नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार (30 मार्च) को बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. यह इस्तीफा उनके राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के दो सप्ताह बाद आया है.
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने बांकीपुर सीट से उनका इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को सौंपा. पीटीआई के अनुसार, प्रेम कुमार ने पुष्टि की है कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है.
बिहार सरकार में पूर्व मंत्री नितिन नवीन को जनवरी 2026 में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था.
नवीन ने अपने एक्स अकाउंट पर इस फैसले की घोषणा करते हुए लिखा, ‘पिछले 20 वर्षों में पिताजी, स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा द्वारा बनाए गए इस क्षेत्र को पारिवारिक भाव से सींचने, संवारने और विकास के पटल पर आगे ले जाने का निरंतर प्रयास किया है. मैंने सदैव अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य किया है. इसी का प्रतिफल है कि यहां की देवतुल्य जनता ने मुझे लगातार 5 बार सदन में अपना प्रतिनिधि चुनकर सेवा का सौभाग्य प्रदान किया.’
उन्होंने आगे लिखा, आज मैं बिहार विधानसभा के बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित सदस्य पद से इस्तीफा दे रहा हूं. पार्टी ने मुझे जो नई भूमिका दी है, उसके माध्यम से भी मैं अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए सदैव तत्पर एवं संकल्पित रहूंगा. मेरे कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता के साथ मेरा जो अटूट संबंध है, वह सदैव बना रहेगा और मुझे हमेशा नई ऊर्जा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देता रहेगा.’
बांकीपुर और बिहार के मेरे सभी परिवारजन एवं कार्यकर्ता साथी,
जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और दिनांक 27 अप्रैल 2006 को मैं पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत… pic.twitter.com/IHhLpd0aJD
— Nitin Nabin (@NitinNabin) March 30, 2026
दूसरी ओर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सोमवार (30 मार्च) को राज्य विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. यह जानकारी परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने दी.
जेडीयू के एमएलसी संजय गांधी ने नीतीश कुमार का इस्तीफा विधान परिषद में सौंपा. नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं.
नितिन नवीन और जदयू सुप्रीमो, दोनों ही 16 मार्च को संसद के उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए थे. नियमों के अनुसार, संसद के लिए चुने जाने के 14 दिनों के भीतर नीतीश को राज्य विधानमंडल की सदस्यता से इस्तीफा देना, और मुख्यमंत्री पद छोड़ना आवश्यक था. 27 मार्च को बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा था कि मुख्यमंत्री के पास इस्तीफा देने के लिए 30 मार्च तक का समय है.
द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 मार्च को बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा था कि राज्यसभा के लिए चुने जाने के बावजूद नीतीश कुमार अगले छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं.
उन्होंने कहा, ‘सांसद चुने जाने के बाद किसी को 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल के किसी एक सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना होता है. वे तय समय सीमा के भीतर इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन संविधान के प्रावधानों के अनुसार अगले छह महीने तक बिहार के मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं.’
संविधान के अनुच्छेद 101 और 190 के तहत बनाए गए ‘समवर्ती सदस्यता निषेध नियम, 1950’ के अनुसार, संसद और राज्य विधानमंडल दोनों के लिए निर्वाचित व्यक्ति को राज्य विधानसभा की सदस्यता से 14 दिनों के भीतर इस्तीफा देना होता है.
