नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों के 47वें दिन संघर्ष और अधिक गंभीर होता नजर आ रहा है. एक ओर जहां सैन्य दबाव बढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध रोकने की मांग भी तेज हो गई है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बुधवार (15 अप्रैल) को दावा किया कि उसने ईरान के बंदरगाहों की ‘पूर्ण नाकेबंदी’ लागू कर दी है. कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के मुताबिक, मध्य पूर्व में समुद्री बढ़त बनाए रखते हुए अमेरिकी बलों ने यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार पर निर्भर है और नाकेबंदी लागू होने के 36 घंटे के भीतर ही समुद्री रास्तों से होने वाला आर्थिक कारोबार लगभग पूरी तरह रोक दिया गया है.
इस बीच, अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच भी मतभेद सामने आने लगे हैं. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा इज़रायल के साथ रक्षा सहयोग समझौते के स्वत: नवीनीकरण को रोकने के संकेत देने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी आलोचना की है. ट्रंप ने एक इतालवी अखबार से बातचीत में कहा कि मेलोनी में ‘साहस की कमी’ है और वह ईरान पर हमलों में अमेरिका का साथ नहीं दे रहीं.
दूसरी तरफ, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्राजील, कोलंबिया, इंडोनेशिया, जॉर्डन, सिएरा लियोन और स्विट्जरलैंड समेत कई देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर लेबनान में बिगड़ती मानवीय स्थिति और विस्थापन संकट पर गहरी चिंता जताई है. इन देशों ने लेबनान में तत्काल युद्धविराम की मांग की है.
हालांकि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रहने के बावजूद ज़मीनी हालात में कोई ठहराव नजर नहीं आ रहा. अमेरिका में लेबनान और इज़रायल के राजनयिकों के बीच बातचीत चल रही है, लेकिन इसके समानांतर इज़रायल ने दक्षिणी लेबनान में हमले जारी रखे हैं. टायर और अब्बासिय्येह जैसे इलाकों में हवाई हमले किए गए हैं, जिनमें कम से कम दो लोगों की मौत की खबर है.
कुल मिलाकर, एक ओर आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्ध रोकने की अपील कर रहा है. ऐसे में यह संघर्ष अब और जटिल और अस्थिर चरण में प्रवेश करता दिख रहा है.
