ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आई-पैक के निदेशक को गिरफ़्तार किया, टीएमसी ने कहा- चुनावी साज़िश

ईडी ने पश्चिम बंगाल में कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप के तहत इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को गिरफ़्तार किया है. सत्तारूढ़ टीएमसी नेताओं ने इसे चुनाव से ठीक पहले साज़िश क़रार दिया है.

ईडी ने 2014 से अब तक करीब 6 हज़ार से अधिक मामले दर्ज किए हैं. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार (13 अप्रैल) को पश्चिम बंगाल में कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप के तहत इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया है.

गिरफ्तारी के बाद अधिकारियों ने चंदेल को पटियाला हाउस कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन के समक्ष पेश किया. सुनवाई सोमवार रात को शुरू हुई और मंगलवार की सुबह तक चली, जिसमें न्यायाधीश ने विनेश चंदेल को 10 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया.

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और दिल्ली पुलिस द्वारा आसनसोल क्षेत्र में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की खदानों से कोयला खनन के संबंध में दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की है.

अपनी रिमांड याचिका में ईडी ने आरोप लगाया है कि आई-पैक द्वारा अपराध की आय को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से कई करोड़ रुपये में बदला गया है, जिसमें से अब तक 50 करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं.

एजेंसी ने एक ऐसी विधि का दस्तावेजीकरण किया है जिसे वह ‘50% चेक’ प्रणाली बताया गया है. इसमें कहा गया है कि ‘भुगतान का केवल एक हिस्सा औपचारिक चैनलों के माध्यम से लिया गया था, जबकि शेष राशि नकद में प्राप्त की गई, जिसका कोई हिसाब नहीं रखा गया.’

हस्तांतरण की प्रक्रिया का विस्तृत विवरण देते हुए आवेदन में कहा गया है कि जांच में कंपनी द्वारा कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के कई स्तर उजागर हुए हैं, जिनमें हिसाब-किताब वाले और बिना हिसाब-किताब वाले धन की प्राप्ति, बिना व्यावसायिक औचित्य के असुरक्षित ऋण, फर्जी बिल और चालान जारी करना, तीसरे पक्ष से धन प्राप्त करना और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क के माध्यम से नकदी का लेन-देन शामिल है. इन निधियों का उपयोग चुनाव संबंधी खर्चों और अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया, जिनमें जनमत को प्रभावित करना भी शामिल है.

बताया जा रहा है कि चंदेल आई-पैक में 33% हिस्सेदारी रखते हैं. वे कंपनी के संस्थापक और निदेशक के रूप में कार्यरत हैं. उनकी संलिप्तता के संबंध में ईडी ने कहा कि ‘कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत, कंपनी के निदेशक तब उत्तरदायी होते हैं जब अपराध उनकी सहमति, मिलीभगत या लापरवाही से किया गया हो.’

द वायर द्वारा संपर्क किए जाने पर आई-पैक ने इन आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

‘चुनावी धांधली’

उल्लेखनीय है कि आई-पैक वर्तमान में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चुनाव अभियान का प्रबंधन कर रही है. राज्य में मतदान 23 और 29 अप्रैल को होना है.

गिरफ्तारी के तुरंत बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने लिखा, ‘बंगाल चुनाव से ठीक 10 दिन पहले आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह निष्पक्ष चुनाव के विचार को ही हिला देती है. ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की ओर बढ़ना चाहिए, इस तरह की कार्रवाई एक डरावना संदेश देती है: यदि आप विपक्ष के साथ काम करते हैं, तो अगला नंबर आपका हो सकता है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह लोकतंत्र नहीं है – यह डराना-धमकाना है. जब लोकतंत्र की रक्षा के लिए बनी संस्थाएं दबाव के औजार बनने लगती हैं, तो विश्वास कम होने लगता है. एक तरफ चुनाव आयोग है, तो दूसरी तरफ ईडी, एनआईए, सीबीआई जैसी एजेंसियां ​​सबसे संवेदनशील समय पर हस्तक्षेप कर रही हैं. यह निष्पक्षता का नहीं, बल्कि भय का माहौल पैदा करता है.’

मंगलवार को मीडिया को संबोधित करते हुए टीएमसी राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने ईडी को अत्यंत हताश बताते हुए गिरफ्तारी को पार्टी के चुनाव प्रचार को पटरी से उतारने का प्रयास करार दिया.

डेरेक ओ’ ब्रायन ने कहा, ‘चुनाव के पहले चरण में 10 दिन से भी कम समय बचा है और ऐसे में ईडी की कार्रवाई ‘उसकी चुनावी तैयारी को नुकसान पहुंचाने’ से कम नहीं है.’

