विरोध के बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बीजू पटनायक पर टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगी

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने हाल ही में दावा किया था कि ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक 1960 के दशक में चीन के ख़िलाफ़ युद्ध के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और सीआईए के बीच कड़ी थे. इस मामले के तूल पकड़ने और उनकी टिप्पणी की चौतरफा आलोचना होने के बाद अब निशिकांत दुबे ने माफ़ी मांगी है.

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार (1 अप्रैल) को अपने उस दावे के लिए बिना शर्त माफी मांगी, जिसमें उन्होंने कहा था कि ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक 1960 के दशक में चीन के खिलाफ युद्ध के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और सीआईए के बीच कड़ी थे.

झारखंड की गोड्डा सीट से लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा हाल ही में 27 मार्च को बीजू पटनायक पर की गई  विवादास्पद टिप्पणी से राज्य में राजनीतिक तनाव पैदा हो गया था. इसे लेकर भाजपा के अंदर और बाहर दोनों जगह उनकी आलोचना हुई थी. विपक्ष, विशेषकर बीजू जनता दल (बीजद) ने इस टिप्पणी का जोरदार विरोध किया था.

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्कल दिवस (ओडिशा राज्य स्थापना दिवस ) पर पटनायक की सराहना करते हुए उनके जीवन को शक्ति, साहस और राष्ट्र निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया था, जिसके बाद निशिकांत दुबे बैकफुट पर नज़र आए और उन्होंंने उत्कल दिवस के मौके पर ही अपने बयान के लिए माफी भी मांग ली.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, अपनी माफी में भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने कहा कि उनके द्वारा नेहरू के बारे में की गई टिप्पणी को ‘गलती से बीजू बाबू के बारे में समझ लिया गया.’

उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘पिछले सप्ताह मीडिया से बात करते हुए मैंने नेहरू गांधी परिवार के कारनामों के क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भारत के अग्रणी नेताओं में स्थान रखने वाले आदरणीय बीजू पटनायक जी के संदर्भ में मेरी बातों से गलत अर्थ निकाला गया. पहले तो यह वक्तव्य मेरा व्यक्तिगत है. नेहरू जी के ऊपर मेरे विचार को बीजू बाबू के ऊपर समझा गया. बीजू बाबू हमारे लिए हमेशा ऊंचे कद के स्टेट्समैन रहे हैं और रहेंगे. मेरे वक्तव्य से यदि भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं बिना शर्त क्षमा चाहता हूं.’

निशिकांत दुबे ने क्या कहा था?

27 मार्च को नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिकी मदद और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के सहयोग से युद्ध लड़ा. उन्होंने उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को अमेरिकी सरकार, सीआईए और नेहरू के बीच कड़ी बताया था.

दुबे ने आगे आरोप लगाया था कि बीजू पटनायक ने ओडिशा के चारबतिया एयर बेस को यू-2 जासूसी विमानों के लिए बेस बनाने में मदद की. उन्होंने दावा किया था कि 1963 से 1979 तक इस बेस पर अमेरिकी सैन्य मौजूदगी रही.

दुबे ने नेहरू के कुछ कथित पत्र भी जारी किए थे और कहा था कि कांग्रेस को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए.

विरोध

मालूम हो कि बीजू पटनायक को ओडिशा की अस्मिता और राष्ट्रीय नायक माना जाता है. वे स्वतंत्रता सेनानी थे जाने-माने पायलट थे, जिन्हें 1947 में इंडोनेशियाई सेनानियों को बचाने के लिए जकार्ता उड़ान जैसे मिशन के लिए जाना जाता है. वे दो बार (1961-63, 1990-95) ओडिशा के मुख्यमंत्री भी रहे.

दुबे के बयान को लेकर ओडिशा में भारी विरोध देखने को मिला. युवा सड़कों पर उतर आए और छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा सांसद का पुतला फूंका.

राज्य विधानसभा में भी बीजू जनता दल के विधायकों ने भाजपा सांसद की इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई और विरोध करते हुए सदन में जमकर हंगामा किया. इस विरोध में बीजद को कांग्रेस के सदस्यों का भी साथ मिला. सदन में ‘बीजू बाबू अमर रहें’ और ‘ओडिया अस्मिता का अपमान बर्दाश्त नहीं, जैसे नारे लगाए गए और कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया.

उनके बेटे और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने दुबे के इस बयान पर  तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘बीजू बाबू पर ऐसी बेहूदा और झूठी बातें सुनकर मुझे हैरानी हुई. मुझे नहीं लगता कि निशिकांत दुबे को इतिहास की जानकारी है. चीनी हमले के समय नेहरू जी ने बीजू बाबू को अपने ऑफिस के बगल में कमरा दिया था ताकि वे रणनीति बनाने में मदद कर सकें. मुझे लगता है कि ऐसी टिप्पणी करने के लिए इस सांसद को मानसिक डॉक्टर की सलाह की जरूरत है.’

इस बयान का असर देश की संसद में भी देखने को मिला, जहां बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने राज्यसभा से इस अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में वॉकआउट किया.

उन्होंने दुबे की अध्यक्षा वाली सूचना एवं संचार संबंधी संसदीय स्थायी समिति से भी इस्तीफा दे दिया. पात्रा ने कहा कि वे ऐसे व्यक्ति के अधीन काम नहीं कर सकते, जिसने बीजू पटनायक जैसे महान नेता का अपमान किया.

वहीं, भाजपा के ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा ने भी दुबे की टिप्पणियों की निंदा की और कहा कि बीजू पटनायक की देशभक्ति पर सवाल उठाना काल्पनिक और पूरी तरह हास्यास्पद है. विभिन्न दलों के नेताओं ने भी बीजू पटनायक का बचाव किया और दुबे के बयान को ओडिशा की भावनाओं पर हमला बताया.

गौरतलब है कि निशिकांत दुबे अक्सर अपने विवादित बयानों के चलते सुर्खियों में रहते हैं. वे कांंग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों के सदस्यों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत पर भी विवादित बयान दे चुके हैं.

ज्ञात हो कि पिछले साल अपने एक बयान में उन्होंने कहा था कि देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट ज़िम्मेदार है.

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि इस देश में जितने गृह युद्ध हो रहे हैं उसके ज़िम्मेदार केवल (तत्कालीन) चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना साहब हैं.