होने हैं, जबकि मतगणना 4 मई को होगी.
असम में कांग्रेस 2016 से सत्ता से बाहर है, जबकि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है. वर्तमान विधानसभा में भाजपा के 64 विधायक हैं, जबकि उसके सहयोगी – असम गण परिषद के 9, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के 7 और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के 3 विधायक हैं.
विपक्षी खेमे में कांग्रेस के 26 विधायक, एआईयूडीएफ के 15, सीपीआई(एम) का एक और एक निर्दलीय विधायक शामिल है.
