‘रेल नीर घोटाले’ से जुड़े सवालों पर जानकारी से इनकार: सीआईसी ने आईआरसीटीसी को लगाई फटकार

रेलवे टेंडर में शामिल कंपनियों के ख़िलाफ़ जांच से जुड़ी जानकारी न देने पर केंद्रीय सूचना आयोग ने आईआरसीटीसी को फटकार लगाई है. आयोग ने यह कहते हुए कि सिर्फ क़ानून की धारा का हवाला देना पर्याप्त नहीं, बल्कि ठोस कारण देना ज़रूरी है, मामले में नया, और स्पष्ट जवाब मांगा है.

(फोटो साभार: विकिपीडिया)

नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने भारतीय रेलवे की खानपान इकाई आईआरसीटीसी को एक आरटीआई मामले में कड़ी फटकार लगाई है. मामला उन कंपनियों से जुड़ी जानकारी देने से इनकार का है, जिन्होंने रेलवे के टेंडर में हिस्सा लिया था और जिन पर कथित तौर पर ‘रेल नीर घोटाले’ व अन्य मामलों में केंद्रीय एजेंसियों की जांच चल रही थी.

दरअसल, आरटीआई आवेदक ने पूछा था कि क्या टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों ने अपने दस्तावेजों में यह स्पष्ट किया था कि उनके खिलाफ सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले दर्ज हैं या नहीं. आवेदन में यह भी जानने की कोशिश की गई थी कि क्या कंपनियों ने यह खुलासा किया कि वे 2015 के चर्चित ‘रेल नीर घोटाले’ में आरोपी हैं, जिसमें सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी.

इस घोटाले में निजी केटरिंग कंपनियों पर आरोप था कि उन्होंने राजधानी और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में निर्धारित ‘रेल नीर’ की जगह सस्ता बोतलबंद पानी सप्लाई किया, जिससे रेलवे को करीब 19.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था.

आरटीआई में यह भी पूछा गया था कि क्या कंपनियों ने ईडी द्वारा दर्ज मामलों, छापेमारी, नकदी जब्ती, और कोर्ट में चार्जशीट या शिकायत दाखिल होने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की थीं. कुल मिलाकर, आवेदन का उद्देश्य यह जानना था कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में भाग लेते समय कंपनियां अपने खिलाफ चल रही जांच के बारे में कितनी पारदर्शिता बरतती हैं.

हालांकि, आईआरसीटीसी ने इस जानकारी को देने से इनकार कर दिया.

उसने अपने जवाब में कहा कि मांगी गई जानकारी आरटीआई कानून की धारा 8(1)(d) के तहत आती है, जिसके अनुसार व्यावसायिक गोपनीयता, व्यापारिक रहस्य या बौद्धिक संपदा से जुड़ी सूचनाएं सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं, यदि उनके खुलासे से किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंचता हो.

सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने इस तर्क को चुनौती देते हुए कहा कि यह जानकारी ‘बड़े सार्वजनिक हित’ से जुड़ी है और इसे गलत तरीके से रोका गया है. वहीं, आईआरसीटीसी के अधिकारियों ने अपने जवाब का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने कानून के तहत उचित छूट का हवाला दिया है और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने भी उनके फैसले को बरकरार रखा था.

मामले की सुनवाई के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने आईआरसीटीसी के जवाब को अपर्याप्त माना. आयोग ने कहा कि केवल किसी धारा का हवाला देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी बताना जरूरी है कि वह धारा मांगी गई जानकारी पर कैसे लागू होती है.

आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस कारण बताए छूट का हवाला देना आरटीआई कानून के अनुरूप नहीं है. साथ ही यह भी कहा कि सूचना न देने का जिम्मा पूरी तरह संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण पर होता है, जिसे यह साबित करना होता है कि छूट लागू क्यों है.

आखिरकार, आयोग ने आईआरसीटीसी के जवाब को कानून के अनुरूप न मानते हुए उसे आरटीआई आवेदन पर दोबारा विचार करने और एक नया, कारण सहित जवाब देने का निर्देश दिया.