ओडिशा: बॉक्साइट खदान के विरोध में आदिवासियों का प्रदर्शन हिंसक हुआ, 40 पुलिसकर्मी घायल

ओडिशा में रायगढ़ा ज़िले में सिजीमाली बॉक्साइट खदान वेदांता कंपनी को आवंटित किया गया है, जिसका लंबे समय से आदिवासी विरोध कर रहे हैं. मंगलवार तड़के काशीपुर ब्लॉक के सागाबारी गांव में पुलिस ने वेदांता से जुड़े खनन कार्यों के लिए बनाई जा रही सड़क की सुरक्षा के लिए जबरन घुसने की कोशिश की, तब जो ग्रामीण पुलिस प्रवेश को रोकने के लिए रात भर से पहरा दे रहे थे, इसका विरोध करने लगे. इसके बाद स्थिति बिगड़ गई.

सिजीमाली बॉक्साइट खदान का विरोध कर रहे आदिवासी. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: ओडिशा के रायगढ़ा जिले में सिजीमाली बॉक्साइट खदान तक सड़क निर्माण को लेकर मंगलवार (7 अप्रैल) को आदिवासियों के साथ हुई झड़प में लगभग 50 लोग, जिनमें 40 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं, घायल हो गए.

ख़बरों के अनुसार, रायगढ़ा ज़िले के काशीपुर ब्लॉक के सागाबारी गांव में तड़के करीब 3 बजे झड़पें शुरू हो गईं, जब बड़ी संख्या में तैनात पुलिस ने वेदांता लिमिटेड से जुड़े खनन कार्यों को आसान बनाने के लिए बनाई जा रही सड़क के निर्माण को सुरक्षित करने के मकसद से ज़बरदस्ती अंदर घुसने की कोशिश की.

ग्रामीण, जो पुलिस के प्रवेश को रोकने के लिए रात भर पहरा दे रहे थे, इसका विरोध करने लगे, जिससे दोनों पक्षों में लोग घायल हो गए.

प्रशासन द्वारा लोगों के जमावड़े को रोकने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई, जिससे ग्रामीण और अधिक उग्र हो गए और विरोध तेज हो गया, जो खनन परियोजना को रोकने की मांग कर रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पुलिस ने बताया कि सड़क निर्माण रोकने की कोशिश में प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिस और ज़िला प्रशासन के अधिकारियों पर पत्थर, तलवार, कुल्हाड़ी और अन्य धारदार हथियारों से हमला किया.

काशीपुर इलाके के स्थानीय लोग सिजीमाली बॉक्साइट खदान परियोजना का तब से विरोध कर रहे हैं, जब से राज्य सरकार ने इसे एक निजी कंपनी को सौंप दिया है.

इसी कारण रायगढ़ा जिले के काशीपुर ब्लॉक के सागाबारी गांव में सड़क निर्माण के खिलाफ आदिवासियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया.

पीटीआई ने एडीजी संजय कुमार के हवाले से बताया, ‘घटना में घायल हुए 40 पुलिसकर्मियों में से 10 के सिर में चोट लगी है और उन्हें रायगढ़ा जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश की, तो उन्होंने पत्थर और ईंटें फेंकीं और पुलिस पर हमला किया.’

एक अधिकारी ने बताया कि रायगड़ा के कलेक्टर कुलकर्णी आशुतोष सी. मौके पर मौजूद थे और आंदोलनकारी आदिवासियों के साथ बातचीत कर रहे थे.

एक अधिकारी ने बताया कि ज़िला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सागाबारी गांव में निषेधाज्ञा लागू कर दी है.

ज्ञात हो कि ओडिशा के रायगढ़ा और कालाहांडी जिलों में प्रस्तावित सिजीमाली बॉक्साइट खदान 1,549 हेक्टेयर इलाके में फैला हुआ है, जिसे मार्च 2023 में राज्य सरकार ने वेदांता प्राइवेट लिमिटेड को 50 वर्ष के लिए खनन पट्टा आवंटित किया है.

लंबे समय से ‘मां माटी माली सुरक्षा मंच’ के तहत संगठित स्थानीय आदिवासी और दलित समुदाय इसका विरोध कर रहे हैं. उनका तर्क है कि यह परियोजना उनकी आजीविका, जल स्रोतों और सिजीमाली पहाड़ियों की पवित्रता के लिए खतरा है – जो उनके आराध्य देव ‘तिज राजा’ का निवास स्थान है.

वहीं, समाजवादी जन परिषद के महासचिव अफ़लातून ने घटना को लेकर सामने आई रिपोर्टों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘सागबाड़ी में पिछले तीन दिनों से सैकड़ों ग्रामीण खनन परियोजना के लिए सड़क निर्माण का विरोध कर रहे थे और काम को रोक रखा था. मार पीट की घटना मंगलवार की बताई जा रही है, उस दिन वहां कोई झड़प नहीं हुई है.’

उन्होंने आरोप लगाया कि रात से ओडिशा पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने कण्टामाल गांव में ‘बर्बर दमन’ किया. उनके अनुसार, पुरुष पुलिसकर्मियों और उनके साथ मौजूद ‘कंपनी से जुड़े लोगों’ ने महिलाओं के साथ मारपीट की. उन्होंने यह भी दावा किया कि ग्रामीणों के पास आंसू गैस के इस्तेमाल के सबूत हैं, जिन्हें वीडियो में देखा जा सकता है.

अफ़लातून ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद कलेक्टर कुलकर्णी आशुतोष सी. ने ग्रामीणों के प्रति अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि कण्टामाल के ग्रामीण अपने गांव छोड़ने को तैयार नहीं हैं और विरोध जारी रखे हुए हैं.

उन्होंने मीडिया रिपोर्टों में ग्रामीणों को हिंसक बताए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह पुलिस और कंपनी की ‘एकतरफा जानकारी’ पर आधारित है, जिसका वे खंडन करते हैं.

(नोट: इस ख़बर को समाजवादी जन परिषद का बयान जोड़ने के लिए संपादित किया गया है.)