नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने गुरुवार (2 अप्रैल) को लोकसभा में जानकारी दी कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के लिए स्थानांतरित किए गए पेड़ों में से बड़ी संख्या जीवित नहीं रह सके. कुल 3,609 पेड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लगाया गया था, जिनमें से 1,545 पेड़ यानी लगभग 43 प्रतिशत प्रत्यारोपण के बाद नष्ट हो गए.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के सवाल के जवाब में आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने बताया कि इन पेड़ों को परियोजना के विभिन्न हिस्सों से हटाकर दूसरी जगह लगाया गया था. इनमें सबसे अधिक 1,734 पेड़ कर्तव्य भवन 1, 2 और 3 के निर्माण स्थल से हटाए गए थे. इसके अलावा नए संसद भवन परिसर से 402, उपराष्ट्रपति एन्क्लेव से 390 और प्रधानमंत्री कार्यालय व आवास परियोजना से 143 पेड़ स्थानांतरित किए गए थे.
सरकार ने यह भी बताया कि पेड़ों की कटाई की भरपाई के लिए निर्धारित नियमों के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया. इसके तहत बदरपुर स्थित एनटीपीसी इको पार्क में 24,450 पेड़ लगाए गए, जबकि घिटोरनी क्षेत्र में 1,730 पौधे रोपे गए.
लिखित जवाब के अनुसार, वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच पेड़ों के प्रत्यारोपण और क्षतिपूरक वृक्षारोपण पर कुल 5.29 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
गौरतलब है कि आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्लूडी) के माध्यम से वर्ष 2019 में सेंट्रल विस्टा परियोजना की शुरुआत की थी. इस व्यापक योजना के तहत नए संसद भवन, उपराष्ट्रपति एन्क्लेव, कार्यपालिका एन्क्लेव (जिसमें प्रधानमंत्री का कार्यालय और आवास शामिल है) और ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ के नाम से 10 नए कार्यालय भवन (कर्तव्य भवन) निर्मित किए जाने हैं.
इन नए भवनों का निर्माण मौजूदा सरकारी इमारतों को ध्वस्त कर उनकी जगह किया जा रहा है. अब तक संसद भवन, उपराष्ट्रपति एन्क्लेव, कर्तव्य भवन 1, 2 और 3 तथा ‘सेवा तीर्थ’ नाम से कार्यपालिका एन्क्लेव का पहला चरण पूरा हो चुका है. प्रधानमंत्री आवास और शेष सात कर्तव्य भवनों पर काम अभी जारी है. इसके अलावा, योजना के तहत नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक को एक राष्ट्रीय संग्रहालय में बदलने का प्रस्ताव भी शामिल है.
