केरल: भाजपा की सील लगे चुनाव आयोग के पत्र पर विवाद, पोस्ट करने वालों को पुलिस ने भेजे नोटिस

केरल चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक दलों को भेजे गए एक पत्र पर भाजपा की प्रदेश इकाई की मुहर लगे होने को लेकर सियासी विवाद खड़ा हुआ है. आयोग ने अपनी सफाई में इसे 'लिपिकीय त्रुटि' बताते हुए एक कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया है. इस बीच केरल पुलिस पत्र को सोशल मीडिया पर साझा करने वालों को 'राष्ट्रीय संस्था के अपमान' और 'सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर ख़तरे' का हवाला देते हुए टेकडाउन नोटिस जारी किए हैं.

दिल्ली स्थित चुनाव आयोग का कार्यलय. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केरल में सोमवार (23 मार्च) को साल 2019 के राज्य निर्वाचन आयोग के एक पत्र पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य इकाई की मुहर दिखाई देने के बाद विवाद खड़ा हो गया. इसके लिए केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने ‘लिपिकीय त्रुटि’ (Clerical error) का हवाला दिया है,

सोमवार को सीईओ ने कहा कि पत्र जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है.

इस बीच, भाजपा की मुहर वाली पत्र सोशल मीडिया पर शेयर करने वालों को पुलिस ने नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है. इस मामले में जाली दस्तावेज फैलाने और गलत जानकारी प्रसारित करने के आरोप में संबंधित सोशल मीडिया यूजर्स को पुलिस नोटिस जारी किए गए हैं.

केरल पुलिस के नोटिस में कहा गया, ‘संबंधित पोस्ट न केवल एक सम्मानित राष्ट्रीय संस्था का सीधा अपमान है, बल्कि विभाजन और वैमनस्य को भड़काकर सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा भी पैदा करता है. इसके अलावा, उस 2019 के पत्र से संबंधित सभी डिजिटल सामग्री को तुरंत हटाने की आवश्यकता है, जिसमें लिपिकीय त्रुटि के कारण अनजाने में एक राजनीतिक दल की मुहर शामिल हो गई थी, जिसे बाद में ठीक कर दिया गया है.’

इसमें यह भी जोड़ा गया कि उस पत्र का लगातार प्रसार ‘झूठे आरोप फैलाने’ के लिए किया जा रहा है.

केरल पुलिस ने इसी तरह का नोटिस कांग्रेस नेता रुचिरा चतुर्वेदी को उनकी एक्स पोस्ट के लिए जारी किया है.

उन्होंने नोटिस एक्स पर शेयर करते हुए कहा कि टेकडाउन नोटिस अब सोशल मीडिया को सेंसर करने का नियमित हथियार बन गए हैं.

चतुर्वेदी ने कहा, ‘केरल पुलिस के मुताबिक, मेरा ट्वीट चुनाव आयोग का अपमान करता है और ऐसा सामग्री प्रसारित करता है जो सांप्रदायिक सद्भाव को कमजोर करती है.’

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की अपनी कार्रवाई, जिसे वह ‘लिपिकीय त्रुटि’ बता रहा है, अपमानजनक नहीं है, लेकिन उस ‘त्रुटि’ पर सवाल उठाने वाले लोग किस तरह अपमानजनक हो जाते हैं और अपराधी बन जाते हैं?

उन्होंने सवाल किया, ‘अगर यह सच में सिर्फ एक ‘त्रुटि’ है, तो फिर निर्वाचन आयोग इतना डरा हुआ और घबराया हुआ क्यों है?’

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती को भी केरल पुलिस का यह नोटिस मिला है. उन्होंने इसे एक्स पर साझा करते हुए लिखा, ‘सुबह मेरी आंखें उनके प्रेम पत्र के साथ खुलीं!’

केरल की साइबर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के पत्रकार पीयूष राय को नोटिस जारी कर उन्हें एक्स पर अपनी उस पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया है, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग का वह पत्र साझा किया था, जिस पर भाजपा की राज्य समिति की आधिकारिक मुहर लगी हुई थी.

राय ने नोटिस को साझा करते हुए एक्स पर लिखा, ‘टेकडाउन नोटिस सोशल मीडिया पर भारतीय पुलिसिंग का एक महत्वपूर्ण हथियार बन गए हैं. यह कानून का खुला दुरुपयोग है, जिसका इस्तेमाल यूजर्स को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है.’

पीयूष राय ने आगे तंज कसते हुए लिखा, ‘मुझे भारत के चुनाव आयोग के प्रति पूरा सम्मान है, जो देश की सबसे निष्पक्ष संवैधानिक संस्था है. इसके प्रमुख के तौर पर ज्ञानेश कुमार ने एक ऐतिहासिक कार्यकाल का नेतृत्व किया है और वे अब तक के भारत के सबसे सफल चुनाव आयुक्त हैं. केरल पुलिस क्या यह ठीक है.’

पत्रकार अरविंद गुणशेखर ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग, केरल पुलिस के माध्यम से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत नोटिस क्यों जारी कर रहा है.

उन्होंने पूछा, ‘चुनाव आयोग, केरल सीईओ के जरिए आईटी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत @X को उनके द्वारा जारी किए गए पत्र वाली पोस्ट हटाने के लिए नोटिस क्यों दे रहा है? क्या आयोग ने खुद इसे ‘लिपिकीय त्रुटि’ नहीं माना? क्या पत्रकारों को इस ‘त्रुटि’ की रिपोर्ट करने का अधिकार नहीं होना चाहिए? और ‘पारदर्शिता’ के नाम पर एक्स को पोस्ट हटाने का आदेश क्यों दिया जा रहा है?’

