नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों का शनिवार (4 अप्रैल) को 36वां दिन है. युद्ध अब केवल ईरान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर क्षेत्र के अन्य देशों में भी दिखाई देने लगा है. ताज़ा घटनाक्रम में दो अमेरिकी सैन्य विमान अलग-अलग घटनाओं में मार गिराए गए हैं, जो इस संघर्ष की शुरुआत के बाद पहली ऐसी घटना मानी जा रही है.
इन घटनाओं में एक अमेरिकी सैनिक को बचा लिया गया, जबकि दूसरे के लापता होने की खबर है. यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने एक संबोधन में दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान को ‘पूरी तरह तबाह’ कर दिया है.
युद्ध के मानवीय असर को लेकर भी आंकड़े सामने आए हैं. पेंटागन के अनुसार, अब तक कुल 365 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं. इनमें 247 थलसेना (आर्मी) के जवान, 63 नौसेना (नेवी) के कर्मी, 19 मरीन और 36 वायुसेना (एयर फोर्स) के जवान शामिल हैं.
घायलों में बड़ी संख्या मध्यम और वरिष्ठ स्तर के सैनिकों की है, करीब 200 सैनिक इसी श्रेणी के हैं, जबकि 85 अधिकारी और 80 जूनियर रैंक के सैनिक घायल हुए हैं. फिलहाल इस युद्ध में 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की गई है. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि हाल में मार गिराए गए विमानों से जुड़े सैनिक इन आंकड़ों में शामिल हैं या नहीं.
इस बीच, युद्ध का असर खाड़ी देशों तक भी पहुंच गया है. दुबई प्रशासन के मुताबिक, इंटरसेप्ट किए गए ड्रोन के मलबे से दो इमारतों को नुकसान पहुंचा है. इनमें से एक इमारत अमेरिकी टेक कंपनी ‘ओरेकल’ से जुड़ी बताई जा रही है. राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ओरेकल समेत 17 अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है. ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां उसके खिलाफ ‘जासूसी और आतंकी गतिविधियों’ में शामिल रही हैं.
इससे पहले भी ईरानी ड्रोन हमलों में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में अमेज़न वेब सर्विसेज़ से जुड़ी तीन इकाइयों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आ चुकी हैं.
पश्चिम एशिया में जारी यह संघर्ष अब एक व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप लेता जा रहा है, जिसके सैन्य, आर्थिक और नागरिक असर लगातार गहराते दिख रहे हैं.
