नई दिल्ली: हाल के दिनों में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सीईआरटी-इन) की ओर से जारी पत्राचार केंद्र सरकार द्वारा जारी विवादास्पद टेकडाउन आदेशों के पीछे की सोच और उन मानकों की झलक देता है, जिनके तहत मानवाधिकार से जुड़े कामों को भी ‘भारत-विरोधी यानी एंटी-इंडिया’ क़रार दिया जा रहा है.
द वायर को मिली जानकारी के अनुसार, 9 मार्च को सीईआरटी-इन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से जम्मू-कश्मीर पर पोस्ट करने वाले सात हैंडल्स के ‘पिछले तीन महीनों के बेसिक सब्सक्राइबर रजिस्ट्रेशन और एक्सेस लॉग डिटेल्स (फोन नंबर/ईमेल, आईपी एड्रेस, तारीख और समय, पोर्ट नंबर और जीपीएस जानकारी)’ मांगी थी.
सरकार द्वारा अपनाए गए लहजे और दस्तावेजों से स्पष्ट है कि ‘एंटी-इंडिया प्रोपगैंडा फैलाने, अलगाववादी नैरेटिव को बढ़ावा देने और जम्मू-कश्मीर में शांति भंग करने की कोशिश’ जैसे आरोप असल में उन लोगों पर लगाए जा रहे हैं, जो घाटी में मानवाधिकार की स्थिति पर खुलकर बात कर रहे हैं.
इस मामले के केंद्र में मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज हैं, जिन्हें 2021 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था. परवेज मानवाधिकार उल्लंघनों की निगरानी, जांच और रिपोर्टिंग करने वाली संस्था- जम्मू एंड कश्मीर कोलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी के साथ जुड़े रहे हैं. कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों, जिनमें यूनाइटेड नेशंस वर्किंग ग्रुप ऑन आर्बिट्रेरी डिटेंशन शामिल है, ने उनकी रिहाई की मांग करते हुए उनकी हिरासत को ‘मनमाना’ और अन्यायपूर्ण बताया है.
सीईआरटी-इन द्वारा सूचीबद्ध खातों में से एक @FreeKhurram2021 है, जो परवेज की गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी साझा करता है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा एक्स को भेजे गए पत्राचार में शामिल स्क्रीनशॉट्स में कारवां मैगज़ीन और कश्मीर टाइम्स जैसे वेब पोर्टलों की खबरों के लिंक हैं, जिनमें परवेज और पत्रकार इरफान मेहराज की गिरफ्तारी का जिक्र है.
विडंबना यह है कि इनमें से एक पोस्ट में कश्मीर में सिविल सोसाइटी की आवाजों को दबाने और उसके परिणामों पर भी बात की गई थी.
मंत्रालय ने इस हैंडल के बारे में कहा, ‘यह अकाउंट कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़ी भारत विरोधी धारणा को बिना सत्यापन के बढ़ावा देता है, जिससे भारत सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ नफरत और शत्रुता भड़काने का प्रयास प्रतीत होता है.’
जहां यह हैंडल अभी भी भारत में उपलब्ध है, वहीं सूची में शामिल एक अन्य अकाउंट @BasharatRehan1 को ब्लॉक कर दिया गया है और @Friendsofkmr को संभवतः हटा दिया गया है.
एक अनाम अकाउंट के अलावा सीईआरटी-इन ने राकिब नाइक के अकाउंट का भी उल्लेख किया है, जो सेंटर फॉर स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट (सीएसओएच) के कार्यकारी निदेशक हैं.
सीईआरटी-इन ने एक्स से कहा है, ‘यह हैंडल बिना सत्यापन के भारत सरकार द्वारा कथित उत्पीड़न, मीडिया दमन और गैरकानूनी कार्रवाइयों के झूठे दावों को बढ़ावा देता है, जिससे भ्रामक धारणा तैयार होती है. साथ ही, यह हैंडल ऐसे अन्य हैंडल्स की सामग्री को साझा और प्रचारित करता है, जो लगातार भारत को नकारात्मक रूप में पेश करते हैं.’
फिलहाल यह अकाउंट डिलीट किया जा चुका है.
मंत्रालय द्वारा सूचीबद्ध नाइक के पोस्ट्स में आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइज़र की आलोचना, द चेनाब टाइम्स के समर्थन और हिंदू राष्ट्रवाद व दुष्प्रचार पर (सीएसओएच) के शोध से जुड़े पोस्ट शामिल थे.
सूची में अन्य जिन एकाउंट्स को चिह्नित किया गया है, उनमें @ZaffarQuraishi, @nasirkhanukpnp और @Shaista_safi शामिल हैं. मंत्रालय ने इन पर ‘शत्रुता और अशांति को बढ़ावा देने’ का आरोप लगाया है.
हालांकि सूची में शामिल कुछ हैंडल्स की पोस्ट आपत्तिजनक मानी जा सकती हैं, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा उन्हें मानवाधिकार के पक्ष में की गई पोस्ट्स के साथ समान ठहराना कई गंभीर सवाल खड़े करता है.
यह मामले ऐसे समय में सामने आए हैं, जब केंद्र सरकार आईटी अधिनियम, 2000 के तहत सरकार की आलोचना या व्यंग्य करने वाली सोशल मीडिया सामग्री पर लगातार हटाने के (टेकडाउन) आदेश जारी कर रही है.
दिलचस्प बात यह है कि एक्स को भेजे गए इस पत्राचार के एक दिन बाद ही मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया, जिसके तहत सोशल मीडिया पर यूजर्स, इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा साझा की जाने वाली समाचार सामग्री को ब्लॉक करने का प्रावधान किया गया है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
