डीजीसीए ने लंबी दूरी की उड़ानों के लिए पायलटों की ड्यूटी से जुड़े नियमों में अस्थाई ढील दी

विमानन क्षेत्र के नियामक डीजीसीए ने लंबी दूरी की उड़ानों के लिए पायलटों की उड़ान ड्यूटी समयसीमा में अस्थायी रूप से ढील दी है. इससे पहले इंडिगो को मिली राहत को लेकर एयरलाइंस पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने डीजीसीए की कड़ी आलोचना की थी और चेतावनी देते हुए कहा था कि यह सुरक्षा से सीधा समझौता है, पायलटों की थकान से यात्रियों की जान ख़तरे में पड़ सकती है.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने लंबी दूरी की उड़ानों के लिए पायलटों की उड़ान ड्यूटी समयसीमा (एफडीटीएल) में अस्थायी रूप से ढील दी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि इस कदम से उन एयरलाइनों को राहत मिलेगी जो अमेरिका, इज़रायल और ईरान संघर्ष के चलते पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के मद्देनजर लंबे और घुमावदार मार्गों के प्रबंधन में जूझ रही हैं.

इस संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों को बताया कि डीजीसीए का यह कदम सुचारू संचालन के लिए पायलटों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है.

उल्लेखनीय है कि बीते पिछले साल डीजीसीए ने नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियम लागू किए थे, जिससे पायलटों के एक सप्ताह में उड़ान भरने का समय कम हो गया था. नए नियमों के अनुसार, पायलटों को लगातार 48 घंटे का आराम दिया जाना अनिवार्य है, जो पहले 36 घंटे था.

ज्ञात हो कि पिछले साल दिसंबर 2025 में इंडिगो द्वारा अपनी एक हज़ार से अधिक निर्धारित उड़ानों को रद्द करने के कारण एक बड़ा हवाई यात्रा संकट खड़ा हो गया था, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था. उस दौरान देशभर के कई हवाई अड्डों पर अव्यवस्था देखने को मिली थी.

इस मामले को विपक्ष ने सरकार के ‘एकाधिकार मॉडल’ का नतीजा बताया था.

इंडिगो ने डीजीसीए से एफडीटीएल के नियमों में छूट देने की अपील की थी, कंपनी ने आश्वासन दिया था कि तीन महीने के भीतर उसकी परिचालन स्थिति फिर से सामान्य हो जाएगी.

बाद में जब डीजीसीए ने नए एफडीटीएल नियमों के कार्यान्वयन को निलंबित करके इंडिगो को अस्थायी राहत दी, तो एयरलाइंस पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एपीएआई) ने डीजीसीए की कड़ी आलोचना की थी और चेतावनी देते हुए कहा था कि यह फैसला सुरक्षा से सीधा समझौता है. पायलटों की थकान से यात्रियों की जान ख़तरे में पड़ सकती है.

डीजीसीए को लिखे पत्र में एसोसिएशन ने कहा था, ‘इंडिगो के पायलट अब कम आराम और अधिक थकान के साथ उड़ान भरेंगे, जिससे उनके यात्रियों को अधिक खतरा होगा.’

उस समय एसोसिएशन ने तर्क दिया था कि पिछले साल का संकट एयरलाइन की योजना संबंधी विफलताओं और ‘लंबे समय तक चलने वाली और अपरंपरागत कम मानव संसाधन रणनीति’ पर अत्यधिक निर्भरता में निहित था, जिसमें अपर्याप्त भर्ती, वेतन में वृद्धि न होना और उड़ान संचालन में कर्मचारियों की कमी शामिल थी.

गौरतलब है कि पायलटों की बढ़ती थकान को लेकर चिंताओं से निपटने के लिए तैयार किए गए आराम और ड्यूटी घंटों के नए मानदंडों को दिल्ली हाईकोर्ट के अप्रैल 2025 के आदेश के अनुसार, दो चरणों में इसे लागू किया जाना था.

इसमें साप्ताहिक आराम के घंटे 36 से बढ़ाकर 48 घंटे करने सहित कई प्रावधान एक जुलाई से लागू कर दिए गए थे. वहीं रात के समय पायलटों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाले बाक़ी प्रावधान एक नवंबर से लागू होने थे. इन्हीं अंतिम प्रावधानों के लागू होने के बाद इंडिगो संकट सामने आया था.