लोकसभा में पेश होना था एफसीआरए संशोधन विधेयक, केरल में विरोध के बाद टला

एक अप्रैल को विवादित 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश होना था. विपक्षी दलों और चुनावी राज्य केरल में ईसाई समुदाय के नेताओं के विरोध के बीच केंद्र ने इसे पारित कराने की प्रक्रिया को टाल दिया है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर चुनाव से पहले केरल की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है.

संसद के बाहर विपक्षी दलों के सांसद एफसीआरए विधेयक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: विपक्षी दलों और चुनावी राज्य केरल में ईसाई समुदाय के नेताओं के विरोध के चलते केंद्र सरकार ने बुधवार (1 अप्रैल) को विवादित ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा में पेश करने और पारित कराने की प्रक्रिया फिलहाल टाल दिया.

यह कदम लोकसभा में संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह विपक्षी पार्टियों के विरोध के बीच उठाया गया; इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष पर चुनाव से पहले केरल की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया.

यह विधेयक बुधवार को पारित होने के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन संसद में विरोध के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रश्नकाल के दौरान कहा कि इसे आज विचार के लिए नहीं लिया जाएगा.

उन्होंने कहा, ‘केरल के सांसद इस विधेयक को गलत समझ रहे हैं और हंगामा कर रहे हैं. वे केरल में इसके बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘मैंने कल भी कांग्रेस नेताओं से कहा था और आज फिर कह रहा हूं कि इस बिल पर आज विचार नहीं किया जाएगा. दूसरी बात, वे केरल में इस बिल के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं.’

रिजिजू ने कहा कि हालांकि 2010 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार द्वारा इस कानून में एक बड़ा संशोधन किया गया था, जिसके बाद अन्य संशोधन भी हुए, लेकिन यह नया संशोधन ‘राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए, विदेशी चंदे के विनियमन और उसके सही इस्तेमाल के बारे में है, ताकि पैसे का दुरुपयोग न हो.’

हालांकि, इस विधेयक के आलोचकों का कहना है कि यह संशोधन उन एनजीओ और अन्य संस्थाओं पर सरकार का बहुत ज़्यादा नियंत्रण स्थापित करता है जो एफसीआरए रजिस्ट्रेशन के तहत काम करती हैं.

उन्होंने कहा, ‘यह एक अच्छा कदम है, यह किसी धर्म या किसी संगठन को निशाना नहीं बना रहा है. चुनावों को देखते हुए कांग्रेस और माकपा केरल की जनता को एफसीआरए के बारे में गुमराह कर रहे हैं. कृपया चुनावों के लिए सदन और केरल की जनता को गुमराह न करें.’

विपक्ष का आरोप: केंद्र एनजीओ और सामाजिक संगठनों को कमजोर करना चाहती है

कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी पार्टियों ने संसद के बाहर प्रस्तावित कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. विपक्षी सांसदों ने बैनर लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिन पर लिखा था, ‘एनजीओ और संस्थाओं को निशाना बनाना बंद करो’ और बिल को तुरंत वापस लेने की मांग की.

इस संशोधन विधेयक में कई अहम प्रावधान शामिल हैं. ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ में एक ‘नामित प्राधिकारी’ (designated authority) बनाने का प्रस्ताव है, जो उन एनजीओ की संपत्तियों पर अस्थायी या स्थायी नियंत्रण रख सकेगा जिनके एफसीआरए लाइसेंस रद्द, सरेंडर या समाप्त हो गए हैं.

इसमें ऐसी संपत्तियों का प्रबंधन करने और उनका निपटारा करने की शक्तियां भी शामिल हैं. यह फंड के इस्तेमाल के लिए समयसीमा भी तय करता है, निलंबन के दौरान संपत्तियों को विनियमित करता है, जुर्माने को तर्कसंगत बनाता है, और जांच शुरू करने के लिए केंद्र सरकार की पहले से मंज़ूरी लेना अनिवार्य करता है.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस विधेयक के जरिए एनजीओ और सामाजिक संगठनों को कमजोर करना चाहती है. पार्टी ने इसे ‘असंवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ’ बताया.

कांग्रेस ने एक बयान में कहा, ‘मोदी सरकार संसद में एफसीआरए संशोधन बिल को ज़बरदस्ती पास कराने की साज़िश रच रही है. इस फ़ैसले के ज़रिए भाजपा सरकार जानबूझकर देश के एनजीओ और सामुदायिक संगठनों को खत्म करना चाहती है.’

बयान में आगे कहा, ‘इतना ही नहीं – सरकार जानबूझकर यह सब ऐसे समय में कर रही है, जब विपक्षी पार्टियां अलग-अलग राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में व्यस्त हैं. मोदी सरकार का यह फ़ैसला पूरी तरह से असंवैधानिक और लोकतंत्र के खिलाफ़ है. हम किसी भी कीमत पर इस बिल को पास नहीं होने देंगे.’

इससे पहले कांग्रेस सांसद और पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि पार्टी के सांसदों को तुरंत दिल्ली बुलाया गया है ताकि विधेयक को पारित होने से रोका जा सके.

गौरतलब है कि यह विधेयक चुनाव वाले राज्य केरल में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभरा है, जहां सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) और विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) दोनों ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित संशोधन पर फिर से विचार करने को कहा है. ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि ईसाई समुदाय ने बिल के अलग-अलग प्रावधानों पर अपनी चिंता और गुस्सा ज़ाहिर किया है.

केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) और कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) दोनों ने पहले ही इस विधेयक को लेकर चिंता ज़ाहिर की है, जबकि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनके हस्तक्षेप की मांग की है और यह मांग की है कि संशोधन बिल में संपत्तियों पर कब्ज़े से जुड़े प्रावधानों को वापस लिया जाए.

कुल मिलाकर बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच सरकार ने फिलहाल इस विवादित विधेयक को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है.