तृणमूल के नेता ने आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाई संविधान का दुरुपयोग करने से कम नहीं है. उन्होंने कहा कि पीएमएलए के तहत 5,900 मामलों में से केवल 0.1 प्रतिशत मामलों में ही दोषसिद्धि हुई है, जो दर्शाता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार द्वारा चुनावों से पहले विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक कारणों से ईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि उन्हें परेशान किया जा सके.

उन्होंने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए करने का आरोप लगाया और सत्ताधारी पार्टी में शामिल होने की तुलना सफाई एजेंट से की.

उन्होंने कहा, ‘भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे 25 विपक्षी नेताओं में से 23 पर ‘निरमा’ का असर हुआ है. भाजपा में शामिल होते ही उन्हें निरमा का पैकेट दे दिया जाता है और वे सब धुल जाते हैं. यह एक राजनीतिक हथकंडा है. हम विनेश चंदेल की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग करते हैं और यह भी मांग करते हैं कि चुनाव से पहले बंगाल से केंद्रीय एजेंसियों को वापस बुलाया जाए.’

एजेंसी की कार्रवाई के राजनीतिक समय के बारे में पूछे जाने पर ओ’ब्रायन ने पिछले विधानसभा चुनावों के चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि भाजपा को चुनावी हार का डर है.

‘वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि मैच हाथ से निकल चुका है. जब आपको पहले से ही पता होता है कि आप फुटबॉल मैच आठ-शून्य से हारने वाले हैं, तो आप कुछ दिमागी खेल खेलने की कोशिश करते हैं. 2021 में भाजपा बंगाल की 47 सीटों पर 5% के अंतर से आगे थी– लगभग 10,000 वोटों से. इसलिए पहला लक्ष्य अर्धशतक बनाना है. उसके बाद दूसरा लक्ष्य किसी तरह पिछली बार के आंकड़े यानी 77 सीटों तक पहुंचना है. वे जीतने के लिए नहीं खेल रहे हैं; वे शर्मनाक हार को कम करने के लिए खेल रहे हैं… अब, गृह मंत्री (अमित शाह) यहां बैठेंगे, और जब वे 4 मई (मतगणना दिवस) को वापस जाएंगे, तो कहेंगे, ‘देखो, हमें 47 से बेहतर सीटें मिलीं.’ यही उनकी रणनीति है.’

विपक्ष ने टीएमसी पर सवाल उठाए

गौरतलब है कि यह गिरफ्तारी जनवरी 2026 में कोलकाता स्थित आई-पैक कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर ईडी द्वारा की गई पिछली छापेमारी के बाद हुई है. उस तलाशी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं थीं, जिसके बाद ईडी और सीएम के बीच मामला कोर्ट तक पहुंच गया था.

उस समय कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने मुख्यमंत्री की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे. चौधरी ने कहा था, ‘आई-पैक टीएमसी की आंख-कान का काम करती है. हम ईडी छापों पर ममता बनर्जी की चुनिंदा प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हैं.’

इस संबंध में मंगलवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने टीएमसी नेतृत्व और केंद्रीय एजेंसियों की चुनिंदा तैनाती दोनों पर सवाल उठाए.

माकपा नेता मोहम्मद सलीम ने द वायर से कहा, ‘यह कार्रवाई बहुत कम है और बहुत देर हो चुकी है. यह कोयला माफिया न केवल अवैध कोयला खनन में शामिल हैं, बल्कि कोल इंडिया ईसीएल के आधिकारिक खनन में भी शामिल हैं. कोयला खरीदने के लिए खरीदारों को टीएमसी के गुंडों को रिश्वत देनी पड़ती है. यह घोटाला प्रतीक जैन और अभिषेक बनर्जी द्वारा चलाया जा रहा है. यह बात एक दशक से अधिक समय से सार्वजनिक जानकारी में है.’

सलीम ने आधुनिक चुनावी फंडिंग में राजनीतिक सलाहकार कंपनियों की भूमिका की भी आलोचना की.

उन्होंने कहा, ‘आई-पैक जैसी कंपनियों को भाड़े के सैनिकों की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. वे सत्ताधारी पार्टी के लिए ‘सुपारी किलर’ का काम करती हैं और भारत में लोकतंत्र और चुनाव प्रचार को खत्म कर रही हैं.’

उन्होंने आगे जोड़ा कि आई-पैक अकेली नहीं है. भाजपा द्वारा चलाई जा रही छह अन्य कंपनियां भी हैं. इसलिए या तो सीबीआई और ईडी अपने रवैये में ढिलाई बरत रही हैं, या वे चुनिंदा कार्रवाई कर रही हैं.