नई दिल्ली: तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशियों की सूची में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के नाम के न होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की सियासी अटकलें लगाई जा रही थी, जिस पर अन्नामलाई ने शनिवार (4 अप्रैल) को स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने खुद ही चुनाव न लड़ने का फैसला किया था, उनका टिकट काटा नहीं गया है.
मालूम हो कि अन्नामलाई भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हुआ करते थे, जिन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा देकर 2020 में भाजपा का दामन थाम लिया था. वह दक्षिण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसंपर्क अभियान से प्रमुख रूप से जुड़े रहे हैं, अक्सर उन्हें पीएम की प्रमुख रैलियों में देखा जा सकता है.
वे दक्षिण भारत में भाजपा के सबसे प्रभावी नेताओं में से एक माने जाते हैं, जो भारी भीड़ को आकर्षित करने का माद्दा रखते हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, चेन्नई हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए अन्नामलाई ने भाजपा नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि पार्टी ने उनके फैसले का सम्मान किया है.
उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ही पार्टी आलाकमान को लिखित रूप में सूचित कर दिया था कि वे किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए प्रचार अभियान में जुटेंगे.
अन्नामलाई ने कहा, ‘मैंने पहले ही कोर कमेटी को लिखित रूप में सूचित कर दिया था कि मैं किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ूंगा. यह कहना गलत है कि मुझे टिकट नहीं मिला; सच्चाई यह है कि मैंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया.’
उन्होंने आगे कहा, ‘यह मीडिया में चर्चा का विषय बन गया है, इसलिए मैं स्पष्ट कर रहा हूं. जब मैंने चुनाव लड़ने में कोई रुचि नहीं दिखाई, तो नेतृत्व मुझे टिकट कैसे दे सकता था? अगर मैंने चुनाव लड़ने का फैसला किया होता, तो यह मायने नहीं रखता कि मैं किसी भी सीट से चुनाव लड़ सकता था.’
भाजपा नेता ने कहा, ‘मैं भाजपा नेतृत्व का आभारी हूं कि उन्होंने मेरे फैसले का सम्मान किया और मुझे एनडीए गठबंधन के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करने का अवसर दिया.’
उल्लेखनीय है कि यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब इस बात की अटकलें लगाई जा रही थीं कि अन्नामलाई को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के साथ भाजपा के गठबंधन के कारण आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में टिकट नहीं मिला है.
पूर्व में अन्नामलाई और एआईएडीएमके के बीच तल्ख रिश्ते रहे हैं. यह अन्नामलाई ही थे, जो तमिलनाडु में एआईएडीएमके के साथ गठबंधन के खिलाफ थे. माना जाता है कि इसी कारण से अन्नामलाई को पहले प्रदेश अध्यक्ष पद से भी हटाया गया था. उनकी जगह पर नैनार नागेंद्रन को कमान दी गई थी, जो एआईएडीएमके के प्रति नरम रुख रखते हैं.
अन्नामलाई द्वारा सीएन. अन्नादुरई पर की गई टिप्पणियों के बाद तमिलनाडु में भाजपा और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन को लेकर कई बार मतभेद सामने आए थे.
ज्ञात हो कि कर्नाटक में आईपीएस अधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ‘सिंघम’ के नाम से जाने जाने वाले अन्नामलाई ने 2021 में तमिलनाडु इकाई के प्रमुख का पदभार संभालने के बाद भाजपा में तेजी से प्रगति की. उन्होंने संगठनात्मक प्रयासों का नेतृत्व किया और 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले ‘एन मन, एन मक्कल’ यात्रा सहित कई जनसंपर्क अभियानों का संचालन किया.
2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ा था और पार्टी 11 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करने में कामयाब रही थी. हालांकि, उसे एक भी सीट नहीं मिली.
तमिलनाडु में आगामी 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें एनडीए गठबंधन के तहत एआईडीएमके 234 सीटों में से 169 पर मैदान में उतरेगी, जबकि भाजपा 27 सीटों पर, पट्टली मक्कल कच्ची (पीएमके) 18 पर, अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) 11 पर, तमिल मानिला कांग्रेस पांच पर, इंडिया जननायगा कच्ची (आईजेके) एक पर और पुरच्ची भरथम एक सीट पर चुनाव लड़ेगी.
