अवैध खनन केस में जज को प्रभावित करने की कोशिश के लिए भाजपा विधायक के ख़िलाफ़ अवमानना कार्यवाही शुरू

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने सात महीने पहले अवैध खनन से जुड़े एक मामले में एक न्यायाधीश से संपर्क करने की कोशिश की थी. अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पाठक के ख़िलाफ़ स्वत: संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है.

भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक. (फोटो साभार: फेसबुक/@sanjaypathak.in)

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह विजयराघवगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ स्वतःसंज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करे. विधायक पर अवैध खनन से जुड़े एक मामले के संबंध में एक मौजूदा जज से अनुचित तरीके से संपर्क करने का आरोप है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की एक पीठ ने सात महीने पहले न्यायाधीश से संपर्क करने के प्रयास को लेकर विधायक के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज करने का आदेश दिया है.

गुरुवार को जारी आदेश में न्यायालय ने कहा, ‘प्रथमदृष्टया हमें लगता है कि प्रतिवादी का आचरण आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आ सकता है. अतः इस याचिका का निपटारा करते हुए रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना याचिका दर्ज की जाए और इसे 6 अप्रैल को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए.’

इस आदेश में संबंधित न्यायाधीश जस्टिस विशाल मिश्रा के उस आदेश का उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने इस मामले में सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. न्यायालय ने कहा कि 1 सितंबर 2025 के आदेश में न्यायाधीश ने उल्लेख किया था कि उन्हें इस मामले पर चर्चा के लिए फोन करने का प्रयास किया गया, जिसके बाद उन्होंने इस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया.

पिछले वर्ष सितंबर में जस्टिस मिश्रा ने कथित अवैध खनन मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. उस समय उन्होंने बताया था कि पाठक ने ‘इस विशेष मामले पर चर्चा करने के लिए’ उन्हें फोन करने की कोशिश की थी, और इसलिए वह इस याचिका की सुनवाई के इच्छुक नहीं हैं.

यह मामला हाईकोर्ट में दायर एक रिट याचिका से जुड़ा है, जिसमें अवैध खनन के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, आशुतोष दीक्षित नामक एक व्यक्ति ने इन आरोपों को लेकर भोपाल स्थित आर्थिक अपराध विंग (ईओडब्ल्यू) से संपर्क किया था. इसके बाद उन्होंने ईओडब्ल्यू द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया.

याचिका में आरोप लगाया गया था कि भाजपा विधायक से जुड़ी तीन कंपनियां जबलपुर जिले के सिहोरा क्षेत्र और वन भूमि में ‘अवैध और अत्याधिक खनन’ कर रही हैं.

दीक्षित ने कहा कि ईओडब्ल्यू एक निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी करने में विफल रहा. वहीं, पाठक ने हाईकोर्ट में एक आवेदन दायर कर इस मामले में हस्तक्षेप करने की अनुमति मांगी और कहा कि उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए.

पाठक द्वारा जज से संपर्क करने की कोशिश किए जाने के बाद दीक्षित ने एक रिट याचिका दायर कर अदालत को प्रभावित करने की इस कोशिश का न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की.

इस याचिका का अब इस निर्देश के साथ निपटारा कर दिया गया है कि इस मामले को स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना ​​के मामले के रूप में लिया जाए.

संजय सत्येंद्र पाठक, जो पूर्व में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में राज्य मंत्री रह चुके हैं, कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक हैं. उनसे पहले उनके पिता सत्येंद्र पाठक इसी सीट से कांग्रेस विधायक रहे थे और दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री भी थे.

राज्य के सबसे अमीर नेताओं में गिने जाने वाले संजय पाठक ने 2014 में कांग्रेस और विधानसभा से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा था. इसके बाद उन्होंने 2015 में विजयराघवगढ़ से चुनाव जीता. वह 2016 से 2018 तक शिवराज सिंह चौहान सरकार में मंत्री रहे और 2018 तथा 2023 के चुनाव भी इसी सीट से भाजपा के टिकट पर जीते.