विपक्ष का चुनाव आयोग पर निशाना

इससे पहले सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) ने सबसे पहले चुनाव आयोग के उस पत्र की प्रति साझा की, जिस पर केरल भाजपा की मुहर लगी थी. मार्च 2019 का यह खत चुनाव निकाय के उन दिशानिर्देशों से जुड़ा है, जिनमें राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों द्वारा अपने आपराधिक रिकॉर्ड के प्रचार-प्रसार के बारे में बताया गया है.

माकपा की केरल इकाई ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘क्या भाजपा ने अब सभी दिखावे छोड़ दिए हैं? यह कोई राज नहीं है कि वही सत्ता केंद्र भारतीय निर्वाचन आयोग और भाजपा दोनों को नियंत्रित करता हुआ प्रतीत होता है. फिर भी, कम से कम दो अलग-अलग दफ्तरों का शिष्टाचार तो बनाए रखें. अब वह भी अनावश्यक लगता है. मुहरें आसानी से अदला-बदली की जा रही हैं.’

पोस्ट के साथ पत्र और पार्टियों को भेजे गए एक ईमेल की तस्वीरें संलग्न है, और कहा गया कि यह पत्र कई दलों को मिला था तथा कम से कम दो प्राप्तकर्ताओं से इसकी पुष्टि भी की गई थी.

माकपा ने कहा, ‘हम अक्सर यह दावा सुनते रहे हैं कि वोटिंग मशीन में कोई भी बटन दबाओ, कमल ही जल उठता है. लेकिन यह पहली बार है जब ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा और निर्वाचन आयोग एक ही मुहर का इस्तेमाल कर रहे हैं.’

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केरल के सीईओ ने सोमवार शाम एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि ‘यह पूरी तरह से एक लिपिकीय त्रुटि थी, जिसे तुरंत पहचानकर ठीक कर लिया गया.’

बयान में कहा गया, ‘हमारे संज्ञान में आया है कि निर्वाचन आयोग का एक पत्र, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुहर है, विभिन्न मलयालम समाचार चैनलों पर प्रसारित हो रहा है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) का कार्यालय स्पष्ट करता है कि यह पूरी तरह एक लिपिकीय त्रुटि थी, जिसे तुरंत पहचानकर ठीक कर लिया गया.’

बयान में यह भी कहा गया कि भाजपा की केरल इकाई ने हाल ही में 2019 के दिशानिर्देशों पर स्पष्टीकरण के लिए सीईओ कार्यालय से संपर्क किया था और मूल 2019 निर्देश की एक फोटोकॉपी प्रस्तुत की थी.

सीईओ ने कहा, ‘उस विशेष प्रति पर पार्टी की मुहर मौजूद थी. एक चूक के कारण कार्यालय उस दस्तावेज़ पर मौजूद पार्टी चिह्न को नोटिस नहीं कर पाया और अनजाने में उसी प्रति को स्पष्टीकरण के हिस्से के रूप में अन्य राजनीतिक दलों को भी भेज दिया.’

आयोग ने कहा, ‘जिन दिशानिर्देशों की बात हो रही उनमें 2019 के बाद कई संशोधन हो चुके हैं, जिन्हें सभी राजनीतिक दलों को पहले ही सूचित किया जा चुका है.’

बाद में सीईओ ने घोषणा की कि पत्र जारी करने की प्रक्रिया संभालने वाले सहायक अनुभाग अधिकारी को जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया है. साथ ही, 2019 की मूल फाइल की एक प्रति भी जारी की गई, जिस पर भाजपा की मुहर नहीं थी.

विपक्षी दलों, जो पहले से ही निर्वाचन आयोग की मदद से भाजपा पर ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाते रहे हैं, ने कहा कि यह पत्र उनके उस आरोप को साबित करता है कि यह संस्था सत्तारूढ़ दल के निर्देशों पर काम कर रही है.

कांग्रेस ने एक बयान में कहा कि यह पत्र ‘गलती नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी’ है.

बयान में कहा गया, ‘एक संवैधानिक संस्था पर भाजपा का चिह्न होना उसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. इससे हमारे संस्थानों की स्वतंत्रता के बारे में क्या संकेत मिलता है?’

बयान में कहा गया है, ‘कुछ ऐसे सवाल जिनके जवाब मिलने ही चाहिए: निर्वाचन आयोग भाजपा के प्यादे जैसा व्यवहार क्यों कर रहा है? चुनाव आयोग के एक आधिकारिक पत्र पर एक राजनीतिक पार्टी की मुहर कैसे आ गई? इसके लिए जिम्मेदार कौन है? क्या निर्वाचन आयोग इसे भारत की जनता को समझा सकता है? जब लोकतंत्र की रक्षा के लिए बने संस्थान समझौता करते हुए दिखें, तो चुप रहना विकल्प नहीं है.’

तृणमूल कांग्रेस ने भी एक बयान में कहा, जो पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर निर्वाचन आयोग से टकराव में है, कि इस मुहर की मौजूदगी यह दर्शाती है कि चुनाव आयोग भाजपा की ‘बी-टीम’ है.

इस महीने की शुरुआत में विपक्षी दलों ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भी दिया था.