नेपाल: बालेन शाह की शपथ के बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री गिरफ़्तार

नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन शाह के शपथ लेने के अगले ही दिन पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गिरफ़्तार कर लिया गया है. ये गिरफ्तारियां बीते साल सितंबर में हुए ज़ेन-जी विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्जनों लोगों की मौत से संबंधित मामले से जुड़ी हुई हैं.

केपी शर्मा ओली. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को शनिवार (28 मार्च) को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

गौरतलब है कि रैपर से राजनेता बने बालेन शाह ने 5 मार्च को हुए संसदीय चुनाव में जीत हासिल करने के बाद शुक्रवार (27 मार्च) को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है.

ज्ञात हो कि पिछले साल युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद देश में हुए पहले चुनाव में उन्हें ज़बरदस्त जीत मिली थी. उन्होंने ओली को भारी अंतर से हराया था.

द टेलीग्राफ के मुताबिक, हालिया गिरफ्तारियां बीते साल सितंबर में हुए ज़ेन-जी विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्जनों लोगों की मौत से संबंधित मामले से जुड़ी हुई हैं. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या उच्च पदों पर बैठे इन लोगों ने प्रदर्शन और हिंसा के दौरान लापरवाही बरती थी.

मालूम हो कि पिछले साल 8 और 9 सितंबर को जेन-ज़ी युवाओं के दो दिन तक चले तीव्र प्रदर्शनों के कारण प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद से हटना पड़ा था. उस समय वे नेपाली कांग्रेस के समर्थन से बनी गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, जिसे लगभग दो-तिहाई बहुमत का समर्थन प्राप्त था. इस आंदोलन में करीब 76 लोग मारे गए थे और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था.

बीबीसी के अनुसार, इन विरोध प्रदर्शनों की जांच के लिए गठित गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले आयोग ने सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली पिछली सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी. बताया जा रहा है कि जांच आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के लिए मंत्रिपरिषद के फैसले के अनुसार ही ये गिरफ़्तारियां हुई हैं.

ओली ने इससे पहले जांच आयोग के निष्कर्षों को खारिज़ कर दिया था, जिसमें पूर्व पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग की गिरफ़्तारी की भी सिफ़ारिश की गई थी. उन्होंने दैनिक अख़बार ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ से कहा था कि ये ‘चरित्र हनन और नफ़रत की राजनीति’ हैं.

ऐसा माना जा रहा है कि रिपोर्ट में तत्कालीन सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के उच्च पदस्थ अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभिन्न कार्रवाइयों की सिफ़ारिश की गई थी.

सरकार ने अभी तक इस रिपोर्ट को औपचारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन इसके विवरण कुछ दिन पहले मीडिया में लीक हो गए थे.

ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के वरिष्ठ नेता मिन बहादुर शाही ने रॉयटर्स को बताया, ‘उन्हें आज सुबह उनके आवास से ले जाया गया.’

पुलिस प्रवक्ता ओम अधिकारी ने ओली और उनके गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी की पुष्टि की.

इस संबंध में गृह मंत्री गुरुंग ने सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व गृह मंत्री की गिरफ़्तारी पर टिप्पणी की है. उन्होंने जेन-ज़ी आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपनी एक तस्वीर भी साझा की, जिसे अंतिम संस्कार के लिए पशुपति आर्यघाट के ब्राह्मणाल में रखा गया था.

गृह मंत्री सुधन गुरुंग ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर लिखा, ‘वादा वादा होता है. क़ानून से ऊपर कोई नहीं है. हमने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को हिरासत में ले लिया है. यह किसी के ख़िलाफ़ बदला नहीं है, बल्कि इंसाफ़ की शुरुआत है.’

उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया है कि अब देश एक नई दिशा अपनाएगा.

उधर, सीपीएन-यूएमएल नेता महेश बरतौला ने कहा है कि वे ओली की गिरफ़्तारी के खिलाफ ‘कानूनी लड़ाई लड़ेंगे.’

उन्होंने कहा कि राजनीतिक रूप से यह एक बेहद दुखद और बदले की कार्रवाई का मामला है. संसद में दो-तिहाई बहुमत के अहंकार और घमंड के साथ सरकार बनाने के बाद अगली सुबह से ही जिस तरह से क्रूर प्रतिशोध का रास्ता अपनाया है, वह भी लोकतंत्र के लिए एक बड़ा ख़तरा है.