मणिपुर हिंसा: कुकी महिलाओं के गैंगरेप, बदसलूकी के आरोपियों की ज़मानत को सीबीआई ने चुनौती दी

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मणिपुर में 2023 के जातीय हिंसा के दौरान दो कुकी महिलाओं के साथ गैंगरेप और निर्वस्त्र घुमाने के दो आरोपियों के ज़मानत रद्द करने की मांग की. सितंबर 2025 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को ज़मानत दे दी थी. अदालत ने गंभीर आरोपों को स्वीकार करते हुए कहा था कि बिना मुक़दमे के लंबी हिरासत को सज़ा के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: X/@manipur_police)

नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर उन दो आरोपियों को दी गई ज़मानत को चुनौती दी है, जिन पर 2023 के मणिपुर जातीय हिंसा के दौरान दो कुकी महिलाओं के साथ गैंगरेप करने और निर्वस्त्र घुमाने वाली भीड़ का हिस्सा होने का आरोप है.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार (23 मार्च) को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए जमानत पर रिहा दोनों आरोपियों- अरुण खुंदोंगबम और नामेराकपम किरण मेईतेई – से जवाब मांगा.

केंद्रीय जांच एजेंसी ने ज़मानत रद्द करने की मांग की है. सीबीआई के वकील ने अदालत को बताया कि मामला बेहद गंभीर आरोपों से जुड़ा है.

एजेंसी ने जमानत रद्द करने की मांग करते हुए कहा, ‘आरोपियों ने महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया था. यह अत्यंत गंभीर मामला है. महिलाओं के साथ गैंगरेप किया गया और फिर उन्हें निर्वस्त्र घुमाया गया.’

पीड़िताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता निजाम पाशा ने भी अदालत से अनुरोध किया कि जरूरत पड़ने पर उनके लिए विधिक सहायता वकील नियुक्त किए जाएं. पीठ ने कहा कि पीड़िताओं को ऐसी कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया, ‘पीड़ितों के लिए कानूनी सहायता वकील नियुक्ति के मुद्दे पर तत्काल पालन किया जाए.’

यह घटना 4 मई 2023 को हुई थी, लेकिन 19 जुलाई को इसका वीडियो वायरल होने के बाद ही देशभर में मामला सामने आया था, जिससे व्यापक आक्रोश फैल गया और सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा था. बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिसने 12 अक्टूबर 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया. पीड़िताओं के लिए मणिपुर घाटी क्षेत्र में जाना संभव नहीं होने के कारण मुकदमा गुवाहाटी स्थानांतरित कर दिया गया.

8 सितंबर 2025 को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दो आरोपियों– नामेराकपम किरण मेईतेई और अरुण खुंदोंगबम – को जमानत दे दी थी. अदालत ने गंभीर आरोपों को स्वीकार करते हुए कहा था कि बिना मुकदमे के लंबी हिरासत को सजा के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

सीबीआई के आरोपपत्र के अनुसार, खुंदोंगबम भीड़ का हिस्सा था और यौन उत्पीड़न, सामूहिक बलात्कार, महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने और हत्या में सक्रिय भूमिका निभाई थी. किरण मेईतेई पर अपराध में शामिल होने और हमले का वीडियो फैलाने का आरोप है. दोनों की पहचान पीड़िताओं ने वर्चुअल पहचान परेड (Test Identification Parade) में की थी.

बार एंड बेंच के अनुसार, इन मामलों में अब मुकदमे की शुरुआत हो चुकी है. इस वर्ष जनवरी में असम के गुवाहाटी की एक विशेष अदालत ने छह आरोपियों – जिनमें जमानत पर बाहर दोनों आरोपी भी शामिल हैं – के खिलाफ आरोप तय किए, जो महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाने और गैंगरेप से जुड़े इस मामले में शामिल हैं.