नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों से शुरू हुआ युद्ध सोमवार (30 मार्च) को 31वें दिन में प्रवेश कर गया. इस बीच संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों को भी निशाना बनाना जारी रखा है.
कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि 29 मार्च को एक डीसैलिनेशन (समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले) संयंत्र पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई.
दूतावास ने शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि वह कुवैती प्रशासन के संपर्क में है और हर संभव मदद मुहैया कराई जा रही है.
Embassy of India in Kuwait expresses its deepest condolences at the tragic demise of an Indian national due to an attack on a desalination facility in Kuwait yesterday. The Embassy is closely coordinating with the Kuwaiti authorities to render all possible support and assistance.
— India in Kuwait (@indembkwt) March 30, 2026
ईरान के तेल पर कब्जा करना चाहता हूं: ट्रंप
ब्रिटिश अखबार ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ के साथ एक साक्षात्कार में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के तेल पर कब्जा करना चाहते हैं. साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो, मेरी पसंदीदा चीज ईरान के तेल पर कब्जा करना है. लेकिन अमेरिका में कुछ मूर्ख लोग कहते हैं, आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? लेकिन वे मूर्ख लोग हैं.’
दूसरी तरफ ट्रंप ईरान के साथ बातचीत का दावा भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि अमेरिका ईरान के साथ ‘सीधे और परोक्ष’ दोनों तरीकों से बातचीत कर रहा है.
हालांकि, ईरान ने ऐसे किसी भी संवाद से इनकार किया है और आरोप लगाया है कि अमेरिका जमीनी हमले की तैयारी कर रहा है.
ट्रंप के बयानों में भी विरोधाभास दिखा, एक ओर उन्होंने बातचीत में प्रगति का दावा किया, वहीं यह भी कहा कि ‘हम बातचीत करते हैं और फिर हमें उन्हें बम से उड़ाना पड़ता है.’
खार्ग द्वीप पर कब्ज़े का संकेत
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के प्रमुख तेल टर्मिनल खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने की संभावना भी जताई. उन्होंने कहा कि ‘शायद हम इसे ले लें, शायद न लें,’ लेकिन यह भी माना कि ऐसा करने पर अमेरिकी सेना को वहां लंबे समय तक रहना पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि खार्ग द्वीप पर नियंत्रण हासिल करना और उसे बनाए रखना आसान नहीं होगा, क्योंकि यह ईरान की मुख्य भूमि की मिसाइल और तोपखाने की रेंज में आता है.
इज़रायल-लेबनान मोर्चे पर भी तनाव
इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई बढ़ाने का आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि ‘बफर ज़ोन को और विस्तारित किया जाएगा,’ और इसका कारण हिज़्बुल्लाह की ओर से जारी रॉकेट हमलों को बताया.
लेबनान के अधिकारियों के अनुसार, अब तक 1,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. वहीं पांच इज़रायली सैनिकों की भी मौत हुई है.
विभिन्न मोर्चों पर अब तक भारी जनहानि हुई है:
- ईरान में 1,900 से अधिक लोगों की मौत
- इज़रायल में 19 लोगों की मौत
- इराक में 80 सुरक्षाकर्मी मारे गए
- खाड़ी देशों में 20 लोगों की मौत
- वेस्ट बैंक में 4 लोगों की मौत
- 13 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं
जमीनी युद्ध की आशंका और तीखी बयानबाज़ी
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ़ ने कहा है कि उनकी सेना ‘अमेरिकी जमीनी सैनिकों का इंतज़ार कर रही है, ताकि उन्हें सबक सिखाया जा सके.’
दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके क्षेत्र में अमेरिकी सेना उतरी तो वह फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है और खाड़ी देशों में जमीनी हमले भी कर सकता है.
तेल संकट गहराया, वैश्विक असर
इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिख रहा है. ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो 28 फरवरी को हमले शुरू होने के बाद से करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है.
फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर ईरान की पकड़ ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है. दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है.
बातचीत की कोशिशें, लेकिन अनिश्चितता कायम
अमेरिका ने ईरान के सामने 15 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को शिपिंग के लिए खोलने की मांग शामिल है. वहीं ईरान ने अपनी पांच शर्तें पेश की हैं, जिनमें इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता बनाए रखना प्रमुख है.
पाकिस्तान ने घोषणा की है कि वह आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेज़बानी करेगा, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये वार्ता प्रत्यक्ष होगी या परोक्ष.
कूटनीतिक पहल: पाकिस्तान की मेज़बानी, लेकिन अनिश्चितता बरकरार
इस बीच, पाकिस्तान ने 29 मार्च को घोषणा की कि वह जल्द ही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेज़बानी करेगा. विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि दोनों देशों ने पाकिस्तान पर भरोसा जताया है और ‘आने वाले दिनों में सार्थक बातचीत’ कराई जाएगी. इस्लामाबाद में तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी इस संघर्ष के आर्थिक और वैश्विक असर, खासतौर पर सप्लाई चेन, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा कीमतों, पर चिंता जताई गई.
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित वार्ता प्रत्यक्ष होगी या परोक्ष. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत में प्रगति का दावा किया है, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान में संभावित वार्ता पर सीधे कुछ नहीं कहा. दूसरी ओर, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ़ ने इन कोशिशों को ‘ओट’ बताते हुए खारिज किया और आरोप लगाया कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के साथ यह समानांतर चल रहा है.
पाकिस्तान की इस सक्रिय भूमिका को लेकर भारत के रणनीतिक हलकों में चिंता जताई जा रही है. विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि इस्लामाबाद अब भी बड़े भू-राजनीतिक मामलों में अपनी जगह बनाने में सक्षम है, जो भारत की पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति पर सवाल खड़े करता है.
भारत पर असर: रसोई गैस संकट के बीच केरोसीन की अस्थायी वापसी
युद्ध का असर भारत में भी दिख रहा है. केंद्र सरकार ने घरेलू जरूरतों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत केरोसीन का अस्थायी आवंटन करने का फैसला किया है. यह 60 दिनों का आपातकालीन कदम है, जिसका मकसद एलपीजी (रसोई गैस) पर बढ़ते दबाव को कम करना है.
सरकारी आदेश के अनुसार, केरोसीन का उपयोग खाना पकाने और रोशनी दोनों के लिए किया जाएगा. इसके तहत उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी पीडीएस केरोसीन को अस्थायी तौर पर फिर से शुरू किया जा रहा है, जिन्हें पहले ‘केरोसीन मुक्त’ घोषित किया जा चुका था.
यह कदम संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर और कीमतों में उछाल के बीच, सरकार घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक इंतज़ाम कर रही है.
