नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में बुधवार (8 अप्रैल) को एक अहम सुनवाई के दौरान नया तथ्य सामने आया. हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के परिजन और मामले के शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर ने अदालत में कहा कि ‘स्वातंत्र्यवीर’ की उपाधि सावरकर को किसी सरकार ने नहीं दी थी.
लाइव लॉ के मुताबिक, यह बयान पुणे की विशेष एमपी/एमएलए अदालत में दर्ज हुआ, जहां विशेष न्यायाधीश अमोल शिंदे के समक्ष सत्यकी सावरकर की गवाही और जिरह चल रही है. गांधी की ओर से अधिवक्ता मिलिंद पवार उनका प्रतिपरीक्षण (क्रॉस-एग्जामिनेशन) कर रहे हैं.
‘स्वातंत्र्यवीर’ उपाधि पर क्या कहा?
गवाही के दौरान सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि ‘स्वातंत्र्यवीर’ की उपाधि किसी सरकारी संस्था द्वारा प्रदान नहीं की गई थी. उनके मुताबिक, यह शब्द पहली बार लेखक सदाशिव रानडे द्वारा लिखी गई सावरकर की जीवनी में इस्तेमाल किया गया था.
उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास ऐसा कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि यह उपाधि जनता द्वारा दी गई थी. हालांकि, उन्होंने यह दावा जरूर किया कि यह कहना सही नहीं होगा कि यह उपाधि जनता ने नहीं दी.
लंदन प्रवास और लेखन पर बयान
सत्यकी सावरकर ने यह भी स्वीकार किया कि ब्रिटिश शासन के दौरान सावरकर पढ़ाई के लिए लंदन गए थे और वहां करीब चार साल तक रहे. इस दौरान उन्होंने कई किताबें और लेख लिखे.
उन्होंने बताया कि सावरकर की कुछ रचनाएं ब्रिटिश सरकार की नजर से बचाने के लिए दूसरे नामों से प्रकाशित की गई थीं. साथ ही, यह भी माना कि सावरकर की कई किताबें आज भी लंदन के पुस्तकालयों और अभिलेखागार में उपलब्ध हैं.
गवाही के दौरान सत्यकी ने यह भी कहा कि उन्हें सावरकर की कुल किताबों की संख्या, उनके प्रकार या विवरण की पूरी जानकारी नहीं है. उन्होंने खुद को लेखक बताया, लेकिन इतिहासकार नहीं.
उन्होंने यह भी माना कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि लंदन में इतिहासकारों या शोधकर्ताओं ने सावरकर के बारे में क्या लिखा है. साथ ही उन्होंने कहा कि सावरकर की जीवनी कई लेखकों ने लिखी है और जीवनी हमेशा आत्मकथा के आधार पर नहीं लिखी जाती.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राहुल गांधी द्वारा विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ दिए गए कथित आपत्तिजनक बयानों से जुड़ा है. शिकायत के मुताबिक, गांधी ने 5 मार्च 2023 को ब्रिटेन में ‘ओवरसीज कांग्रेस’ के एक कार्यक्रम में सावरकर को लेकर विवादित टिप्पणी की थी.
शिकायतकर्ता का आरोप है कि गांधी ने जानबूझकर झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाए, जिससे सावरकर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और उनके परिवार को मानसिक पीड़ा हुई. इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत अधिकतम सजा और दंड की मांग की गई है.
अदालत में सत्यकी सावरकर की जिरह अब 13 अप्रैल को आगे भी जारी रहेगी.
