ओडिशा की जेलों का हाल बदहाल; अत्यधिक भीड़, खुले में नहाने को मजबूर महिला क़ैदी: कैग रिपोर्ट

कैग की एक रिपोर्ट में ओडिशा की जेलों की बदहाल स्थिति का खुलासा किया गया है. इसके अनुसार, यहां अत्यधिक भीड़ है और महिला क़ैदियों को अव्यवस्था के चलते खुले में नहाने को मजबूर होना पड़ रहा है. रिपोर्ट यह भी बताती है कि जेल की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरण या तो उपलब्ध नहीं थे या काम नहीं कर रहे थे.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: कैग की एक रिपोर्ट बताती है कि ओडिशा के जेलों की स्थिति दयनीय है. यहांं अत्यधिक भीड़ है और अव्यवस्था के चलते महिला कैदियों को खुले में नहाने को मजबूर होना पड़ रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मंगलवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ओडिशा की 87 जेलों में से 31 जेलों में अत्यधिक भीड़ है.

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्यादा भीड़ के चलते जेलों में कैदियों को तंग स्थिति में रहना पड़ रहा है. यहां नहाने की व्यवस्था सही नहीं है, जिसके चलते महिलाएं खुले में नहाने को मजबूर हैं. वहीं, सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त गार्ड नहीं है और आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का अभाव भी है.

रिपोर्ट बताती है, ‘प्रति कैदी कम जगह उपलब्ध होने के कारण कैदियों के लिए तंग जगह में रहने की स्थिति उत्पन्न हो गई है. ऐसे कैदियों को मानदंडों के अनुसार सोने के लिए आवश्यक मानक स्थान और बुनियादी जीवनयापन की सुविधाओं से वंचित रखा गया है.’

ओडिशा मॉडल जेल नियमावली के अनुसार, प्रत्येक 10 कैदियों के लिए एक ढका हुआ स्नान घर होना चाहिए और निजता सुनिश्चित करने के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए.

हालांकि, कैग की रिपोर्ट में पाया गया कि 2,203 स्नान कक्षों की आवश्यकता के मुकाबले वास्तव में केवल 916 ही उपलब्ध थे. कुछ जेलों में महिला कैदी नहाने के लिए खुले चबूतरों का इस्तेमाल कर रही थीं.

कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि जेलों में अपर्याप्त स्नान कक्षों/शौचालयों के कारण कैदियों को स्वच्छता और स्वच्छ जीवन जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित रखा जा रहा है, और महिला कैदियों के लिए खुले स्नान कक्षों के मामलों से उनकी निजता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.

जबकि जेलों की सुरक्षा के लिए एक शिफ्ट में 3,515 कर्मचारियों की आवश्यकता थी. ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने केवल 1,680 पदों को ही मंजूरी दी, जबकि केवल 1,282 सुरक्षा कर्मचारी ही तैनात थे, जिससे 2,233 कर्मचारियों की कमी रह गई.

आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं

ऑडिट में कैग ने यह भी पाया कि जेल की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरण या तो उपलब्ध नहीं थे या काम नहीं कर रहे थे. कैग ने 15 जेलों में सुरक्षा संबंधी आवश्यक चीजों का सत्यापन किया और पाया कि चार जेलों में दरवाजों पर मेटल डिटेक्टर नहीं लगे थे.

इसी तरह जांच की गई 15 जेलों में उपलब्ध सात बैगेज स्कैनर में से केवल एक ही चालू था. साथ ही, कुछ जेलों में उपलब्ध मोबाइल जैमर भी काम नहीं कर रहे थे.

ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा उपकरणों की कमी के चलते कैदियों को जेलों में प्रवेश के दौरान स्कैन नहीं किया जा सका.

रिपोर्ट में बताया गया है कि भुवनेश्वर की विशेष जेल में 2020-23 के दौरान चलाए गए 46 तलाशी अभियानों में अधिकारियों ने 74 मोबाइल फोन, 56 सिम कार्ड, एक पेन ड्राइव, 26 खाली शराब की बोतलें और 1.76 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण कैदी जेलों से भाग रहे थे. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2020-23 की ऑडिट अवधि के दौरान ऐसी 29 घटनाएं हुईं. इनमें से 17 को पकड़ लिया गया, लेकिन 12 का अभी तक पता नहीं चल पाया है.

ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि कैदियों के फरार होने के बावजूद विभाग द्वारा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए, जैसे कि आवश्यक सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती और कर्मचारियों को आवश्यक उपकरण/सामान उपलब्ध कराना.

कैग ऑडिट में कैदियों के लिए अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं का भी इस ऑडिट में खुलासा हुआ, जिसमें बिस्तरों और क्लीनिकल सुविधाओं की कमी शामिल है.

इसमें यह भी बताया गया कि मानसिक समस्याओं से ग्रस्त कैदियों को मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर रखने के बजाय अन्य कैदियों के साथ रखा गया था.